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Sanstha Pradhan Margdarshika : Guide Book for Headmasters and Principals.

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6 3. उत्तीर्णता नियम :-

संस्था-प्रधान मार्गदर्शिका। (मा.वि./ उ.मा.वि. स्तर)

खण्ड-प्रथम पार्ट-2)

शैक्षिक

विद्यालय प्रबंधन

2. मूल्यांकन

2.1 मूल्यांकन प्रक्रिया

शिक्षा में मूल्यांकन से तात्पर्य उस प्रक्रिया से है जो विद्यार्थी की सम्प्राप्ति स्तर के बारे में वैद्य एवं विश्वसनीय सूचना एकत्रित कर सके और उसको अर्थपूर्ण तरीके से प्रतिवेदित कर सके। शैक्षिक मूल्यांकन एक ओर उद्देश्य से तथा दूसरी ओर शिक्षण अधिगम प्रक्रियाओं से संबंधित है ।

शैक्षिक उद्देश्य

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शिक्षण अधिगम मूल्यांकन प्रक्रिया

इस प्रकार शैक्षिक मूल्यांकन प्रक्रिया से जहाँ एक ओर छात्र उपलब्धि में सुधार आता है। वहीं दूसरी ओर शैक्षिक उद्देश्य, पाठ्यक्रम एवं शिक्षा अधिगम प्रक्रिया आदि में लाया जा सकता है। अतः शैक्षिक मूल्यांकन का शैक्षिक प्रगति से घनिष्ठ संबंध है। इसी क्रम मे परीक्षा एवं क्रमोन्नति नियम बनाये गए है, जो निम्न हैं-

2.2 परीक्षा एवं क्रमोन्नति नियम (शैक्षिक सत्र 2011-12 से लागू)

(1) एज्युकेशन कोड (शिक्षा विभाग) के अध्याय 8 में प्रकाशित नियमों एवं समय-समय पर जारी
संशोधनों/परिवर्तनों के अतिक्रमण में शैक्षिक सत्र 2011-12 से निम्न नियम प्रसारित किए जाते हैं।

(2) ये नियम परीक्षा एवं क्रमोन्नति नियम कहलाएँगें तथा राजस्थान के माध्यमिक शिक्षा विभाग के अन्तर्गत सभी राजकीय एवं गैर राजकीय मान्यता प्राप्त विद्यालयों की कक्षा 9 से 12 में अध्ययनरत समस्त विद्यार्थियों की गृह परीक्षा पर लागू होंगे।

(3) सामान्य नियम-

2. (क) परीक्षा प्रवेश योग्यता :-

1. कक्षा 9 एवं 11 की वार्षिक परीक्षाओं में केवल वे ही विद्यार्थी प्रविष्ठ हो सकेंगे जिन्होंने किसी भी राजकीय / मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्था में नियमित विद्यार्थी के रूप में सत्र-पर्यन्त अध्ययन किया हो।
2. कक्षा 9 एवं 11 की वार्षिक परीक्षाओं में उसी विद्यार्थी को सम्मिलित किया जाएगा, जिसने कम से कम दो लिखित सामयिक परख दी हो या एक लिखित परख और अर्द्धवार्षिक परीक्षा दी हो और जिस परीक्षा/परख में वह सम्मिलित नहीं हुआ हो उसके कारणों की प्रामाणिकता से संस्था प्रधान को पूर्णतया सन्तुष्ट कर दिया हो।
3. बोर्ड परीक्षा में प्रविष्ट होने वाले परीक्षार्थियों पर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान, अजमेर के नियम लागू होंगे।

