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Rajasthan Panchayat Raj Act 1994: Main Provisions

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राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 : प्रमुख प्रावधान!

राजस्थान पंचायत राज अधिनियम 23 अप्रेल1994 को लागू हुआ। इनकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित है।

ग्राम सभा - ग्राम पंचायत के सभी पंजीकृत मतदाता सदस्य होंगे। एक वित्तिय वर्ष में इसकी चार बैठकें होगी। इसकी अध्यक्षता सरपंच करेगें। बैठकें - 26 जनवरी, 1 मई, 15 अगस्त व 2 अक्टूबर (15 दिन के भीतर) को निर्धारित की गयी है।

त्रि-स्तरीय संरचना - पंचायत राज व्यवस्था का ढांचा त्रि-स्तरिय रखा गया है।
(अ) ग्राम पंचायत - प्रति 3000 जनसंख्या पर 9 सदस्य, फिर 1000 जनसंख्या पर - 2 सदस्यों की वृद्धि होगी। निर्वाचन प्रत्यक्ष रूप से वयस्क मताधिकार से किया जायेगा।
(ब) पंचायत समिति - विकास खण्ड स्तर पर, मध्यम स्तर पर, 1 लाख आबादी पर 15 सदस्य होंगे। प्रति 15000 की आबादी पर दो अतिरिक्त सदस्य होंगे। पदेन सदस्य - सभी सरपंच उस क्षेत्र के MLA (MP नहीं)। पदेन सदस्य प्रधान, उप प्रधान के पद से हटाने में मत नहीं दे सकते।
(स) जिला परिष्द : यह सर्वोच्च संस्था होती , उसमें दो प्रकार के सदस्य होते है।
(i) निर्वाचित सदस्य - निर्धारित निर्वाचन क्षेत्र से 4 लाख की आबादी पर 17 सदस्य तथा प्रति
एक लाख अधिक पर 2 और सदस्यों की वृद्धि होगी।
(ii) पदेन सदस्य - जिले के सभी प्रधान, वे MLA, MP जिनका निर्वाचन क्षेत्र पूर्ण या आंशिक रूप से जिला परिषद क्षेत्र में पड़ता हो। राज्यसभा सदस्य जिनका नाम सम्बन्धित जिला
परिषद् क्षेत्र में हो।

योग्यता - जिस संस्था में चुनाव लड़ना चाहता , उस क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम होना अनिवार्य है। न्यूनतम आयु 21 वर्ष होनी चाहिये।

आरक्षण - सभी स्तरों पर निर्वाचित सदस्यों व अध्यक्ष पदों पर SC,ST का जनसंख्या अनुपात में तथा OBC-21% (पहले - 15 प्रतिशत था)। महिलाओं का 50 प्रतिशत होगा। (पहले - 33 प्रतिशत था।)

कार्यकाल - प्रथम बैठक की तारीख से 5 वर्ष होगा। विघटन की स्थिति में 6 माह में चुनाव करना अनिवार्य होगा। विघटन की स्थिति में पुनर्गठित संस्था मूल संस्था की शेष अवधि के लिए कार्य करेगी। यही व्यवस्था सदस्यों व अध्यक्षों के लिए भी लागू रहेगी।

वार्ड सभा :- मूल एक्ट में इसका प्रावधान नहीं था। वर्ष 2000 में इसका प्रावधान किया गया। इसमें वार्ड के पंजीकृत मतदाता सदस्य होते है। इसकी वर्ष में दो बैठक अनिवार्य।

गणपूर्ति - वार्डसभा व में सदस्य संख्या का 10 प्रतिशतजिनमें आरक्षित वर्गों के सदस्यों की
ग्रामसभा उपस्थिति उनकी जनसंख्या के अनुपात में हो।

दो से अधिक संतान वाले उम्मीदवार अयोग्य - 27 नवम्बरके पश्चात् पर 1995 तीसरी संतान होने उम्मीदवार चुनाव लड़ने के अयोग्य होगा।

राज्य निर्वाचन आयोग का कार्यकाल 5 वर्ष या 65 वर्ष तक जो भी पहले हो। प्रथम आयुक्त अमरसिंह (II) नेकराय मसीन (III) - इन्द्रजीत खन्ना ( IV) - ए. के. पाण्डेय, खन्ना (V) - श्रीमती डॉ. ज्योतिकिरण

राज्य वित्त आयोग के प्रथम अध्यक्ष - के.के.गोयल (23 अप्रेल1994), II - हीरालाल देवपुरा (7 मई 1999) III - माणिकचंद 15.9.05, IV - विश्वेन्द्र सिंह।

