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Rules for Higher Studies

राज्य कर्मचारी द्वारा उच्च अध्ययन अथवा सार्वजनिक परीक्षा में सम्मिलित होना।

जब भी कोई कर्मचारी अपने सेवाकाल के दौरान जब वर्तमान योग्यता में वृद्धि करना चाहता हैं अथवा किसी सार्वजनिक परीक्षा में भाग लेना चाहता हैं तो उसको विभागीय नियमो की जानकारी आवश्यक हैं। नियमो की जानकारी के अभाव में कार्मिक को अनेक समस्याओ का सामना करना पड़ता हैं।

राज्य सरकार के कार्मिकों द्वारा उच्च अध्य्यन अथवा सार्वजनिक परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए विभागीय अनुमति मांगी जाती है। इस सम्बंध में राजस्थान स्कूल शिक्षा विभाग से सम्बंधित समस्त नियमों, व्यवस्था व परिपत्रों का यहाँ प्रस्तुत किया जा रहा है।

Rules relating to higher Studie in Rules Book | शिक्षा विभागीय नियमावली में उच्च अध्य्यन संबंधित नियम

शिक्षा विभागीय नियमावली का प्रकाशन 1997 को हुआ था। इस नियमावली में सार्वजनिक परीक्षा की अनुमति प्राप्त करने संबंधित विस्तृत दिशा निर्देश प्रदान किये गए हैं। इसके अतिरिक्त शोध कार्य , प्रशिक्षण , व्यवसायिक शिक्षा के अनुमति संबंधित नियम भी दिए गए हैं। किसी भी कार्मिक द्वारा

नियमानुसार अनुमति आवश्यक रूप से प्राप्त कर लेनी चाहिए अन्यथा विपरीत स्तिथि का सामना करना पड़ सकता हैं।
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Orders relatede to Private Study | प्राइवेट शिक्षा संबंधित विभागीय आदेश

पत्राचार या प्राइवेट अध्ययन करने के लिए नियंत्रण अधिकारी को सूचित करना आवश्यक है। पत्राचार अथवा प्राइवेट सार्वजनिक परीक्षा के सम्बंध मे शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश निम्नानुसार हैं।

Permission to appear in Public Exam | सार्वजनिक परीक्षा सम्बन्ध में स्वीकृति।

उच्च अध्ययन/पाठ्यक्रम/अतिरिक्त विषयों में अध्ययन/ सार्वजनिक परीक्षा में सम्मिलित होने की अनुज्ञा के संबंध में निम्नलिखित नियम बहुत महत्वपूर्ण हैं।

किसी भी सार्वजनिक परीक्षा में सम्मिलित होने सम्बंधित अनुमति नियुक्ति अधिकारी द्वारा प्रदान की जाती है। नियुक्ति अधिकारी द्वारा प्रदत्त स्वीकृति के सम्बंध में निम्नलिखित नियम लागू रहते है। इन नियमो के आधार पर ही किसी कार्मिक को प्राप्त अनुमति का उपयोग करना चाहिए।

1. शिक्षण संस्थान में अध्ययन का समय यदि कार्यालय समय के समान ही हो तो अध्ययन स्वीकृति स्वतः ही समाप्त मानी जायेगी।
2. राजसेवक

का पदस्थापन अध्ययन स्वीकृति संस्थान के मुख्यालय से परिवर्तित/स्थानान्तरित हो जाता है तो अध्ययन स्वीकृति स्वतः ही समाप्त हो जायेगी।
3. प्रत्येक वर्ष के लिये अलग-अलग अनुमति लेनी आवश्यक होगी।
4. विभाग की पूर्वानुमति प्राप्त किये बिना अध्ययन चालू रखने एवं परीक्षा में सम्मिलित होने वाले कर्मचारियों के विरूद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही की जायेगी।
5. जिन कर्मचारियों को इस वर्ष उच्च शिक्षा प्राप्त करने हेतु अथवा अध्ययन जारी रखने एवं परीक्षा में सम्मिलित होने की अनुमति दी जावेगी उन्हें परीक्षा दिवसों के अतिरिक्त अन्य कोई अवकाश स्वीकृत नहीं किया जावेगा।
6. अध्ययन स्वीकृति दिये जाने से अधिकारी/कर्मचारी को किसी स्थान विशेष पर पदस्थापन निरन्तर रखने का अधिकार नहीं मिल पायेगा और उसका स्थानान्तरण किया जा सकता है।
7. अध्ययन से राजसेवक दैनिक राजकीय कार्य सम्पादन में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं करेगा, अन्यथा स्वीकृति समाप्त कर दी जायेगी।
8. अध्ययन वर्ष में अधिकारी/कर्मचारी की उपस्थिति का प्रतिशत कम होने के लिये सरकार/विभाग किसी प्रकार से जिम्मेदार नहीं होगी।
9. परीक्षा की तैयारी हेतु किसी प्रकार का अवकाश स्वीकृत नहीं किया जायेगा।
10. प्रशासनिक कारणोवश अध्ययन स्वीकृति बिना किसी पूर्व सूचना के समाप्त की जा सकती है।

नियुक्ति अधिकारी प्रकरण शिक्षा निदेशालय नहीं भिजवाकर अपने स्तर पर आचरण सेवा नियम-1971 के नियम-17 में उल्लखित बिन्दु संख्या-4 व राज्य सरकार के परिपत्र क्रमांकः प.9(5)(30)कार्मिक/क-3/ जाँच/2004 दिनांक 18.11.2006 में वर्णित निम्नांकित शर्तों के अंतर्गत अनुज्ञा जारी करते है।

आचरण सेवा नियम-1971 के नियम-17

राज्य सरकार के परिपत्र क्रमांकः प.9(5)(30)कार्मिक/क-3/ जाँच/2004 दिनांक 18.11.2006

Format to take Permission to appear in public examination | सार्वजनिक परीक्षा की अनुमति हेतु आवेदन पत्र का प्रारूप

किसी भी राज्य कार्मिक को किसी भी सार्वजनिक परीक्षा में भाग लेने से पूर्व सक्षम अनुमति प्राप्त करनी चाहिए। इस हेतु निम्नानुसार दिए गए प्रारूप में समस्त सुचना अंकित करके अपने संस्था प्रधान से अग्रेषित करवा लेना चाहिए।

नोट-

एक राजस्थान सरकार के कार्मिक व राजस्थान स्कूल शिक्षा विभाग के कार्मिक द्वारा राजकीय सेवा के दौरान उच्च अध्ययन अथवा सार्वजनिक परीक्षा के सम्बंध में शिक्षा विभागीय नियमावली 1997 व अन्य सान्दर्भिक परिपत्रों को अध्ययन करने के पश्चात उचित प्रारूप में अपने नियंत्रण अधिकारी को सूचित करना व आवश्यकता के अनुसार स्वीकृति प्राप्त करना आवश्यक होता है।