2. (ख) उपस्थिति गणना एवं अनिवार्यता:-

1. कक्षा 9 एवं 11 तक में नियमित छात्रों की उपस्थिति गणना विद्यालय सत्रारम्भ होने की तिथि से तथा नवीन प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की उपस्थिति गणना प्रवेश लेने की तिथि (शिविरा पंचांग में अंकित अंतिम तिथि तक) से वार्षिक परीक्षा तैयारी अवकाश से पूर्व दिवस तक मानी जाएगी। कक्षा 10 व 12 में
अध्ययनरत विद्यार्थी की उपस्थिति गणना माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान के नियमानुसार होगी।
2. कक्षा 9 व 11 की पूरक परीक्षा में उत्तीर्ण विद्यार्थियों की उपस्थिति गणना पूरक परीक्षा परिणाम घोषित होने के सात दिन के बाद से की जाएगी।
3. यदि विद्यार्थी शिक्षण सत्र के मध्य में मान्यता प्राप्त संस्था से स्थानान्तरित होकर किसी अन्य विद्यालय से प्रवेश ले तो उनकी उपस्थिति की गणना करते समय पूर्व विद्यालय की उपस्थिति मंगवाकर जोड ली जाए।
4. स्थानान्तरित अथवा प्रव्रजित विद्यार्थियों को प्रवेश देने से पूर्व ही उपस्थिति के नियम से अवगत करा दिया जाए और यदि उसकी उपस्थिति न्यून रहने की संभावना हो तो उन्हें प्रवेश ही न दें।
5. माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित मूल परीक्षा/पूरक परीक्षा का परिणाम विलम्ब से घोषित होने के 10 दिन के अन्दर नियमानुसार प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की उपस्थिति गणना प्रवेश लेने की तिथि से होगी।
6. राजस्थान स्टेट ऑपन स्कूल, जयपुर अथवा राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान, भारत सरकार से कक्षा 10 से उत्तीर्ण कर कक्षा 11 में नियमित प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी को अर्द्धवार्षिक परीक्षा से पूर्व प्रवेश लेना अनिवार्य होगा। इसकी उपस्थिति की गणना प्रवेश लेने की तिथि से होगी।
7. वार्षिक परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए विद्यार्थियों को विद्यालय के कुल कार्य दिवसों अथवा छात्र के प्रवेश उपरान्त कुल कक्षा मिटिंग में से निम्नानुसार उपस्थिति अनिवार्य है।

कक्षा 9 एवं 11 में 75 प्रतिशत उपस्थिति यदि संस्थाप्रधान संतुष्ट हो कि विद्यार्थी रूग्णावस्था के कारण अनुपस्थिति रहा है तो विद्यालय के कुल दिवसों की प्रतिशत न्यूनतम के आधार पर विद्यार्थी को निम्न प्रकार से मुक्त करके वार्षिक परीक्षा में बैठने की अनुमति दे सकते हैं:-
1. कक्षा 9 एवं 11 में 30 मिटिंग (15 दिन की उपस्थिति का लाभ)
2. रूग्णावस्था के मामलों में कक्षा 9 व 11 के विद्यार्थियों के संदर्भ में न्यूनतम 60 प्रतिशत उपस्थिति होने पर ही सक्षम चिकित्सा अधिकारी द्वारा प्रदत्त चिकित्सा प्रमाण प्रस्तुत किये जाने पर विद्यार्थी परीक्षा में बैठने का पात्र होगा।

2. (ग) परीक्षा तैयारी अवकाशः-

1. शिविरा पंचाग के निर्देशानुसार कक्षा 9 से 12 के विद्यार्थियों को अर्द्धवार्षिक परीक्षा हेतु एक दिन का तथा 9 तथा 11 के लिए वार्षिक परीक्षा हेतु दो दिन का परीक्षा तैयारी अवकाश दिया जाएगा, परन्तु उक्त दिवसों में विद्यालय खुला रहेगा अध्यापक एवं अन्य कर्मचारी अभिलेख तथा परीक्षा से संबंधित कार्य पूरा करेंगे। यह अवकाश रविवार एवं राजपत्रित अवकाशों के अतिरिक्त होगा।
2. कक्षा 10 एवं 12 में अध्ययनरत विद्यार्थियों को माध्यमिक/उच्च माध्यमिक परीक्षा की पूर्व तैयारी हेतु बोर्ड परीक्षा आरम्भ होने की तिथि से पूर्व माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान अजमेर द्वारा निर्देशित अथवा 14 दिवसों का तैयारी अवकाश दिया जाएगा जिसमें प्रथम 7 दिवसों मे विद्यार्थियों हेतु विशेष कक्षाओं का आयोजन इस ढंग से किया जाए ताकि परीक्षा में अधिकतम शैक्षिक उपलब्धि हो सकें।

