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| On 2 months ago

चौथे भाव में राहु का फल | स्वास्थ्य, करियर और धन

चौथे भाव में राहु के होने से जातक के पास बहुत अलंकार होते हैं। इसमें जातक परदेश में रहनेवाला, प्रवासी और घुमक्कड़ होता है। राहु के साथ शुभग्रह होने से अथवा शुभग्रह की दृष्टि होने से शुभफल होते हैं।

चौथे भाव में राहु का फल

चौथे भाव में राहु का शुभ फल (Positive Results of Rahu in 4th House in Astrology)

  • चौथे भाव में
    राहु (Rahu in 4th House) के होने से जातक राजा का प्रेमपात्र होता है। राजाओं के द्वारा हित होता है।जातक को माता का सुख होता है और चित्त की स्थिरता होती है। जातक साहसी होता है।
  • चतुर्थभाव में राहु के होने से जातक के पास बहुत अलंकार होते हैं। जातक परदेश में रहनेवाला, प्रवासी होता है। घुमक्कड़ होता है। सदा घूमनेवाला होता है।
  • चतुर्थ राहु विशेष
    उन्नतिदायक नहीं होता है-नौकरी से जीवनसुख पूर्वक कटता है। प्रवास बहुत होता है। साझीदारी या नौकरी में सफलता हो सकती है। यह योग दत्तक लिए जाने का हो सकता है। विविध चमत्कार देखने में आते हैं।
  • चौथे भाव में राहु के होने से जातक की दो स्त्रियाँ होती हैं। एक पुत्रवाला होता है। नौकर होते हैं अथवा स्वयं नौकरी करता है। राजयोग में 36 से 56 वें वर्ष तक बहुत भाग्योदय होता है।
  • राहु के साथ शुभग्रह होने से अथवा शुभग्रह की दृष्टि होने से शुभफल होते हैं।

चौथे भाव में राहु का अशुभ फल (Negative Results of Rahu in 4th House in Astrology)

  • चौथे भाव में राहु (Rahu in 4th House) के होने से तथा राहु के साथ शुभग्रह हो या उसकी दृष्टि हो तो उपर दिये दुष्टफल नहीं होते। राहु अशुभ सम्बन्ध में होने से कभी भी जातक सुखी नहीं होता है। चिन्तित, दु:खी रहता है।
  • पुरुषराशि में चतुर्थभावस्थ राहु होने से द्विभार्या या द्विमाता योग संभव है।
  • चतुर्थ राहु पुरुषराशि में होने से जन्मसमय से ही पिता को सर्वप्रकार से आर्थिक कष्ट देता है-दीवाला होना-नौकरी छूटना आदि बुरे फल प्राप्त होते हैं।