राजस्थान सिविल सेवा /सर्विसेज (पेंशन) नियम 1996, सहित

भारतीय सविंधान के अनुच्छेद 309 के तहत प्रदेशो के राज्यपालों को प्रादेशिक सरकारों के कर्मचारियों की सेवाशर्तों हेतु अधिनियम बनाना होता है इसी तहत 24 मार्च 1951 को यह नियम प्रसारित किए गए। ये नियम 1-4-1951 से लागू हुए है।

इन नियमों में एक आम कर्मचारी के समझने योग्य कुछ महत्वपूर्ण बातें निम्नानुसार है-

1. सरकार अपने अधिकारियों को कुछ शर्तों सहित अपनी शक्तियाँ प्रदान कर सकती है। इसी आधार पर विभागाध्यक्ष ज्वाइनिंग टाइम में व्रद्धि करने, APO के समय को ड्यूटी मानने, पुनः नियुक्ति स्वीकार करने इत्यादि हेतु सक्षमता प्राप्त करते है।

2. जब किसी कार्मिक को अपनी जन्मतिथि पता नही हो तो वर्ष पता होने पर उस वर्ष की एक जुलाई, माह पता हो तो उस माह की 16 तारिख जन्मतिथि समझी जाएगी।

3. जन्मतिथि में परिवर्तन सम्बन्धित आवेदन सेवानिवृत्ति से 3 वर्ष पूर्व तक कर दिए जाने चाहिए अन्यथा अस्वीकार कर दिए जाते है।

4. संवर्ग (कैडर) का तातपर्य किसी सेवा अथवा उसके अंग की उस निर्धारित संख्या से है जो स्थाई पदों के आधार पर पृथक इकाई के रूप में रखी गई हो।

5. एक कार्मिक द्वारा व्यक्तिगत रूप से किये गए व्यय की पूर्ति के रूप में क्षति-पूरक भत्ते प्रदान किये जाते है।

6. सक्षम प्राधिकारी से आशय उस अधिकारी से है जिसे इन नियमों के द्वारा अथवा इनके अधीन शक्तियॉ प्रदान की गई हो।

7. वैदेशिक सेवा से तातपर्य उस सेवा अवधि से है जिसमे एक राज्य कर्मचारी अपना मूल वेतन सरकार की संचित -निधि के अतिरिक्त अन्य स्रोतों ( साधनों) से प्राप्त करता हैं।

8. पदभार ग्रहण काल (जोइनिंग टाइम) का तातपर्य किसी राज्य कर्मचारी को दिए गए उस समय से है जो उसे अपने नए पद का कार्यभार सम्भालने के लिए अथवा एक स्थान से दूसरे स्थान तक जहां पर वह पदस्थापित किया गया है, यात्रा के लिए स्वीकृत किया गया हैं।

9. माह से तातपर्य एक कलेण्डर माह से है। महीनों व दिनों के लिए प्रथमतः पूरे मास गिनने चाहिए और बाद में दिनों की संख्या जोड़ देनी चाहिए।

10. स्थानापन्न (Officiate)- एक राज्य कर्मचारी किसी पद पर स्थानापन्न रूप से कार्य उस समय करता है जब वह एक ऐसे पद पर कार्य करता है जिस पर अन्य कर्मचारी का पदाधिकार हो। यदि सरकार उचित समझे तो किसी राज्य कर्मचारी को ऐसे रिक्त स्थान पर स्थानापन्न रूप से नियुक्त कर सकती है जिस पर किसी अन्य कर्मचारी का पदाधिकार नही है।

11. स्थाई पद से तातपर्य समयावधि के बिना स्वीकृत वेतन की निश्चित श्रंखला की दर वाले पद से है।

12. परिवीक्षाधीन कर्मचारी वह है जो किसी सेवा अथवा संवर्ग (केडर) में स्थाई रूप से रिक्त पद पर नियमित रूप से नियुक्त किया गया हो।

13. स्थाई नियुक्ति से तातपर्य राज्य कर्मचारी की उस स्थाई पद पर नियुक्ति से है जिस पर वह पदाधिकार अर्जित करता है। (Substantive अपॉइंटमेंट).