जिला आयोजन समिति - प्रत्येक जिले में कुल 25 सदस्य। 20 जिले की ग्रामीण व शहरी क्षेत्र की जनसंख्या के अनुपात में जिला परिषद व नगरपालिका निकायों के निर्वाचित सदस्यों द्वारा अपने में से चुने जायेगें। 3 सदस्य पदेन (कलेक्टर CEO,Ad CEO तथा 2 सदस्य। राज्य सरकार द्वारा मनोनित होंगे। इसका कार्य - जिले की विकास योजनाओं को समेकित कर राज्य सरकार को भेजना होता है।

लेखों का अंकेक्षण - हर वित्तीय वर्ष के बाद निदेशक स्थानीय निधि द्वाराअंकेक्षण होता है तथा AG द्वारा भी जाँच की जाती है।

पद से हटाना - पहले सरपंचप्रधान प्रमुख को सदस्यों के 2/3 बहुमत से हटाया जाता था। किन्तु वर्तमान में 3/4 बहुमत से हटाया जा सकता है। (25 अप्रेल 07 के अध्यादेश) अविश्वास प्रस्ताव भी दो वर्ष पूर्व नहीं लाया जा सकता है। शहरी निकायों में भी महापौर, सभापित अध्यक्ष, उपमहापौर, उपसभापति उपाध्यक्ष को हटाने के लिए यही व्यवस्था है।

• त्याग पत्र प्रदान करना
(i) सरपच /उपसरपंच ,वार्डपंच- विकास अधिकारी को।
(ii) उप प्रधान व पंचायत समिति सदस्य - प्रधान को
(iii) प्रधान - जिला प्रमुख को
(iv) उप जिला प्रमुख व जिला परिषद् सदस्य - जिला प्रमुख को
(v) जिला प्रमुख - कमिश्नर को

• प्रशासनिक अधिकारी
(i) ग्राम पंचायत - ग्राम सेवक (ii) पंचायत समिति - BDO(iii) जिला प्रमुख - CEO

ग्राम पंचायतों में आरक्षित श्रेणी के सरपंच का पद रिक्त हो जाने पर उसी श्रेणी के सदस्य को बहुमत के आधार पर नियुक्त करने का अधिकार सम्बन्धित जिला कलक्टर को सोपा गया। पूर्व में यह नियुक्ति पंचायती राज निदेशालय द्वारा होती थी।

• DRDA का अब अध्यक्ष जिला प्रमुख होगा। पहले कलेक्टर थे। DRDA के परियोजना निदेशक अब जिला परिषद् का CEO होगा ।

न्यनतम निर्वाचित सदस्य संख्या - ग्राम पंचायत-9, पंचायत समित-15, जिला परिषद्-17

बैठकें
* ग्राम पंचायत की प्रत्येक 15 दिन में कम से कम एक बार।
*पंचायत समिति की प्रत्येक माह में कम से कम एक बार
*जिला परिषद् की प्रत्येक तीन माह में कम से कम एक बार

*विभागीय कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए पंचायती राज विभाग का नागरिक अधिकार। पत्र जारी।

*पंचायतीराज संस्थाओं के निर्वाचित सदस्यों अधिकारियों व कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने हेतु संस्थान है।
( i) ग्रामसेवक प्रशिक्षण केन्द्रमंडोर,
(ii) पंचायत प्रशिक्षण केन्द्रडूगरपुर;
(iii) पंचायत प्रशिक्षण केन्द्र
अजमेर)
(iv) इन्दिरा गाँधी पंचायती राज व ग्रामीण विकास संस्थान, जयपुर एवं
(v) हरिश्चन्द्र माथुर राजस्थान राज्य लोक प्रशासन संस्थान, जयपुर व उदयपुर ।

*पहल कार्यक्रम - विभागों के ग्राम स्तरीय कर्मचारियों को ग्राम पंचायत के सीधे नियन्त्रण में रखने के लिए पहल कार्यक्रम (पायलट प्रोग्राम) राजसंमद जिले में लागू किया गया। इसे मिनी सचिवालय नाम दिया गया। इसके अन्तर्गत विभिन्न विभागों की सेवाओं का ग्राम पंचायत स्तर पर अभिसरण व परिचय स्थापित करना इसका मुख्य उद्देश्य था।

श्री हरी सिंह जी रतनू। प्रधानाचार्य।