(घ) प्रश्न पत्र व्यवस्थाः-

1. सामयिक परखों में प्रश्न पत्र लिखाकर अथवा श्यामपट्ट पर अंकित किए जाएँगे तथा प्रश्न पत्र की प्रति सुरक्षित रखी जाए।
2. किसी परीक्षा के परीक्षार्थियों की संख्या 10 से कम होने पर प्रश्न पत्र कार्बन पेपर से सुपाठ्य हस्त लिखित अथवा टंकित करवाये जाए। 10 से अधिक विधार्थी होने पर प्रश्न पत्र कम्प्यूटर से टंकित करवाकर छाया प्रति दी जा सकेगी।
3. कक्षा 9 व 10 की वार्षिक परीक्षा/अर्द्धवार्षिक परीक्षा/पूरक परीक्षा/पुनः परीक्षा एवं कक्षा 10 एवं 12 की अर्द्धवार्षिक परीक्षा हेतु जिला समान परीक्षा योजना के अन्तर्गत मुद्रित प्रश्न पत्रों को ही उपर्युक्त परीक्षाओं के लिए प्रयोग में लिए जाएँ। गत वर्षों के बचे हुए प्रश्न पत्रों का उपयोग कतई नहीं किया जाए।
4. समस्त प्रकार की मान्यता प्राप्त गैर राजकीय शिक्षण संस्थाओं को भी जिला समान परीक्षा योजना के तहत प्रश्न पत्र लेने अनिवार्य हैं।

2. (ई) सामयिक परख एवं परीक्षाएँ :-

1. संबंधित सत्र में विभागीय पंचांग में प्रदत्त निर्देशानुसार प्रत्येक कक्षा के प्रत्येक विषय की तीन सामयिक परख होगी।
2. सत्र में विभागीय पंचांग में प्रदत्त निर्देशानुसार दो परीक्षाएँ होंगी।
अ-अर्द्धवार्षिक परीक्षा (कक्षा 9 से 12)
ब-वार्षिक परीक्षा (कक्षा 9 से 12)
नोट- कक्षा 9 से 12 की अर्द्धवार्षिक परीक्षा एवं कक्षा 9 व 11 की वार्षिक परीक्षा शिविरा पंचांग में प्रदत्त निर्देशों के अनुसार आयोजित की जाए।

(च) परीक्षा परिणामों की घोषणा :-

संस्था प्रधान द्वारा प्रत्येक सामयिक परख व अर्द्धवार्षिक परीक्षा के प्रगति पत्र अभिभावकों को विद्यालय में आमन्त्रित कर अवलोकन करवाया जाए। शिविरा पंचांग के अनुसार निर्दिष्ट दिनांक को वार्षिक परीक्षा परिणाम घोषित कर सूचना पट्ट पर प्रसारित करने के पश्चात् अन्तिम रूप से प्रगति पत्र अभिभावकों को भेजे जाए।

2. (छ) पूर्णाक :-

1. कक्षा 9 से 12 हेतु विभिन्न परखों एवं परीक्षाओं के पूर्णाक विभाग द्वारा जारी मूल्यांकन योजना के अनुसार होंगे।
2. बोर्ड कक्षाओं हेतु पूर्णांक माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के निर्देशों एवं नियमानुसार निर्धारित होंगे।

3. उत्तीर्णता नियम :-

1. विद्यार्थियों को उनकी तीन सामयिक परखों, अर्द्धवार्षिक एवं वार्षिक परीक्षाओं के प्राप्तांकों के योग को मिलाकर नियमानुसार उत्तीर्ण किया जाएगा। कक्षा 9 व 11 में वही विद्यार्थी कक्षोन्नति / उत्तीर्ण का अधिकारी माना जाएगा जिसने प्रत्येक विषय में पूर्णाक के न्यूनतम 36 प्रतिशत अंक प्राप्त किये हो। परन्तु वार्षिक परीक्षा में विद्यार्थी को प्रत्येक विषय में न्यूनतम 20 प्रतिशत अंक प्राप्त करने अनिवार्य हैं।

