Categories: News
| On 1 month ago

Saluting the Heroes of nation state - ( देश के वीरो को नमन )

Saluting the Heroes of nation state -भारत को 15 अगस्त, 1947 को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता मिली। हमें उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों जैसे महात्मा गांधी, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और लाखों अन्य लोगों के बलिदानों को नहीं भूलना चाहिए, जिनके नाम भी ज्ञात नहीं हैं, लेकिन उन्होंने भारत को अंग्रेजों के औपनिवेशिक शासन से मुक्त करने के लिए बहुत  संघर्ष किया।  हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के लिए जीवन, परिवार, संबंध और भावनाओं से भी ज्यादा महत्वपूर्ण था हमारे देश की आजादी और इसके लिए उन्होंने अपनी जान की भी परवाह भी नहीं की. आइये ऐसे ही कुछ महानायकों के बारे में अध्ययन करते हैं जिन्होंने देश को आजादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है | 

Brave Heroes of Nation ( आजादी आंदोलन के महानायक )

1 ) मंगल पांडेय ( Mangal Pandey)

मंगल पांडे का जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया  के एक गांव नगवा में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था.  पिता का नाम 'दिवाकर पांडे' तथा माता का नाम 'अभय रानी' था. वे सन 1849 में 22 साल की उम्र में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में शामिल हुए थे. वे बैरकपुर की सैनिक छावनी में “34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री” की पैदल सेना में एक सिपाही थे. यहीं पर गाय और सूअर की चर्बी वाले राइफल में नई कारतूसों का इस्तेमाल शुरू हुआ. जिससे सैनिकों में आक्रोश बढ़ गया और परिणाम स्वरुप 9 फरवरी 1857 

को 'नया कारतूस' को मंगल पाण्डेय ने इस्तेमाल करने से इनकार कर दिया. 29 मार्च सन् 1857 को अंग्रेज अफसर मेजर ह्यूसन भगत सिंह से उनकी राइफल छीनने लगे और तभी उन्होंने ह्यूसन को मौत के घाट उतार दिया साथ ही अंग्रेज अधिकारी लेफ्टिनेन्ट बॉब को भी मार डाला. इस कारण उनको 8 अप्रैल, 1857 को फांसी पर लटका दिया गया. मंगल पांडे की मौत के कुछ समय पश्चात प्रथम स्वतंत्रता संग्राम शुरू हो गया था जिसे 1857 का विद्रोह कहा जाता है.

2. भगत सिंह ( Bhagat Singh )

शहीद भगत सिंह पंजाब के रहने वाले थे. पिता का नाम 'किशन सिंह' और माता का नाम 'विद्यावती' था. क्या आप जानते हैं कि वे भारत के सबसे छोटे स्वतंत्रता सेनानी थे. वह सिर्फ 23 वर्ष के थे जब उन्होंने अपने देश के लिए फासी को गले लगाया था. भगत सिंह पर अराजकतावादी और मार्क्सवादी विचारधाराओं का काफी प्रभाव पड़ा था. लाला लाजपत राय की मौत ने उनको अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने के लिए उत्तेजित किया था. उन्होंने इसका बदला ब्रिटिश अधिकारी जॉन सॉंडर्स की हत्या करके लिया. भगत सिंह ने बटुकेश्वर दत्त के साथ केंद्रीय विधान सभा या असेंबली में बम फेंकते हुए क्रांतिकारी नारे लगाए थे. उनपर 'लाहौर षड़यंत्र' का मुकदमा चला और 23 मार्च, 1931 की रात भगत सिंह को फाँसी पर लटका दिया गया.

3) महात्मा गाँधी ( Mahatma Gandhi )

मोहनदास करमचन्द गांधी (जन्म: 2 अक्टूबर 1869 - निधन: 30 जनवरी 1948) जिन्हें महात्मा गांधी के नाम से भी जाना जाता है, भारत एवं भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन के एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे। वे सत्याग्रह (व्यापक सविनय अवज्ञा) के माध्यम से अत्याचार के प्रतिकार के अग्रणी नेता थे, उनकी इस अवधारणा की नींव सम्पूर्ण अहिंसा के सिद्धान्त पर रखी गयी थी जिसने भारत को भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम दिलाकर पूरी दुनिया में जनता के नागरिक अधिकारों एवं स्वतन्त्रता के प्रति आन्दोलन के लिये प्रेरित किया। उन्हें दुनिया में आम जनता महात्मा गांधी के नाम से जानती है। संस्कृत भाषा में महात्मा अथवा महान आत्मा एक सम्मान सूचक शब्द है। गांधी को महात्मा के नाम से सबसे पहले 1915 में राजवैद्य जीवराम कालिदास ने संबोधित किया था। एक अन्य मत के अनुसार स्वामी श्रद्धानन्द ने 1915 मे महात्मा की उपाधि दी थी, तीसरा मत ये है कि गुरु रविंद्रनाथ टैगोर ने महात्मा की उपाधि प्रदान की थी। 12 अप्रैल 1919 को अपने एक लेख मे | [। उन्हें बापू (गुजराती भाषा में બાપુ बापू यानी पिता) के नाम से भी स्मरण किया जाता है। एक मत के अनुसार गांधीजी को बापू सम्बोधित करने वाले प्रथम व्यक्ति उनके साबरमती आश्रम के शिष्य थे सुभाष चन्द्र बोस ने 6 जुलाई 1944 को रंगून रेडियो से गांधी जी के नाम जारी प्रसारण में उन्हें राष्ट्रपिता कहकर सम्बोधित करते हुए आज़ाद हिन्द फौज के सैनिकों के लिये उनका आशीर्वाद और शुभकामनाएँ माँगीं थीं। प्रति वर्ष 2 अक्टूबर को उनका जन्म दिन भारत में गांधी जयन्ती के रूप में और पूरे विश्व में अन्तरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है।

