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पांचवें भाव में राहु का फल | स्वास्थ्य, करियर और धन

पांचवें भाव में राहु होने से जातिका शास्त्रों को जानने वाली, दयालु, भाग्यवान् और कर्मठ होती है। संतति न होने का कारण प्राय: सर्प संबंधी शाप होता है।पंचमभाव में राहु होने से जातिका धनहीन, कुल धननाशक, निर्धन होती है।

पांचवें भाव में राहु का फल

पांचवें भाव में राहु का शुभ फल (Positive Results of Rahu in 5th House in Astrology)

  • पंचमभाव में राहु (Rahu in 5th House) होने से जातिका की बुद्धि तीक्ष्ण होती है।जातिका शास्त्रों को जानने वाली, दयालु, भाग्यवान् और कर्मठ होती है। संतति न होने का कारण प्राय: सर्प संबंधी शाप होता है। संतानाभाव पूर्वजन्म के सर्प संबंधी शाप का परिणाम होता है-भृगसूत्र के अनुसार नागदेव-पूजन शापोद्धारक हो सकता है।
  • पंचम के राहु से पहली संतति बहुधा कन्या होती है। जिस मनुष्य के जन्मसमय में राहु
    पंचमभाव में हो उसे पुत्रलाभ होता है। पाश्चात्यमत से जातिका कम्पनी के व्यवसाय में सफल होती है।
  • पंचमस्थ राहु पुरुष राशि में होने से शिक्षा पक्ष में गलतियाँ दृष्टिगोचर होती हैं-नैसर्गिक योग्यता के अनुसार शिक्षा नहीं होती है। जैसे जातिका वकील बनने की नैसर्गिक योग्यता रखती है किन्तु शिक्षा इंजिनीयर की होती है, अत: सफलता नहीं मिलती।
  • पंचमस्थ राहु पुरुष राशि में होने से पुरूषसुख तथा पुत्रसुख अच्छा नहीं मिलता है। पति रुग्ण रहता है, किसी कारण से पुत्रोत्पत्ति नहीं होती। अत: दूसरा विवाह करना होता है। पंचमस्थ राहु पुरुष राशि में होने से जातिका बुद्धिमान् और कीर्तिमान किन्तु अभिमानी होती है।

पांचवें भाव में राहु का अशुभ फल (Negative Results of Rahu in 5th House in Astrology)

  • पांचवें भाव में राहु (Rahu in 5th House) होने से जातिका की बुद्धि अतीव
    मंद होती है। जातिका की संतान की मृत्यु कृमि, वायु, पत्थर, लकड़ी, पानी या पर्वत संबंधी किसी वस्तु से होती है।
  • पंचमभाव में राहु होने से जातिका धनहीन, कुल धननाशक, निर्धन होती है। जातिका के शरीर का रंग अच्छा नहीं होता। राहु मतिभ्रम उत्पन्न करता है। जातिका डरपोक और कुमार्गगामी होती है। कठोरहृदय होती है। चिन्ता और सन्ताप की अधिक वृद्धि होती है।
  • पंचम भावस्थ राहु प्रभावान्वित जातिका प्राय: अभागी होती है।पंचमभाव में राहु होने से जातिका नाक से बोलती है। जातिका गन्दी रहती है। जातिका की विद्या में अरुचि रहती है। अन्य लेखकों ने पुत्राभाव, पुत्रों का रोगी होना-पुत्रनाश आदि अशुभफल बतलाए हैं।
  • पांचवें भाव में स्थित राहु के कारण जातिका को पुत्र का सुख नहीं मिलता है। जातिका को चिरकाल तक चित्त को संतप्त रखने वाली पुत्रविषयिणी चिन्ता रहती है। सर्प
    के शाप से पुत्र नष्ट होता है। नागदेव की पूजा करने से पुत्र प्राप्ति होती है। पहली सन्तान में देर या कुछ बाधा होती है।
  • पंचम में राहु होने से जातिका का पुत्र दीन व मलीन होता है। जातिका बहुतेरा पुरुषार्थ करती है तो भी धन प्राप्ति नहीं होती है। आनन्द और विलास में रुकावटें आती हैं।
  • पांचवें भाव में राहु होने से जातिका उदररोगी, पेट से संबंधित बीमारियों से पीडि़त रहती है। पेट में शूल, गैस आदि के रोग, मन्दाग्नि रोग होता है। जातिका के हृदय (कलेजे) में पीड़ा होती है। चित्त विभ्रम हुआ रहता है ।
  • पांचवे स्थान में राहु के रहने से जातिका को पुरूष पक्ष से कष्ट मिलता है। कोपना पति की चिन्ता से मन में सन्ताप रहता है। मित्रों से भी विरोधभाव रहता है।
  • पंचमभाव में राहु होने से सुख
    नहीं मिलता, मित्र थोड़े होते हैं। राजकोप से राजदण्ड मिलता है। जातिका नीचों की संगति में रहती है। जातिका का निवास किसी नीच गांव में होता है। राहु की दशा में जातिका की मानहानि होती है।
  • पंचमभाव में राहु के अशुभफल पुरुष राशि में अनुभव गोचर होते हैं। राहु प्रबल अशुभ योग में होने से विवाह नहीं होता, अवैध पुरूष संबंध होता है।
  • इस राहु के जातिका पति-पुत्रसुख के अभाव में संशोधन आदि कामों में मग्न रहती है-इसकी संतान ग्रन्थ ही होते हैं इन्हीं से ये यशस्वी और प्रसिद्ध होती है। राहु पीडि़त होने से गर्भपात, सन्तान सुख का नाश होता है। राहु पंचमभाव में चन्द्रमा के साथ होने से जातिका पुत्रहीन होती है।