2. जिन विषयों में सैद्धान्तिक व प्रायोगिक परीक्षाएँ होती हैं उनमें अलग-अलग उत्तीर्ण होना आवश्यक है। प्रायोगिक परीक्षा में कोई कृपांक देय नही हैं।
3. तीनों परखों का योग अर्द्धवार्षिक तथा वार्षिक परीक्षा के प्राप्तांकों का योग यदि भिन्न में हो तो उन्हें अगले पूर्णाक में परिवर्तित कर दिया जाए।
4. यदि कोई विद्यार्थी सत्र के बीच में किसी ऐसे विद्यालय से आकर प्रवेश लेता है जहा सामयिक परख नहीं होती हैं तो ऐसे विद्यार्थी के लिए विद्यालय स्तर पर एक लिखित सामयिक परख आयोजित कर एक परख, अर्द्धवार्षिक एवं वार्षिक परीक्षा के आधार पर परिणाम घोषित किया जाएगा।
5. राज्य सरकार द्वारा नव क्रमोन्नत विद्यालयों एवं माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान द्वारा आयोजित माध्यमिक परीक्षा की मूल परीक्षा/पूरक परीक्षा का परिणाम विलम्ब से घोषित होने के कारण विद्यार्थी का नियमानुसार प्रवेश लेने से पूर्व जो परख व परीक्षा हो चुकी हो तो ऐसे विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम शेष रही परीक्षाओं के पूर्णाकों के योग के आधार पर घोषित किया जाएगा।
6. राजस्थान स्टेट ऑपन स्कूल, जयपुर अथवा राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान, भारत सरकार से कक्षा 10 उत्तीर्ण कर विलम्ब से प्रवेश लेने वाले (अर्द्धवार्षिक परीक्षा से पूर्व) का परीक्षा परिणाम अर्द्धवार्षिक परीक्षा, तृतीय परख एवं वार्षिक परीक्षा के पूर्णांक के आधार पर घोषित होगा ।

रूग्णता प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना:-

1. यदि कोई विद्यार्थी (कक्षा 9 व 11) अपनी रूग्णावस्था के कारण किसी सामयिक परख अथवा अर्द्धवार्षिक परीक्षा में सम्मिलित होने की स्थिति में नही रहा है तो इसे उक्त परीक्षा प्रारंभ होने की तिथि से एक सप्ताह की समयावधि में रुग्णता प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होगा।
2 अन्तिम परीक्षा परिणाम उन्हीं विद्यार्थियों का घोषित होगा जिन्होंने कम से कम दो सामयिक परख तथा वार्षिक परीक्षा अथवा एक सामयिक परख, अर्द्धवार्षिक तथा वार्षिक परीक्षा दी हो ।

कृपांक:-

1. कृपांक के लिए विद्यार्थी का आचरण एवं व्यवहार उस सत्र में उत्तम होना आवश्यक है। अधिकतम दो विषयों मे कृपांक दिए जा सकते हैं।
2. कक्षा 9 एवं 11 में यदि विद्यार्थी एक विषय में असफल हैं तो उस विषय के पूर्णांक के अधिकतम 5 प्रतिशत कृपांक दिए जा सकते है और यदि विद्यार्थी दो विषयों में असफल है तो प्रत्येक संबंधित विषय में उसके पूर्णांक के अधिकतम 2 प्रतिशत कृपांक दिए जा सकते हैं।
3. रूग्णावस्था की छूट का लाभ प्राप्त करने वाले विषय में कृपांक देय नही होंगे व उस विषय में उत्तीर्ण होने पर ही विद्यार्थी अन्य विषयों के कृपांक प्राप्त करने का अधिकारी होगा।

श्रेणी निर्धारण नियमः-

1. 60 प्रतिशत या अधिक प्राप्तांक पर प्रथम श्रेणी।
2. 48 प्रतिशत या उससे अधिक परन्तु 60 प्रतिशत से कम प्राप्तांक होने पर द्वितीय श्रेणी।
3. 36 प्रतिशत व उससे अधिक परन्तु 48 प्रतिशत से कम प्राप्तांक होने पर तृतीय श्रेणी।
4. 75 प्रतिशत या उससे अधिक अक प्राप्त करने पर उस विषय में विशेष योग्यता मानी जाएगी।
5. अगर कोई विद्यार्थी चिकित्सा अवकाश (सक्षम चिकित्साधिकारी द्वारा जारी चिकित्सा प्रमाण-पत्र के आधार पर) पर रहने के फलस्वरूप किसी सामयिक परख या अर्द्धवार्षिक परीक्षा में सम्मिलित नहीं हुआ तो उसका श्रेणी/स्थान निर्धारण करने के लिए, विद्यार्थी जिन परीक्षाओं में सम्मिलित होता है उनके पूर्णाक के आधार पर प्राप्तांकों के प्रतिशत के अनुसार कक्षा श्रेणी/स्थान का निर्धारण किया जाएगा।
6. श्रेणी निर्धारण कृपांक रहित प्राप्तांकों के वृहद योग के आधार पर ही होगी अर्थात् श्रेणी निर्धारण करते समय कृपांक नही जोड़े जाएँगे।
7. पूरक परीक्षा उत्तीर्ण परीक्षार्थी को दी जाने वाली अंकतालिका में मुख्य परीक्षा मे अर्जित किये गये अंकों के साथ, पूरक परीक्षा विषय में न्यूनतम उत्तीर्णाक अंकित कर श्रेणी देते हुए नई अंक तालिका जारी कर दी जाए।

