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Republic Day: A guideline for a speech by Principal or Headmaster

एक संस्था प्रधान द्वारा गणतंत्र दिवस पर भाषण की रूपरेखा।

गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर विद्यालय में आयोजित होने वाला कार्यक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। इस अवसर पर स्थानीय समुदाय, जनप्रतिनिधि, अधिकारी गण,भामाशाह, अभिभावक, स्टाफ सदस्य व विद्यार्थी उपस्थित होते है।

यह कार्यक्रम विद्यालय हेतु अत्यन्त महत्वपूर्ण होता है। इस कार्यक्रम से विद्यालय की साख सार्वजनिक होती है। एक व्यवस्थित, नियोजित व परिणाममूलक कार्यक्रम आयोजन से विद्यालय विकास में सहायता प्राप्त होती है।

अन्य कार्यक्रम के साथ ही संस्थाप्रधान का सम्बोधन बहुत महत्वपूर्ण होता है। संस्थाप्रधान द्वारा अपने सम्बोधन हेतु निम्नानुसार तैयारी की जा सकती है।

संस्थाप्रधान के सम्बोधन की रुपरेखा।

स्वागत:

स्वागत में मुख्य अतिथि, अध्यक्ष, मंचासीन अतिथियों, प्रमुख ग्रामीण जनों, सहयोगकर्ताओँ, स्टाफ व विद्यार्थियों को शामिल किया जाता है। उचित रहता है कि संस्था प्रधान को सभी का सही नाम याद रहें।

गणतंत्र दिवस पर चर्चा।

गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देना, इस राष्ट्रीय पर्व के शुभअवसर पर देश के अमर शहीदों व महान व्यक्तियों को याद करना, संविधान की आवश्यकता, भारतीय संविधान का निर्माण, संविधान समिति, अम्बेडकर साहब का परिचय, संविधान की विशेषता।

विद्यालय का संक्षिप्त परिचय।

संस्था प्रधान अत्यंत संक्षेप में विद्यालय स्थापना, क्रमोन्नति , वर्तमान छात्र सँख्या व स्टाफ सँख्या का उल्लेख कर सकते है।

विद्यालय की वर्तमान उपलब्धियां।

विद्यालय की वर्तमान उपलब्धियों में गत सत्र के कक्षा 5,8,10 व 12 बोर्ड परीक्षाओं का परिणाम, बोर्ड में विशेष सफलता वाले विद्यार्थियों का उल्लेख, नामांकन वृद्धि, नए निर्माण, खेलकूद प्रतियोगिता, विज्ञान मेले, इंस्पायर अवार्ड, शैक्षिक भृमण, विद्यालय में आयोजित विशेष कार्यक्रम, छात्रवर्ती वितरण सँख्या, उपचारात्मक शिक्षण कक्षा, विज्ञान क्लब, भौतिक संसाधन व्रद्धि को सम्मिलित किया जा सकता है।

विद्यालय की विशेषताएं।

उपलब्धियों के पश्चात विद्यालय की प्रमुख विशेषताओं को सम्मिलित करना यथा- आईसीटी क्लास, प्रोजेक्ट उत्कर्ष, लहर कक्ष, एसआईक्यूई, कम्प्यूटर लेब, लाइब्रेरी, मिड डे मील
इत्यादि।

स्थानीय समुदाय से अपील।

अपने उदबोधन के अंत मे विद्यालय की भौतिक आवश्यकतओ का उल्लेख कर स्थानीय समुदाय व भामाशाहों से सहयोग की अपील।

धन्यवाद।

उदबोधन के अंत मे कार्यक्रम में आने वाले अतिथियों, कार्यकर्ताओं व स्टाफ को धन्यवाद प्रदान करना। जयहिंद।

नोट!

उपरोक्त रूपरेखा मात्र एक प्रारूप है जिसमे स्थानीय परिवेश के अनुसार कई विषय सम्मिलित किये जा सकते है। यह रूपरेखा मात्र एक प्रयास है ताकि आवश्यक विषय सम्मिलित हो सके।

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