14. अस्थाई पद से तातपर्य एक ऐसे पद से है जो एक वेतनमान में निश्चित समय अथवा अवधि के लिए सर्जित किया जाए। (Temporary Post)

15. सावधि पद (Tenure post) से तातपर्य एक ऐसे स्थाई पद से है जिसे एक अधिकारी एक निश्चित अवधि से अधिक समय के लिए धारण नही कर सकता हैं।

16. स्थानांतरण का तातपर्य किसी राज्य कर्मचारी का जहाँ पर वह नियुक्त है, वाले स्थान से अन्य स्थान पर
(A) नए पद का कार्यभार संभालने हेतु
(B) मुख्यालय के स्थान परिवर्तन
के फलस्वरूप प्रस्थान करता है।

17. पेंशन के अयोग्य संस्थापन वह है जिसका वेतन राज्य बजट में संवेतन मद से नही चुकाया जाकर अन्य मदो- कार्यालय व्यय/अन्य प्रभार( मद) से चुकाया जाता है।

18. अन्यथा आदेश/आज्ञा नही होने पर राजकीय सेवा में प्रविष्ट होने की न्यूनतम आयु 16 वर्ष व अधिकतम आयु 33 वर्ष होगी। अल्पवयस्क यानी 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति को ऐसे पदों पर नियुक्त नही किया जा सकता जिनके लिए प्रतिभूति लेना आवश्यक है।

19. भारतीय सेनाओ हेतु आरक्षित पदों हेतु अधिकतम आयु सीमा 50 वर्ष है।

20. राज्य सेवा में रहते हुए मेट्रिक या अन्य समकक्ष परीक्षा पास करने पर सेवापुस्तिका में पूर्व में अंकित जन्मतिथि परिवर्तित नही की जा सकती है।

21. 1.1.1979 को राज्य सेवा में था उसकी सेवा पुस्तिका/ विवरणिका में अंकित जन्मदिनांक ही स्वीकार की जाएगी चाहे उसका आधार कुछ भी था इसे कोई प्रमाणपत्र आधार पर परिवर्तित नही किया जा सकेगा परन्तु 1.1.1979 या इसके पश्चात नियुक्त हेतु जन्मतिथी निर्धारण माध्यमिक/उच्च माध्यमिक प्रमाणपत्र आधार पर किया जाएगा।

22. राज्य सेवा में कर्मचारी की नियुक्ति स्वास्थय सम्बन्धी प्रमाणपत्र लेकर ही की जाती है चाहे कर्मचारी पूर्णकालीन हो अथवा अंशकालीन। समस्त कार्मिको के प्रथम वेतन विपत्र में इस प्रमाणपत्र को सलग्न किया जाता है। नियम 10 के तहत स्वास्थ्य परीक्षा के प्रमाणपत्र पर जिला चिकित्सा अधिकारी/ उच्च पद के हस्ताक्षर मान्य है। ऐसे आशार्थी जिन्हें 3 माह या अधिक अवधि के लिए नियुक्त किया जाता है उन्हें अपनी नियुक्ति के समय चिकित्सा स्नातक द्वारा दिया गया प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होगा।

23. अन्यथा स्पष्ट प्रावधान नही होने पर एक राज्य कर्मचारी का सम्पूर्ण समय सरकार के निष्पादन पर रहेगा तथा उसे समुचित प्राधिकारी द्वारा अतिरिक्त पारिश्रमिक की मांग के बिना , किसी भी प्रकार से नियोजित किया जा सकता है।

24. एक समय में एक स्थाई पद पर दो या दो से अधिक कर्मचारियों की नियुक्ति स्थाई रूप से नही की जा सकती है।

25. एक कर्मचारी स्पष्ट रूप से रिक्त स्थाई पद पर स्थाई नियुक्त होने पर उस पद पर अपना पदाधिकार प्राप्त कर लेता है व तत्पश्चात किसी अन्य स्थाई पद पर उसको पदाधिकार प्राप्त हो जाता है तो वह अपने पूर्व पद पर पदाधिकार धारण करना समाप्त कर देता है।

26. सरकार किसी कार्मिक को एक पद से दूसरे पर कार्य में अकुशलता या दुर्व्यवहार या लिखित प्रार्थना पत्र के आधार पर कर सकती है।

27. एक राज्य कर्मचारी को सरकार द्वारा नियमो के अनुसार अनिवार्य रूप से “राजकीय जीवन बीमा योजना” में मासिक योगदान करना होता है व राजस्थान पेंशनर्स मेडिकल कन्सेशन योजना में अंशदान देना होता है।

क्रमशः……. शेष अगली कड़ी में। कल।

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