(7). पूरक परीक्षा नियम:-

(अ) पात्रता-

1. पूरक परीक्षा अधिकतम किन्ही दो विषयों में दी जा सकेगी।
2. संबंधित विषय में कक्षा (9 व 11) में प्रथम परख से वार्षिक परीक्षा तक के पूर्णाकों का 25
प्रतिशत प्राप्त करना आवश्यक हैं।

(ब) परीक्षा आयोजन -

शिविरा पंचांग के अनुसार निर्धारित तिथियों में ही आयोज्य होगी। वार्षिक परीक्षा के पूर्णाक के समान ही पूरक परीक्षा के पूर्णाक माने जाएँगें।

(स) पूर्णाक -

प्रत्येक विषय का परिणाम वार्षिक परीक्षा के पूर्णाक के अनुरूप होगा तथा सम्पूर्ण पाठयक्रम का समावेश किया जाएगा।

(द) परीक्षा उत्तीर्णता -

वही परीक्षार्थी उत्तीर्ण घोषित समझा जाएगा जिसने पूरक परीक्षा के प्रत्येक विषय/विषयों में 36 प्रतिशत अंक अलग-अलग प्राप्त किये हो। पूरक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए कृपांक नहीं दिये जाएँगे।

(य) परीक्षा परिणाम -

शिविरा पंचांग में निर्दिष्ट दिनांक पर पूरक परीक्षा परिणाम घोषित किया जाए।

(र) परीक्षा शुल्क (प्रति विषय)-

कक्षा 9 व 11 के लिए 20 रुपये ।

(8) पुनः परीक्षा (नियमित विद्यार्थियों हेतु):-

1. पात्रता

- वार्षिक परीक्षा में सम्मिलित होने के योग्य विद्यार्थी यदि वार्षिक परीक्षा में रुग्णता प्रमाण-पत्र देता है, तो वह उन सभी विषयों में पुनः परीक्षा में बैठ सकेगा, जिनके रुग्णता प्रमाण-पत्र दिया गया हैं।

2 परीक्षा आयोजन-

पुनः परीक्षा उन्हीं तिथियों मे होगी जिन तिथियों में पूरक परीक्षा आयोज्य होगी।

3. पुनः परीक्षा शुल्क (प्रति परीक्षा) :

कक्षा 9 एवं 11 के लिए 20 रुपये।

4. परीक्षा परिणाम :

सामयिक परख अर्द्धवार्षिक परीक्षा एवं वार्षिक परीक्षा/पुनः परीक्षा में प्राप्त अंको को जोड़कर परीक्षाफल घोषित किया जाएगा। (जिन विषयों में विद्यार्थी ने पुनःपरीक्षा दी है।)
5. उन विषयों में वह कृपांक का अधिकारी नहीं होगा। शेष विषयों में नियम 5 के अनुसार कृपांक का अधिकारी होगा।

(9) उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षाः--

1. प्रत्येक सामयिक परख एवं अर्द्धवार्षिक परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएँ विद्यार्थियों को दिखाई जाए।
2. सभी परीक्षार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं को विद्यालय में आगामी सत्र की समाप्ति तक सुरक्षित रखी जाए।
3. परिवीक्षण अधिकारियों द्वारा विद्यालय के परिवीक्षण के अवसर पर उक्त रिकॉर्ड का निरीक्षण किया जाए।