4. पंडित जवाहरलाल नेहरू (Pandit Jawaharlal Nehru)

जवाहरलाल नेहरू (नवम्बर 14, 1889 - मई 27, 1964) भारत के प्रथम प्रधानमन्त्री थे और स्वतन्त्रता के पूर्व और पश्चात् की भारतीय राजनीति में

केन्द्रीय व्यक्तित्व थे। महात्मा गांधी के संरक्षण में, वे भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन के सर्वोच्च नेता के रूप में उभरे और उन्होंने 1947 में भारत के एक स्वतन्त्र राष्ट्र के रूप में स्थापना से लेकर 1964 तक अपने निधन तक, भारत का शासन किया। वे आधुनिक भारतीय राष्ट्र-राज्य – एक सम्प्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, और लोकतान्त्रिक गणतन्त्र - के वास्तुकार माने जाते हैं। कश्मीरी पण्डित समुदाय के साथ उनके मूल की वजह से वे पण्डित नेहरू भी बुलाए जाते थे, जबकि भारतीय बच्चे उन्हें चाचा नेहरू के रूप में जानते हैं।

स्वतन्त्र भारत के प्रथम प्रधानमन्त्री का पद संभालने के लिए कांग्रेस द्वारा नेहरू निर्वाचित हुए, यद्यपि नेतृत्व का प्रश्न बहुत पहले 1941 में ही सुलझ चुका था, जब गांधीजी ने नेहरू को उनके राजनीतिक वारिस

और उत्तराधिकारी के रूप में अभिस्वीकार किया। प्रधानमन्त्री के रूप में, वे भारत के सपने को साकार करने के लिए चल पड़े। भारत का संविधान 1950 में अधिनियमित हुआ, जिसके बाद उन्होंने आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक सुधारों के एक महत्त्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की। मुख्यतः, एक बहुवचनी, बहु-दलीय लोकतन्त्र को पोषित करते हुए, उन्होंने भारत के एक उपनिवेश से गणराज्य में परिवर्तन होने का पर्यवेक्षण किया। विदेश नीति में, भारत को दक्षिण एशिया में एक क्षेत्रीय नायक के रूप में प्रदर्शित करते हुए, उन्होंने गुट-निरपेक्ष आन्दोलन में एक अग्रणी भूमिका निभाई।

5. चंद्रशेखर आजाद (CHANDRASHEKHAR AZAD)

दुनिया उन्‍हें 'आजाद' के नाम से जानती है। पूरा नाम चंद्रशेखर तिवारी। मध्य प्रदेश में जन्‍मे चंद्रशेखर को उनकी मां संस्‍कृत का बड़ा विद्वान बनाना चाहती थीं। इसलिए अपने पति को मनाया कि लड़के को पढ़ने काशी विद्यापीठ भेजें। बनारस पहुंचे चंद्रशेखर की दिलचस्‍पी संस्‍कृत में कम, असहयोग आंदोलन में ज्‍यादा थी। अंग्रेजों को आंदोलनकारी कभी रास नहीं आए इसलिए तब महज 15 साल के रहे चंद्रशेखर गिरफ्तार कर लिए गए। जब मजिस्‍ट्रेट के सामने पेश किया गया तो वहां उन्‍होंने अपना नाम 'आजाद' बताया, पिता का नाम 'स्‍वतंत्रता' और पता 'जेल'। उस दिन के बाद से दुनिया ने उस लड़के को चंद्रशेखर आजाद के नाम से जाना।फरवरी 1922 में चौरी चौरा में पुलिस ने प्रदर्शनकारी किसानों पर गोलियां बरसाई थीं। जवाब में थाने पर हमला करके 22 पुलिसवालों को जिंदा जला दिया गया था। महात्‍मा गांधी ने कांग्रेस के किसी सदस्‍य से बातचीत किए बिना खुद ही आंदोलन समाप्‍त करने की घोषणा कर दी। उसी साल गया कांग्रेस में राम प्रसाद बिस्‍म‍िल ने गांधी के इस कदम का खुलकर विरोध किया था। बिस्मिल इस कदर खफा थे कि कांग्रेस से अलग होकर उन्‍होंने हिंदुस्‍तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) नाम से एक क्रांतिकारी संगठन/पार्टी बना ली। उधर, आंदोलन खत्‍म होने के बाद चंद्रशेखर आजाद का रुख और आक्रामक हो गया। उन्‍हीं की उम्र के मन्मथनाथ गुप्त ने आजाद की मुलाकात बिस्मिल से कराई। भारत को आजादी दिलाने के बिस्‍म‍िल और आजाद के रास्‍ते एक थे, दोनों मिल गए।