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| On 1 year ago

Rajasthan School Education Department: Success will be achieved through struggle.

राजस्थान स्कूल शिक्षा विभाग : सँघर्ष से मिलेगी सफलता की मंजिल।

राजस्थान स्कूल शिक्षा विभाग का राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान है। 65 हजार से अधिक स्कूलों में नामंकित 85 लाख से अधिक विद्यार्थियों की सेवा हेतु सवा चार से अधिक नियुक्त कार्मिको के समक्ष बहुत सी चुनोतियाँ है। इन चुनोतियो से टकराकर ही सफलता का परचम फहराया जा सकेगा।

नई चुनोतियाँ

नई शिक्षा नीति को अमलीजामा पहनाना।

नई शिक्षा नीति के ड्राफ्ट को गत सत्र में ही आम जनता के समक्ष प्रस्तुत कर सुझाव अपेक्षित किये गए थे। नई शिक्षा नीति की घोषणा के पश्चात उसको अमलीजामा पहनाना एक चुनोती है। नई शिक्षा नीति को लागू करने में उपलब्ध संसाधनों के अनुकूलतम उपयोग के साथ नवीन संसाधनों की उपलब्धता एक अहम कार्य सिद्ध होने जा रहा है।

नेशनल एजुकेशन क्वालिटी इंडेक्स में प्रथम स्थान प्राप्त करना।

गत सत्र में नीति आयोग व मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा जारी रैंकिंग में राजस्थान ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया था। पहले स्थान पर केरल व तीसरे स्थान पर कर्नाटक पर बना हुआ है। राजस्थान को इंडेक्स में प्रथम स्थान पर लेकर राजस्थान स्कूल शिक्षा का सामुहिक दायित्व है व इसमें हमे सम्पूर्ण साक्षर राज्य केरल व निष्ठावान कर्नाटक से कड़ी प्रतिस्पर्धा करनी है व सभी पैरामीटर  पर फोकस रहकर कार्य करना एक गम्भीर चुनोती है।

रोजगारपरक शिक्षा मुहैया करवाना।

आज युवाओं के समक्ष सबसे बड़ी चुनोती शिक्षा समाप्ति के पश्चात रोजगार प्राप्त रोजगार प्राप्त करना है। हमको व्यवसायिक शिक्षा को बड़े पैमाने पर लागू करने व उसको परिणामोन्मुखी करना ही होगा। आज व्यवसायिक शिक्षा समय की आवाज है तथा हमकों नवीन शिक्षा व्यवस्था आरम्भ करनी होगी ताकि विद्यार्थियों को मात्र कक्षा कक्षा तक सीमित नही रहकर कार्यानुभव प्राप्त हो सके।

फिनलैंड के समान नवाचार लागू करना।

फिनलैंड ने सम्पूर्ण दुनिया का ध्यान अपनी तरफ आकृष्ट किया है। फिनलैंड ने अपने कॅरिकुलम को निरन्तर समायोजित करते हुए बाजार की आवश्यकता के अनुसार अपने पाठ्यक्रम को संवर्धित किया है। राजस्थान भारत का अग्रणी राज्य है अतः हमको वर्तमान संसाधनों का पूर्ण उपयोग निर्धारित करते हुए नए संसाधनों का प्रबंधन करना होगा।

साक्षरता दर में निरन्तर सुधार करना।

राजस्थान की वर्तमान साक्षरता दर     फीसदी है। सम्पूर्ण समाज को साथ लेकर ही राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है अतः हमको उपलब्ध विशाल युवा शक्ति को फोरी सामाजिक सरोकारों में उलझाने की अपेक्षा ठोस कार्ययोजना निर्मित करके सम्पूर्ण समाज मे साक्षरता की अलख जगानी होगी ताकि विश्व परिदृश्य में राजस्थान सुनहरी सफलता प्राप्त कर सके।

खेलकूद में बेहतरीन नियोजन अपेक्षित।

राजस्थान स्कुक शिक्षा

विभाग के कैलेंडर में खेलकूद को पर्याप्त स्थान दिया जा रहा है। राजस्थान की स्कूलों की मिल्कियत में पर्याप्त संसाधन भी उपलब्ध है। इसके उपरांत भी राष्ट्रीय खेलकूद में हम फिसड्डी साबित हो रहे है। खेलकूद में हमको सूक्ष्म नियोजन के साथ ही फोकस्ड ट्रेनिंग सिड्यूल अपनाने होंगे।

पीईईओ कार्यालयों को सुद्रढ़ करना।

राजस्थान में कमोबेश प्रत्येक ग्रामपंचायत स्तर पर अब माध्यमिक व उच्च माध्यमिक स्तर की शिक्षा सुविधा उपलब्ध है एवम नवाचारी रूप से इनमें पीईईओ कार्यालय स्थापित किये गए है। इनके माध्यम से ग्राम पंचायत के अन्य प्रावि व उप्रावि स्कूलों को सम्बलन प्रदान किया जा रहा है। इन पीईईओ कार्यालयों को अधिक भौतिक संसाधनों के साथ पर्याप्त मानवीय संसाधन उपलब्ध करवाने होंगे ताकि ये "सेंटर ऑफ एक्सीलेंस" के रूप में कार्य कर सके।

शिक्षा में क्रमशः गुणात्मक सुधार व कम्प्यूटर लिट्रेसी बढाना।

समाज में अब साक्षरता से कही बढ़ कर " कम्प्यूटर लिट्रेसी" का महत्व है अतः विद्यार्थियों को कम्प्यूटर फ्रेंडली रखते हुए कम्प्यूटर लिट्रेसी रेट को आगे बढ़ाना है व साथ ही सभी स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हेतु प्रयास करना है। कार्मिको में कम्प्यूटर अवेयरनेस व लिट्रेसी बढ़ने के साथ ही विभिन्न विभागीय पोर्टल्स की उपादेयता बढ़ जाएगी। इन वेबपोर्टल के प्रभावी उपयोग से सूचना प्राप्ति, समेकन व अपडेटेशन तीव्रता हासिल होने से सूचारू  प्रबन्धन लक्ष्य प्राप्त होंगे।