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तीसरे भाव में राहु का फल | स्वास्थ्य, करियर और धन

तीसरे भाव में राहु का फल | स्वास्थ्य, करियर और धन
तीसरे भाव में राहु का फल

तीसरे भाव में राहु का शुभ फल (Positive Results of Rahu in 3rd House in Astrology)

  • तीसरे भाव में राहु अरिष्टनाशक, और दु:खनाशक माना गया है।
  • तीसरे स्थान के राहु से व्यक्ति दृढ़ शरीर नीरोग, बलवान् होता है। बाहुबल बहुत होता है।
  • जातक पराक्रमी, साहसी, उद्योगी, प्रतापी, दृढ़विवेकी, प्रवासी, विद्वान् एवं भाग्यवान होता है।
  • तृतीय भाव का राहु प्रभावान्वित जातक त्वरितबुद्धि और चपल होता है। संसार में कीर्तिमान होता है।
  • यशस्वी, प्रतिष्ठित और दानी होता है। सर्वदा सब से मैत्री और सभी के साथ समभाव से आदर पूर्ण व्यवहार करता है।
  • किसी से भेदभाव नहीं करता और शुद्ध अंतस्करण से व्यवहार करता है।
  • भाग्योदय द्वारा द्रव्य लाभ सहज ही होता है, और यत्न करने की विशेष आवश्यकता नहीं रहती है।
  • तीसरे घर में राहु होने पर जातक लक्षाधीश, सुखी और चिरकाल तक धन पाने वाला होता है।
  • जातक का उत्तम भाग्य होता है। वह भाइयों को सहयोग प्रदान करता है।
  • कई प्रकार के सुखों का उपभोग करता है। विलास आदि का सुख प्राप्त होता है।
  • तीसरे भाव में राहु से व्यक्ति को वाहन और नौकर प्राप्त होते हैं। राजबल से युक्त, राजा द्वारा सम्मानित होता है।
  • योगाभ्यासी होता है। शत्रुओं के ऐश्चर्य का नाश करता है।
  • स्वयं शुभ मार्ग पर चलता है। मित्रसुख सम्पन्न होता है।
  • जातक परदेश में जाता है।
  • जातक के घर में तिल, निष्पाव, मूंग, कोदव आदि धान्य होते हैं।
  • निष्पाव एक प्रकार की दाल है।
  • राहु बलवान होने से शत्रुओं का नाशक, शत्रुभय रहित होता है।

तीसरे भाव में राहु का अशुभ फल (Negative Results of Rahu in 3rd House in Astrology)

  • तृतीय भाव में राहु होने से शरीर में व्यंग रहता है।
  • जातक अभिमानी, भीरु, संशयी वृत्ति का, आलसी होता है।
  • भाइयों का विरोध करने वाला होता है। जातक के भाइयों की मृत्यु होती है।
  • इस स्थान के राहु से किसी भाई का संसार नहीं चलेगा, किसी की अपघात से मृत्यु होगी।
  • कोई लापता होगा। किसी से अदालत में मुकदमें लड़ने पड़ेंगे।
  • इस तरह तीसरे घर में राहु भ्रातृ सुख का बाधक है।
  • इस स्थान का राहु पहले पुत्र का भी मारक है। इस स्थान के राहु से दो भाई एक स्थान पर नहीं रह सकते।
  • पशुओं की मृत्यु होती है। पशुधन नष्ट होता है।
  • जातक मानसिक रोगों से युक्त होता है। बहुत स्वप्न आते हैं।
  • तृतीयस्थ पुरुषराशि का राहु भ्रातृ मारक है-या तो भाई होंगे नहीं और यदि हुए तो ये निरुद्यमी और पुत्रहीन होंगे।