(10) अन्य नियम:-

1. कोई विद्यार्थी यदि अपनी अर्द्धवार्षिक परीक्षा में रुग्णता के कारण सम्मिलित न हो तो उसे अपना रूग्णता प्रमाण-पत्र परीक्षा/ प्रश्न पत्र प्रारंभ होने के सात दिवस की अवधि में प्रस्तुत करना होगा।
2. परीक्षाफल घोषित होते ही परीक्षाफल की प्रति घोषित करने के दिन अथवा अगले दिन नियन्त्रण अधिकारी के पास प्रेषित की जाए।
3. विद्यालय द्वारा परीक्षाफल घोषित करने के पश्चात उसी दिन अथवा अधिकतम दो दिन की अवधि में परीक्षार्थियों को उनके प्रगति पत्र दे दिए जाए।
4. परीक्षाफल के पुनरावलोकन के लिए प्रार्थना पत्र निर्धारित शुल्क रूपये 20 प्रति विषय के साथ परीक्षाफल घोषित होने के पश्चात सात दिन की अवधि में संस्था प्रधान के पास विद्यार्थी या द्वारा उसके अभिभावक द्वारा प्रस्तुत करना होगा।
5. पुनरावलोकन में केवल निम्नलिखित बातों की जांच सम्मिलित होंगी।
(अ) सभी प्रश्न जाँचे गये है या नहीं।
(ब) अंकों का योग सही है या नहीं।
(स) ऐसे पुनरावलोकन के सभी मामलों का निर्णय पूरक परीक्षा से पूर्व हो जाना चाहिए।
6. प्रगति पत्र की दूसरी प्रति 20 रुपये शुल्क सहित प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने पर दी जा सकेगी। जिस पर द्वितीय प्रति अंकित करना जरूरी है तथा स्थाई अभिलेख में भी इन्द्राज किया जाए।
7. कोई भी छात्र अन्य छात्र की जाँची हुई सामयिक परख या अर्द्धवार्षिक परीक्षा की उत्तरपुस्तिका देखने के लिए संस्था प्रधान से लिखित में अनुमति प्राप्त कर प्रति विषय 10 रुपये की दर से शुल्क जमा करवाकर
संस्था प्रधान के समक्ष ऐसी उत्तर पुस्तिका देख सकेगा। यदि उक्त छात्र या उसके अभिभावक द्वारा उत्तरपुस्तिका को नुकसान पहुंचाया जाता है तो संस्था प्रधान उसके विरूद्व थाने में प्रथम सूचना दर्ज करवाकर प्रतिलिपि अपने नियन्त्रण अधिकारी को देगा।

(11) स्वयंपाठी विद्यार्थी हेतु नियम :

1. कक्षा 8 की वार्षिक परीक्षा में परीक्षार्थी ने यदि नियमानुसार स्वयंपाठी परीक्षार्थी के रूप में दी हो तो उत्तीर्ण होने पर अगली कक्षा मे नियमानुसार प्रवेश ले सकता है।
2. यदि कोई स्वयंपाठी परीक्षार्थी कक्षा 9 में नियमित रूप से प्रवेश लेना चाहता है तो माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान के नियमानुसार प्रवेश दिया जाए।

(12) परीक्षा में अनुचित साधनों के प्रयोग के बारे में नियम :-

(अ) निम्नलिखित प्रकार के व्यवहार अनुचित साधनों का प्रयोग माने जाएंगे -

1. परीक्षा कक्ष में किसी विद्यार्थी को सहायता देना अथवा उससे या अन्य किसी व्यक्ति से सहायता प्राप्त करना।

2. परीक्षा कक्ष में कागज, पुस्तक, कॉपी अन्य अवांछनीय सामग्री अपने पास/ मुंह/डैस्क/उत्तरपुस्तिका आदि में या परीक्षा भवन के आस-पास रखना।

2. उत्तरपुस्तिका चोरी से लाना या ले जाना व उत्तरपुस्तिका में अपशब्द एवं अश्लील भाषा का प्रयोग करना या करने का प्रयत्न करना या दुराचरण करना ।
(ब) अनुचित साधनों के प्रयोग की स्थिति में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया (यदि किसी परीक्षार्थी पर अवांछनीय सामग्री का प्रयोग कर लेने या करने का प्रयत्न करने का संदेह हो तो)
1. संबंधित वीक्षक या अधीक्षक परीक्षार्थी की तलाशी ले सकेंगे।
2. परीक्षार्थी को उत्तरपुस्तिका सन्देहास्पद सामग्री सहित उससे ले ली जाएगी और उसका स्पष्टीकरण लिखवाया जाकर प्राप्त सामग्री पर उसके हस्ताक्षर करवाकर शेष प्रश्नो के उत्तर देने को लिए नई उत्तरपुस्तिका दे दी जाएगी।
3. यदि परीक्षार्थी स्पष्टीकरण देने या सामग्री पर हस्ताक्षर करने से इन्कार करें या परीक्षा केन्द्र से भाग जाये तो वीक्षक आस-पास बैठे हुए परीक्षार्थियों से उस पर हस्ताक्षर करवा ले।
4. उस सामग्री पर परीक्षार्थी, वीक्षक एवं पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर) तथा संस्था प्रधान के हस्ताक्षर कर सीलबन्द कर विद्यालय स्तर गठित समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा यथा-
* विद्यार्थी द्वारा लिखी गई उत्तरपुस्तिकाएँ।
* वह सामग्री जिससे नकल करते हुए पकड़ा हो।
* विद्यार्थी शिक्षक परिवीक्षक के बयान।
* संस्थाप्रधान की टिप्पणी।
* संबंधित विषय के प्रश्न पत्र की एक प्रति।
* अन्य कोई सामग्री अथवा प्रमाण जो संस्थाप्रधान आवश्यक समझे।

