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| On 3 weeks ago

कर्नाटक बना राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को लागू को करने वाला देश का पहला राज्य

कनार्टक राज्य ने मिसाल पेश करते हुए देश की नई राष्टृीय शिक्षा नीति (N.E.P.)को लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। इसको लेकर आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित केंद्रीय शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इसकी जानकारी दी। कर्नाटक की सराहना करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP) को लागू करने में कर्नाटक ने अन्य राज्यों के समक्ष एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। सरकार ने विश्वास जताया कि स्कूली शिक्षा में इन अहम बदलावों से नई शिक्षा नीति बेरोजगार तैयार नहीं करेगी। स्कूल में ही बच्चे को नौकरी के लिए जरूरी प्रोफेशनल शिक्षा दी जाएगी।

केंद्रीय मंत्री प्रधान ने बताया कि कक्षा 1 से लेकर बारहवीं तक देश में 310 मिलियन विद्यार्थियों का समूह है। हर वर्ष 2.5 करोड़ नए सदस्यों

को भी जोड़ा जाए तो एनईपी के लाभों को इन लोगों तक पहुंचाना बड़ी चुनौती का काम है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि इस शिक्षा नीति (N.E.P.) के बेहतर क्रियांवन के लिए सरकार डिजिटलीकरण व रिर्सच व विकास की दो नीतियों को शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि कर्नाटक एनईपी को लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। इसके सफल बनाने के लिए प्रत्येक बच्चों तक पहुंचना होगा।

कर्नाटक सरकार की नई डिजिटलीकरण नीति

मुख्यमंत्री बोम्मई ने कहा कि डिजिटलीकरण के तहत प्रत्येक गांव, स्कूल, यूनिवर्सिटी में यह नीति (NEP) पहुंचाई जाएगी। विश्वविद्यालयों में स्नातक स्तर के विद्यार्थियों को आईपैड वितरित किए जाएंगे। वहीं उन्होंने शिक्षा में इन बदलावों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी आभार जताया।

क्या है नई शिक्षा नीति


नई शिक्षा

नीति (NEP) को पिछले वर्ष जुलाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंजूदी दी थी। इस शिक्षा नीति के तहत कक्षा 10+2 के फाॅर्मेट को खत्म कर दिया गया है। वर्तमान में हमारे देश में स्कूली पाठ्यक्रम कक्षा 10+2 के हिसाब से चलता है, लेकिन इस नीति के लागू होने के बाद यह 5+3, 3 +4 के हिसाब से होगा। सरल शब्दों में समझें तो प्राइमरी से दूसरी कक्षा तक एक हिस्सा, इसके बाद कक्षा तीन से पांच तक सैकेंड पार्ट व कक्षा 6 से 8 तक तीसरा हिस्सा, कक्षा 9 से 12 तक आखिरी हिस्सा होगा।

इस तरह से रहेगा फाॅर्मुला


इस नीति के तहत प्रथम तीन वर्ष तक बच्चे आंगनबाड़ी में प्री स्कूलिंग की शिक्षा ग्रहण करेंगे। इसके बाद अगले दो वर्ष के लिए कक्षा 1 व 2 में बच्चे

स्कूल में पढ़ेंगे। इन पांच वर्षों में बच्चों की पढ़ाई के लिए एक नया पाठ्यक्रम तैयार होगा। खासतौर पर एक्टिविटी आधारित शिक्षा व्यवस्था पर ध्यान दिया जाएगा। इसमें तीन से आठ वर्ष तक की आयु के बच्चे शामिल रहेंगे। इस प्रकार से पढ़ाई का पहला चरण पांच वर्ष में पूर्ण होगा।
द्वितीय चरण


इसके तहत कक्षा 3 से 5 तक बच्चों की पढ़ाई करवाई जाएगी। इसमें नए प्रयोगों के तहत उन्हें विज्ञान, गणित, आर्ट आदि से संबंधित पढ़ाई करवाई जाएगी। इस चरण में 8 वर्ष से लेकर 11 वर्ष तक के बच्चों को शामिल किया जाएगा।

तृतीय चरण


इसके तहत कक्षा 6 से 8 तक की पढ़ाई करवाई जाएगी। इसमें 11 वर्ष से 14 वर्ष की उम्र तक के बच्चों को कवर किया जाएगा। कौशल विकास के कोर्स भी इन कक्षाओं में करवाए जाएंगे। वहीं विषय पर आधारित पाठ्यक्रम बच्चों को पढ़ाया जाएगा।

चतुर्थ चरण


इस चरण में कक्षा 9 से 12 के विद्यार्थियों को पढ़ाया जाएगा। जिसमें विषयों का गंभीरता से अध्ययन करवाया जाएगा। वहीं विद्यार्थियों को पसंद का विषय चुनने की आजादी भी रहेगी। इससे पूर्व सरकारी स्कूलों में प्री स्कूलिंग की पढ़ाई नहीं करवाई जाती थी। कक्षा 1 से 10 तक सामान्य पढ़ाई ही करवाई जाती थी। कक्षा 11 में विषय चुनने की व्यवस्था थी।