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| On 3 years ago

Saluting the Heroes of nation state - जिला कलक्टर टी अंबाज़गेन के द्वारा निभाया गया कर्तव्य अब बन रहा है मिसाल।

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Saluting the Heroes of nation state - जिला कलक्टर टी अंबाज़गेन के द्वारा निभाया गया कर्तव्य अब बन रहा है मिसाल।

त्रिची, तामिलनाडु जिस गरीबी के माहौल को देखकर लोग नाकभौं सिकोड़कर निकल जाते है एवम जिन गलियों से गुजरते वक्त लोग रुमाल से अपने नथुनों को ढक लेते है। उसी गरीबी की समस्या से झुंझती एक बुढ़िया अम्मा के घर स्वयम जिला कलक्टर ना केवल उसका हाल-चाल जानने पहुचे बल्कि साथ भोजन लेकर अपने मातहतों को ऐसी समस्त माताओ हेतु पेंशन आरम्भ करने के आदेश जारी किए।

यह सच्चा वाकया तामिलनाडु के त्रिची में हुआ। यह घटनाक्रम 8 अप्रैल 18 का है। कलेक्टर टी अंबाज़गेन चिन्नमालनिकिकेन पट्टी में स्थित इस बुढ़िया के घर पहुंचे तो वह उसके लिए अपने घर में पका खाना लेकर आए थे। कलेक्टर ने केले के दो पत्तों में खाना परोसा। महिला के साथ ही जमीन पर बैठे और एक में खुद खाया दूसरे में महिला को खिलाया। कलेक्टर टी अंबाज़गेन ने अपने मातहतों को निर्देश दिया कि इस महिला को हर महीने एक हजार रुपये का वृद्धा पेंशन दिया जाए।

कलेक्टर ने चलने-फिरने में लाचार इस महिला के विशेष सुविधा मुहैया कराई है। कलेक्टर ऑफिस के मुताबिक महिला को हर महीने उसके घर पर ही पेंशन की रकम मुहैया कराई जाएगी। कलेक्टर के इस पहल की चारों ओर तारीफ हो रही है।

बढ़ती उम्र की वजह से यह वृद्ध महिला कोई भी काम नहीं कर पाती थी , पहले घर में बर्तन धो कर कुछ पैसे कमा लेती थी लेकिन अब कहीं काम ना कर पाने के वजह से इसका गुजारा मुश्किल हो चूका था। छोटे से कच्चे घर में सिर्फ प्लास्टिक के 2 बर्तन थे , हर दिन एक वक़्त का खाना पड़ोस के लोग खिला देते थे और कभी कभी वृद्ध महिला को भूखे पेट सोना पड़ता।

आज के संवेदनहीन समाज मे जब एक परिवार के लोग ही अपने परिवार सदस्यों की उनके मुश्किल समय मे मदद नही करते है , ऐसे में जिला कलक्टर टी अंबाजगेन द्वारा दर्शित सामाजिक सरोकार ना केवल उनके व्यक्तित्व के मानवीय पक्ष को उजागर करता है बल्कि साथ मे हम सभी को भी प्रेरणा प्रदान करता है कि हम भी सामुहिक प्रयास करे व राष्ट्र में एक संवेदी समाज की स्थापना में सहायता करें।

जिला कलक्टर के इन प्रयासों की सर्वत्र तारीफ हो रही है एवम प्रशासनिक अमला भी जिला कलक्टर के प्रयासों से प्रेरित हो रहा है। सच ही कहा गया है कि समाज निर्माण छोटे छोटे लेकिन अनवरत प्रयासों से ही सम्भव है।