(13) अनुचित साधनों के प्रयोग के बारे में दण्ड देने हेतु अपनाई जाने वाली प्रक्रिया-

इस प्रकार के समस्त अनुचित साधनों के प्रयोग के मामलों पर विचार के लिए विद्यालय स्तर पर निम्नांकित सदस्यों की समिति का गठन किया जाएगा।

* संबधित संस्थाप्रधान
* परीक्षा प्रभारी (संबंधित संस्था)
* संस्थाप्रधान द्वारा मनोनीत संस्था का वरिष्ठतम शिक्षक

1. उक्त समिति समस्त प्रकरणों पर निर्णय परीक्षा होने के तीन दिन के भीतर कर लेगी। तब तक संबंधित परीक्षार्थी का परीक्षा परिणाम रोका जाएगा।
2 समिति की सिफारिश पर अन्तिम निर्णय लेकर संबंधित संस्था प्रधान आदेश जारी करेंगे।
3. विद्यालय स्तर पर गठित समिति द्वारा निर्णय नहीं होने की स्थिति में संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) का निर्णय अन्तिम होगा।

(14) दण्ड:-

प्रकरण की गंभीरता के अनुरूप समिति निम्न में से किसी एक दण्ड को दे सकेगी:-
1. जिन विषय में यह पाया जाए कि नकल की सामग्री लाई तो गई थी परन्तु उसका उपयोग नहीं किया गया। ऐसे मामले में प्राप्त अंको मे से 10 प्रतिशत अंक कम कर दिये जाएँगे।
2. अनुचित साधनों का प्रयोग करते हुए पाये जाने पर प्रथम उत्तरपुस्तिका को निरस्त कर दूसरी उत्तरपुस्तिका के आधार पर जाँच की जाएगी।
3. दोषी परीक्षार्थी के उस प्रश्न पत्र की परीक्षा निरस्त कर दी जाएगी।
4. परीक्षार्थी की सम्पूर्ण परीक्षा निरस्त कर दी जाएगी।
5. जहाँ विस्तृत पैमाने पर नकल की गई थी, वहाँ पर जिस प्रश्न पत्र/प्रश्न पत्रों से संबंधित हो, वो परीक्षा निरस्त कर दी जाएगी।
6. जहाँ कहीं ऐसे दोष में किसी/किन्ही शिक्षक अथवा कर्मचारी के लिप्त होने पर उनके विरूद्ध
अनुशासनात्मक नियमों के अन्तर्गत तत्काल कार्यवाही सक्षम अधिकारियों को प्रस्तावित की जाए।

(15) अन्य नियम :-

1. किसी भी परीक्षार्थी को यह अधिकार नहीं होगा कि अपना प्रतिनिधित्व किसी वैधानिक परामर्शदाता, एडवोकेट या अन्य किसी व्यक्ति द्वारा केन्द्राधीक्षक अथवा उक्त समिति के समक्ष करा सके ।
2 यदि परीक्षा के समय का अथवा उससे संबंधित कोई मामला उपर्युक्त किसी प्रावधान के अन्तर्गत न आये तो भी संस्थाप्रधान यदि आवश्यक समझे तो उस मामले में इन नियमों में बताई गई पद्वति के अनुसार कार्यवाही करने का अधिकारी होगा।

(16) माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर द्वारा समय-समय पर प्रस्तावित सम्बद्ध आदेशों के अनुरूप इन नियमों में संशोधन मान्य होंगे ।

(17) परीक्षा संबंधित अन्य नियमों के अन्तर्गत नहीं आए विषयों पर विभागाध्यक्ष, माध्यमिक शिक्षा, राजस्थान, बीकानेर का निर्णय होगा ।

