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| On 3 years ago

Ragging: Ragging in School and College, Types, Effects, Acts against Ragging, Punishment

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रैंगिंग विरोधी कानून

रैगिंग शिक्षण संस्थाओं में नव आगुन्तक छात्रों के साथ होने वाली एक बुराई है। जो आस्ट्रेलिया,ब्रिटेन, भारतश्रीलंका व अन्य कॉमनवेल्थ देशों में प्रचलित है जिसे अमेरिका में "हेजिंग' के नाम से भी जाना जाता है।

रैगिंग क्या है:

रैगिंग" का तात्पर्य है ऐसा कोई कृत्य करना जिससे किसी विद्या को
शारीरिक अथवा मानसिक क्षति कारित हो, शर्मिन्दगी हो, जैसे (1) किसी विद्यार्थी को चिढ़ाना या उसका मजाक उड़ाना अथवा (2) किसी विद्यार्थी से ऐसा कार्य करने को कहना जिसे वह सामान्य अनुक्रम में ना करे।

रैगिंग का उदभव

हैं वर्तमान में भारतीय शिक्षण संस्थाओं में रैगिंग अपनी गहरी जड़े जमा चुकी है, किन्तु मूल रूप से रैगिंग एक पश्चिमी संकल्पना है। रैगिंग की शुरूआत यूरोपीय विश्वविद्यालयों में सीनियर छात्रों द्वारा नये छात्रों के स्वागत में किए जाने वाले मजाक.के साथ हुई। किन्तु धीरे धीरे रैगिंग सम्पूर्ण विश्व में प्रसिद्ध हो गई। वर्तमान में विश्व में करीब सभी देशों में रैगिंग के विरूद्ध कड़े नियम बनाये गये हैं तथा रैगिंग पर.प्रतिबंध लगाया जा चुका है किन्तु भारत में वर्तमान में भी रैगिंग वीभत्स रूप में
प्रचलित है।

रैगिंग के प्रकार

यह कहा जाता है कि आदमी की कल्पना की कोई सीमा नहीं है। रैगिंग के संदर्भ में यह बात सत्य है क्योंकि इस मामले में भी मानव की कल्पना की कोई सीमा नहीं है। वर्तमान में रैगिंग अमानवीय, भद्दे तथा यातनापूर्ण तरीके से शालीनता व नैतिकता के विरूद्ध प्रचलित है। रैगिंग के कॉलेजों में कुछ प्रचलित तरीके हैं :
(1 ) ड्रेस कोड रैगिंग (2) औपचारिक परिचय (3) मौखिक यातना भद्दे, असभ्य सवाल करना) (4) मजाक उड़ाना,मूर्ख बनाना (5) होस्टल रैगिंग (6) ड्रग्स, शराब लेने के लिये बाध्य करना (7) सीनियर छात्रों के लिए नोट्स बनाना (8) यौन उत्पीड़न, आदि।

रैगिंग के प्रभाव

रैगिंग के कारण छात्रों पर विभिन्न दुष्प्रभाव पड़ते हैं जैसे ..
(1) शारीरिक मानसिक कष्ट (2) यौन उत्पीडन (3)मानवाधिकारों का हनन (4) जबरन मादक पदार्थों व ड्रग्स सेवन की शुरुआतकरना (5) कॉलेज छोड़ना (6) सामूहिक हिंसा (7) मृत्यु (8) आत्महत्या

रैगिंग का प्रभाव छात्र के अतिरिक्त उसके परिवार व शिक्षण संस्थाओं पर भी पडता है। रैगिंग से पीडित छात्र के परिवार को भी अपने बच्चे को देखकर पीड़ा भोगनी पडती है। ऐसे शिक्षण संस्थान जहां छात्रों की रैगिंग ली जाती है, की समाज में छवि खराब होती है।

रैगिंग के विरूद्ध विधान

रैगिंग की घटनायें रोकने के लिए तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र, आन्ध्रप्रदेश तथा पश्चिम बंगाल ने रैगिंग के विरूद्ध निम्न कानून बनाये हैं:
(1) The Prohibition & Ragging Act, 1995 (Applicable in
State of Tamil Naidu)
(2) The Andhra Pradesh Prohibition of Ragging ,
Act 1997
(3) TheKerala Prohibition of RaggingAct, 1998
(4) The Maharashtra Prohibition of RaggingAct, 1999
(5) The Prohibition of Ragging in Educational Institutes Act
इसके अतिरिक्त भारत के अन्य राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों में रैगिंग अन्य प्रशासनिक आदेशों व सर्कुलर द्वारा प्रतिबंधित है।
रैगिंग के संबंध में माननीय सर्वोच्य न्यायालय द्वारा भी विभिन्न न्यायिक दृष्टान्तों में दिशा निर्देश दिये गये हैं।
(1) रैगिंग ऑफ फ्रेशर्स इन तिरूवनन्तपुरम गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कालेज बनाम स्टेट
'(2) विश्व जागृति मिशन जरिये अध्यक्ष बनाम केन्द्रीय सरकार जरिये केबिनेट सेक्रेटरी तथा अन्य में यह दिशा निर्देश दिये गये कि रैगिंग के मामले में दण्ड स्वरूप
(1) छात्रवृति अन्य लाभ रोके जावे
(2) विभिन्न कार्यक्रम आदि में सम्मिलित होने पर रोक लगाना
(3) परीक्षा परिणाम रोकना
(4) होस्टल तथा मैस से निकाला जाना
(5) रैगिंग से संबंधित विधान व आदेश छात्रों तथा उनके अभिभावकों के ज्ञान में लाना
(6) होस्टल के वार्डनो का नये छात्रों से सम्पर्क में रहना
(7) रैगिंग के दुष्प्रभावों के बारे में नोटिस बोर्ड, पोस्टर, साईन बोर्ड आदि से जानकारी प्रदान करना
(8) छात्र के माईग्रेशन सर्टिफिकेट में यदि छात्र द्वारा रैगिंग में भाग लिया गया है तो उसका उल्लेख करना
(9) छात्रों और उनके अभिभावकों से अण्डरटेकिंग लिया
जाना
(10) समाज को रैगिंग के प्रति संवेदनशील बनाना
(11) रैगिंग रोकने में विफल रहने को लापरवाही का कृत्य मानना
(12) ऐसे संस्थान जहां रैगिंग के मामले सामने आये उनकी वित्तीय सुविधायें वापस लेना।
रैगिंग के प्रत्येक मामले में कॉलेज स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी ठहराया जाना आवश्यक है। ऐसे मामले में कॉलेज स्कूल प्रशासन द्वारा दोषी छात्र के विरूद्ध एफ आई आर दर्ज कराई जानी चाहिये तथा ऐसे प्रत्येक मामले की जानकारी उनके द्वारा जिला स्तर पर गठित एन्टी रैगिंग कमेटी व संबंधित यूनिवर्सिटी को दी जानी चाहिये।
रैगिंग का अपराध करने वाले दोषी छात्र को जुर्माने या कारावास के दण्ड से दंडित किया जा सकता है।
रैगिंग छात्रों की छात्रों द्वारा की जानी वाली समस्या है, अत: इसका उपाय भी छात्रों द्वारा ही संभव है। ऐसे समय में जबकि कॉलेजों में रैगिंग के मामलों में वृद्धि हो रही है, छात्र समुदाय को इस अमानवीय कृत्य के विरूद्ध अपनी चेतना जागृत करनी चाहिये जिससे निर्दोष छात्र इसका शिकार होने से बच सके तथा शिक्षण संस्थानों का तिरस्कृण होने से रोका जा सके।

( विधिक जाग्रति अभियान 2018)

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