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| On 2 months ago

सोलर विंड्स हैक से अमेरिका पर साइबर अटैक

SolarWinds Hack या SolarWinds Attack, हैकर्स द्वारा अमेरिकी कम्पनी पर एक बहुत बड़ा सायबर हमला किया गया था जिसका पता दिसम्बर 2020 में चला था। इस अटैक ने ना केवल अमेरीकी जगत समेत समूची दुनिया को स्तब्ध कर दिया था। सुरक्षा संस्थानों एवं कॉमर्स की दुनिया हेतु यह अत्यंत महत्वपूर्ण घटना थी। इस सायबर अटैक के कारणअनेक राष्ट्रों के मध्य सम्बन्धो में कटुता आने के साथ ही यह भविष्य हेतु भी एक बड़ी चुनौती हैं। आइये, इस खतरनाक सायबर अटैक के बारे में अधिक जानकारी लेते हैं।

  • SolarWinds नामक एक अमेरिकी साइबर कम्पनी है। इस कम्पनी को हैकर्स ने अपना निशाना बना कर हैकिंग का प्रयास किया था !
  • SolarWinds नामक यह कम्पनी अमेरिका की अनेक सरकारी एजेंसियों व विश्व की दिग्गज कम्पनियों को साइबर सर्विसेस देती हैं।
  • हैकर्स द्वारा  एक जबरदस्त साइबर सुरक्षा आक्रमण था जिसके कारण अनेक अमेरिकी शीर्ष सरकारी एजेंसियों जैसी प्रमुख फर्मों के डाटा पर हैकर्स की पहुँच बन गई थी।
  • केलिफोर्निया स्तिथ कम्पनी Fire Eye ने सबसे पहले इस सायबर अटैक के प्रमाण जुटाए थे। इसी कम्पनी ने इसकी सूचना NSA को प्रदान की थी।
  • SolarWinds  के नए सीईओ सुधाकर रामाकृष्ण हैं।

कुछ हैकर्स ने 2020 के अंत मे  टेक्सास स्थित सोलरविंड के सिस्टम में चुपके से सेंध लगाई और कंपनी के सॉफ्टवेयर सिस्टम में  वायरस कोड एड कर दिए थे।   Solarwinds में 33,000 ग्राहक हैं जिनको यह कम्पनी सर्विस देती हैं । जब SolarWinds कम्पनी ने अपने कस्टमर कम्पनियों व फर्म्स को सिस्टम अपडेट भेजा तो पहले से वायरस कोड जुड़े अपडेट को कस्टमर्स को भेज दिया गया। यह कार्य कम्पनी ने अनजाने में किया था लेकिन इस कारण से हैकर्स की पहुँच अनेक महत्वपूर्ण कम्पनियों के डाटा तक हो गई थी।


बीबीसी की एक हालिया रिपोर्ट के आधार पर कहा जा सकता है कि अमेरिका व रूस के मध्य सम्बन्धो में जारी तनातनी निकट भविष्य में कम होने वाली नही हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने यह व्यक्तत्व दिया है कि अमेरिका रूस द्वारा लापरवाह या आक्रामक कृत्यों का जवाब देगा। अमेरिका के विदेश मंत्री की इस कठोर टिप्पणी के मूल में SolarWind भी एक महत्वपूर्ण कारण हैं। इस अटैक की कहानी यहां खत्म नही होती बल्कि शुरू होती हैं।


अटैक का द्वितीय चरण

इस साइबर अटैक से जैसे कि हम जानते है वायरस कोड अनेक महत्वपूर्ण फर्मों के सिस्टम तक पहुँच गए एवम कथित रूप से हैकर्स की पहुँच इन फर्मो तक हो गई। यहाँ हैकर्स ने अपने हमले का नया चरण शुरू कर दिया। वे कम्पनियों के सिस्टम पर अपनी पकड़ को और मजबूत करने के लिए नए वायरस एड करते गए। इस हमले की गम्भीरता को आप ऐसे समझे कि SolarWinds ने अपने हजारों कस्टमर्स को ये अपडेट भेजे थे।


SolarWinds के महत्वपूर्ण कस्टमर्स

सोलर विंड्स अमेरिका के बहुत बड़ी सायबर कम्पनी है तथा उसके कस्टमर्स बहुत बड़े व महत्वपूर्ण संस्थान हैं। जिनमे अमेरिकी सरकारी फर्म्स भी सम्मिलित है, इसलिए यह हमला अमेरिकी सरकार हेतु बेहद गम्भीर व संवेदनशील मामला था। इसके अलावा SolarWinds के कस्टमर्स में विश्व की टॉप लेवल, ब्ल्यू चिप व फोर्ब्स लिस्ट में सम्मिलित कम्पनियां व फर्म्स हैं। निश्चित रूप से इतने बड़े कस्टमर्स के सिस्टम तक हैकर्स की पहुँच ने अमेरिकी जगत में एक तूफान ला दिया था।