उपर्युक्त सभी कक्षोन्नति नियमों को ध्यान में रखकर कम्प्यूटर से परीक्षा परिणाम घोषणा करने का सॉफ्टवेयर बनाया गया हैं जो www.ctor.in पर उपलब्ध है। संस्थाप्रधान इसका उपयोग कर सकते हैं ।

(अ) मूल्यांकन योजना

फोटो 1

नोट-

* अर्द्धवार्षिक एवं वार्षिक परीक्षा में शिक्षार्थियों द्वारा मूल्यांकन/सहपाठी समूह द्वारा मूल्याकंन गतिविधियों के लिए सामयिक परख मे दिए गए बिन्दुओं के आधार पर किया जाना अपेक्षित है।
* शिक्षक के मार्गदर्शन में विद्यार्थी स्वयं/सहपाठी समूह द्वारा मौखिक/गतिविधि/प्रायोगिक/प्रोजेक्ट / समुदाय से अन्तः क्रिया/अधिगम
प्रक्रिया/ अर्द्धवार्षिक परीक्षा में मूल्यांकन पारदर्शिता के साथ प्रस्तावित प्रारूप के अनुसार किया जाएगा।
* लिखित परीक्षा शिक्षक द्वारा प्रश्न पत्रों के माध्यम से ली जानी है।
* तीनो विषयों यथा कार्य एवं शिक्षा, कला शिक्षा, स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा में मूल्यांकन व्यवस्था निम्न 5 ग्रेड के आधार पर की जानी प्रस्तावित है-

A-100-81, B-80-61, C-60-41, D-40-21, E-20-0

नोट-

1. अर्द्ध वार्षिक एवं वार्षिक परीक्षा में प्रत्येक प्रश्न-पत्र 3.15 घन्टे समयावधि का होगा। इसमें 15 मिनट का समय विद्यार्थियों को प्रश्न-पत्र पढने के लिए दिया गया है। यदि विद्यार्थी प्रश्न पत्र जल्दी पढ लेता है तो शेष समय का उपयोग प्रश्न पत्र हल करने में भी कर सकता है।
2. अर्द्ध वार्षिक परीक्षा में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर द्वारा निर्धारित सम्पूर्ण पाठ्यक्रम सम्मिलित किया जायेगा।
3. प्रायोगिक परीक्षा बोर्ड द्वारा निर्धारित समयावधि में ली जाएगी।
4. स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा विषय तथा फाउण्डेशन ऑफ इनफोरमेशन टेक्नोलोजी के प्राप्तांक श्रेणी निर्धारण नही जोड़े जाएंगे। इन विषयों के प्राप्ताकों को अंक तालिका में दर्शाया जाएगा (इन विषयों में उत्तीर्ण होना आवश्यक नहीं होगा) फाउण्डेशन ऑफ इनफोरमेशन टेक्नोलोजी हेतु राज्य सरकार/ माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान द्वारा जारी नवीनतम दिशा निर्देशों का अवलोकन करें एवं तदनुसार कार्यवाही करें।
5. राजस्थान अध्ययन विषय में उत्तीर्ण होना अनिवार्य है, लेकिन प्राप्तांक श्रेणी निर्धारण में नहीं जोडे जाएंगे।
6. केवल मान्यता प्राप्त/राजकीय मूकबधिर विद्यालयों अध्ययनरत छात्रों के लिए कक्षा 9 के पाठ्यक्रम को तीन सत्रों में 35:35:30 में विभाजित किया गया है। मूकबधिर छात्रों को अंग्रेजी व तृतीय भाषा की छूट रहेगी। यह छूट नियमित/स्वयंपाठी के लिए लागू रहेगी।
7. कला शिक्षा के पाठ्यक्रम को दो भागों में विभक्त किया गया है- 1.चित्रकला, 2 संगीत । विद्यार्थी दोनों में से एक का चयन कर सकता है, दोनों के पूर्णाक 100 होंगे।
8. ऐसे विद्यालय जहाँ कम्प्यूटर लैब की सुविधा नहीं है, वहाँ संस्थाप्रधान पाठ्यक्रम एवं विद्यालय की स्थानीय आवश्यकत्ता के अनुसार फाउण्डेशन ऑफ इनफोरमेशन टेक्नोलोजी के लिए निर्धारित कालांशों का समायोजन अन्य विषयों के शिक्षण में कर सकते हैं।
9. न्यूनतम उतीर्णाक 36 प्रतिशत होंगे।

राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान , उदयपुर, राजस्थान द्वारा जनवरी 2014 में प्रकाशित।

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