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| On 2 years ago

Rajinikanth's 2.0 Movie Review:  An extraordinary movie with social responsibility plot.

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रोबोट रिलोडेड 2.0 -फ़िल्म समीक्षा व सम्वाद।

सेव बर्ड्स, सेव अर्थ।

सुपर स्टार रजनी, अक्षय कुमार, एआर रहमान, स्टोरी, स्क्रीनप्ले व निर्देशन शंकर ने मिलकर भारतीय फिल्म्स जगत की सबसे महंगी फिल्मों में से एक 400 करोड़ लागत से बनी "रोबोट रिलोडेड 2.0" पेश की है।

फ़िल्म एक शानदार पेशकश है एवम यह एक कम्प्लीट मूवी बनी है। फ़िल्म का पहला खास पहलु इसमें मोबाइल के अनावश्यक प्रयोग व इसके रेडिएशन से मानव को बचाने का संदेश है।

सामजिक सरोकारी सन्देश के पश्चात फ़िल्म का दूसरा खास पहलु इसका प्रेजेंटेशन है जो किसी भी तरह हॉलीवुड से कमतर नही बल्कि आम हॉलीवुड फिल्मों से कही बेहतर है। फ़िल्म में जबरदस्त स्पेशल इफेक्ट्स व एनिमेशन वर्क है।

फ़िल्म का तीसरा प्लस पॉइंट इसमें रजनीकांत व अक्षयकुमार की जबरदस्त एक्टिंग है। रजनीकांत निसन्देह आल टाइम सुपरस्टार है एवम इस फ़िल्म में उनके जवानी वाले दिनों की ताजगी 100% फीसदी मौजूद है। अक्षय कुमार आजकल जिस सामाजिक लीडरशिप को पेश करते है वह खलनायक किरदार के बावजूद जारी है।

फ़िल्म की कहानी साधारण है कि एक पक्षी प्रेमी सामाजिक कार्यकर्ता पक्षीराजन (अक्षय कुमार) की मोबाइल नेटवर्क के बढ़ते रेडियेशन के कारण पक्षियों के जीवन पर उतपन्न संकट की तरफ ध्यान खींचने की तमाम कोशिश निष्फल हो जाती है एवम वह मानवता का दुश्मन बन जाता है। पक्षीराजन के हमले से मानवता को बचाने की जिम्मेदारी प्रोफेसर वशीकरण (रजनीकांत) अपने सुपर रोबोट चिट्टी के नवीन अवतार 2.0 व नीरा की मदद से पूरी करते है।

फ़िल्म के कुछ सम्वाद-

1. साइंस के हर अविष्कार को पहले नुकसानदेह ही समझा जाता है।
2. जो समझ के बाहर हो उसके लिए हम सोच लेते है कि यह आतंकवादियों ने किया है।
3. मनुष्य को जिंदा रहना है तो पक्षियों का जिंदा रहना जरुरी है।
4. सेलफोन टावर के विकिरण के कारण पक्षियों की सँख्या में कमी आ रही है।
5. मोबाइल से अल्जाइमर, अवसाद व डिप्रेशन बढ़ रहा है।
6. मोबाइल के प्रयोग को सीमित करने हेतु कानून की जरूरत है।
7. भूख लगेगी तो क्या आदमी अपना हाथ काट के खा लेगा?
8. सेलफोन रखने वाला हर व्यक्ति हत्यारा है।
9. साधारण मनुष्य का "ओरा" पाँच फ़ीट तक होता है व संतो का बहुत दूर तक।
10. श्रेय सृजनकर्ता का होता है साये का नही।
11. प्रिय उपभोक्ता, आप सब सम्पर्क से बाहर होने वाले है क्योंकि आपकी मौत होने वाली है।
12. हमे बचाने वाली तो टेक्नोलॉजी है लेकिन हम उसका गलत उपयोग कर रहे है।
13. रेडिएशन को कम करना होगा, यह भूमि हमारी प्रोपर्टी नही।
14. अपने साये को को थेंक्स कौन कहता है।

फ़िल्म एक जबरदस्त पेशकश है। फ़िल्म मध्यांतर के बाद अत्यंत तीव्र गति प्राप्त कर लेती है। फ़िल्म का म्यूजिक साधारण है इसमें एआर रहमान वाली बात नही बनी। कैलाश खरे भी सामान्य रहे।

कुल मिलाकर फ़िल्म शानदार है। इसे हम फैमिली वॉच केटेगरी में रखते है। फ़िल्म को हम रिकमेंड करते है व साथ मे आपसे गुजारिश भी करते है कि फ़िल्म में मोबाइल के बेहताशा प्रयोग व उसके रेडियेशन को कम करने हेतु आप भी प्रयास कीजिये।

फ़िल्म ने इस सर्द मौसम में बॉलीवुड में गर्मी उतपन्न कर दी है। फ़िल्म निश्चित रूप से सभी के लिए फायदेमंद सिद्ध होने वाली है। अक्षय कुमार व रजनीकांत को बधाई।
सादर।
सुरेंद्र सिंह चौहान।