SolarWinds के कस्टमर्स में आया तूफान।

इस साइबर अटैक ने अमेरिका के सुरक्षा व कॉमर्स जगत में तूफान मचा दिया था। बड़ी बड़ी फर्म्स इस अटैक के कारण अपने महत्वपूर्ण, सवेदनशील व गोपनीय जानकारी के लीक होने के भय से अपनी सायबर सिक्योरिटी को चेक करवाने लगी। उन्होंने इस पर जबरदस्त इन्वेस्टमेंट भी आरंभ कर दिया। किसी भी सरकार व व्यापार के अपने बिजनेस सीक्रेट होते है तथा उन सीक्रेट्स का आउट होना या आउट होने की रिस्क मात्र से बहुत बड़ी हलचल उठ खड़ी हुई।


SolarWinds अटैक के पीड़ितों का भय।

बहुत सारे सायबर अटैक इस विश्व मे लोग एक दूसरे के खिलाफ करते है लेकिन SolarWinds पर यह अटैक इतनी कुटिलता से किया गया था कि SolarWinds कम्पनी व तत्पश्चात उसकी कस्टमर फर्म्स को इसकी भनक तक नही लगी। कुछ एक्सपर्ट यह भी कहते है कि यह पता तक लगाना इन पीड़ित कम्पनियों के लिए मुश्किल है कि उन पर हुआ अटैक असफल हुआ था या सफल। इन कम्पनियों के सामने अब अनेक प्रश्न है व ये अपनी भविष्य की योजनाओं को लेकर भी आशंकित हैं।

SolarWinds अटैक के हैकर्स कोन हैं?

साइबर की दुनिया एक ऐसी दुनिया है जिसमे कोई भौगोलिक सीमा निर्धारित नही हो सकती । यह भी नही जाना जा सकता है कि अटैक कहा से हुआ है? अगर जान लिया जाता है तो उसका निदान सम्भव है। अटैक के बारे में सिर्फ अभी आकलन है व आरोप है। जिन पर यह आरोप लगता है वे उसे सिरे से नकार देते है। इसलिए कहा जाता है कि यह एक छदम व आभासी युद्ध हैं।


SolarWinds अटैक के उद्देश्य

यह कहना मुहाल है कि अटैक किसने किया है लेकिन यह कहना आसान है कि आखिर ये अटैक क्यों किया गया था? इस अटैक को करने का एकमात्र उद्देश्य विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था व विश्व की सबसे बड़ी ताकत अमेरिका के हितों के विपरीत था। अमेरिका के सुरक्षा ढांचे में सेंध डालना व बड़ी कम्पनियों के डाटा को लीक करना था।


SolarWinds अटैक के भावी परिणाम।

अमेरिका के बड़े एक्सपर्ट व कम्पनियों के सीईओ का यह मानना है कि इस अटैक के नुकसान को आकलन करना बेहद जटिल है क्योंकि इस अटैक ने बहुत बड़ी सँख्या में अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्रों पर स्थापित बेशुमार कम्प्यूटर व सिस्टम्स को भेद दिया था। अतः यह कहना मुहाल है कि इस अटैक द्वारा कितने स्तर की सूचनाएं भेदी गई थी अथवा परिवर्तित की गई थी अथवा नष्ट की गई थी एवम इन सबका भविष्य पर क्या असर दिख सकता हैं।


Cyber Attack का खतरा।

SolarWinds अटैक पहला या अंतिम सायबर अटैक नही है। भविष्य में भी ऐसे अटैक व काउंटर अटैक की सीरीज बन सकती है। इन अटैक के कारण कोई भी सिस्टम शतप्रतिशत सुरक्षित नही रह गया है। यह मानवता पट भी एक बड़ा हमला है तथा इस प्रकार की हैकिंग से ना केवल सुरक्षा व अर्थव्यवस्था पर खतरा प्रतीत होता है बल्कि यह मानवीय विनाश का भी कारण बन सकता हैं। इन साइबर अटैक के सम्बंध में सबसे आसान बात यह भविष्यवाणी करना होगा कि वे जारी रहेंगे।


SolarWinds अटैक के बाद का भविष्य।

इस बहुत बड़े व खतरनाक हमले के बाद सम्पूर्ण विश्व की सुरक्षा व्यवस्था व बड़े बिजनेस ग्रुप आशंका में हैं। अब वे साइबर सुरक्षा के वर्तमान सिस्टम का कम्प्लीट आकलन कर उसमें प्रभावी सुधार लाने का प्रयास करेंगे लेकिन इस कार्य मे बहुत बड़ी धनराशि को इन्वेस्ट करना पड़ेगा। कुछ बड़े राष्ट्र अपनी सुरक्षा हेतु कम्पलीट डिफरेंट सायबर सिस्टम डवलप करने पर प्लान करेंगे लेकिन छोटे व मध्यम अर्थव्यवस्था वाले राष्ट्रों हेतु बहुत बड़ी समस्या के रूप में हैं।


SolarWinds  के नए सीईओ सुधाकर रामाकृष्ण

श्री रामकृष्ण ने कंसास स्टेट यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में मास्टर डिग्री और नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के केलॉग स्कूल ऑफ मैनेजमेंट से मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने पहले भी अनेक बड़ी कम्पनियों के प्रबंधन व संचालन में भूमिका निर्वहन किया हैं। श्री रामकृष्ण पर एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है साथ ही उनका विराट अनुभव भी हैं।