School library: Rules for the operation of Library and Reading Room in a School

स्कूल लाइब्रेरी : एक विद्यालय में पुस्तकालय व वाचनालय संचालन के नियम।

एक विद्यालय में पुस्तकालय-वाचनालय को संचालन करने के सम्बंध में शिक्षा विभागीय नियामवली में निम्नानुसार व्यवस्था प्रदान की गई है-

संस्थागत पुस्तकालय एवं वाचनालय

(अ) छात्रों एवं शिक्षकों/ कर्मचारियों में पढ़ने की आदत का विकास करने के लक्ष्य से प्रत्येक संस्था में एक पुस्तकालय एवं वाचनालय की
स्थापना की जानी चाहिए । संस्थागत पुस्तकालयों में पाठ्यपुस्तकों के अतिरिक्त संदर्भ साहित्य व सामान्य हित की ज्ञानवर्धक एवं शैक्षिक पुस्तकें भी उपलब्ध कराई जाए। वाचनालय में शैक्षिक, साहित्यिक एवं सामान्य रूचि की सामयिक पत्र- पत्रिकाएं रखी
जाए जो छात्रों को लाभदायक ज्ञान प्रदान कर सके तथा उनके व्यक्तित्व निर्माण में सहायक हो सके ।
पुस्तकालय-वाचनालय में दैनिक कार्य सम्पादन के लिए पूर्णकालिक प्रशिक्षित पुस्तकालयाध्यक्ष की व्यवस्था की जायेगी किन्तु जिन विद्यालयों में पूर्णकालिक पुस्तकालयाध्यक्ष का पद स्वीकृत न हो, वहां यह कार्य स्टाफ के किसी एक अध्यापक को सुपुर्द कर दिया जाएगा जो पूर्णकालिक
पुस्तकालयाध्यक्ष की भांति कार्य करेगा ।

(ब) पुस्तक अवदान प्रणाली

पुस्तकालय में खुली (ओपन सेल्फ) प्रणाली को अपनाने का प्रावधान होगा। पुस्तक अवदान के लिए निर्धारित अभिलेख संधारण किया
जाएगा । छात्रों के अध्ययन उत्साह को बढ़ाने हेतु यह अपेक्षित है कि कम से कम माध्यमिक कक्षाओं में छात्रवार खाते खोले जाए । अन्य कक्षाओं के लिए कक्षावार पुस्तकालय की व्यवस्था की जायेगी। पुस्तकें अधिकतम 14 दिन की अवधि तक के लिए दी जायेंगी यदि 14 दिन से अधिक निर्धारित अवधि में पुस्तकें नहीं लौटाई जाएँ या पुस्तक को खो दी जाए या नष्ट कर दी जाए तो पुस्तकालयाध्यक्ष संस्था प्रधान के हस्ताक्षरों से सम्बन्धित व्यक्ति को सूचना देगा कि वह खोई/ नष्ट हुई पुस्तक के बदले उसकी नई प्रति जमा कराए या उसके मूल्य की डेढ़ गुना राशि जमा कराए । पुस्तक का मूल्य राजकीय शुल्क की भाँति वसूली योग्य होगा वह राज्य कोष में जमा कराया जायेगा । यदि पत्र-पत्रिकाएँ छात्र कोष से क्रय की गई है तो वसूली गई राशि छात्र कोष में ही जमा की जावेगी ।

(स) व्यवस्था

संस्था प्रधान पुस्तकालयाध्यक्ष की सेवाओं का समय इस प्रकार निर्धारित करेगा कि शाला समय पूर्व, दौरान व पश्चात निश्चित समय तक
पुस्तकें लेने-लौटाने की सुविधा बनी रहें । ग्रीष्मावकाश/मध्यावधि अवकाश में पुस्तकालय एवं वाचनालय खुला रखा जा सके जिससे छात्र/ अध्यापक समुदाय उसका उपयोग कर सके । विद्यालय की वाचनालय सेवा के समुचित व अधिकाधिक उपयोग की दृष्टि से पुस्तकालय के समान ही उसकी भी व्यवस्था की जा सके । जीर्णशीर्ण पुस्तकों की मरम्मत , अनुपयोगी पुस्तकों की छंटनी, अस्थायी पाठन सामग्री का निपटान (डिस्पोजल) आदि की प्रक्रिया इस प्रकार अपनाई जाए कि नवीन ,आवश्यक उपयोगी साहित्य, पत्र-पत्रिकाओं, पाठ्यपुस्तकों , संदर्भ पुस्तकों को पुस्तकालय वाचनालय में स्थान मिल सके। पुस्तकालय एवं वाचनालय के रख-रखाव, सुरक्षा हेतु पुस्तको/ पत्र-पत्रिकाओं के क्रय, खारिज करने आदि समस्त मामलों में विभाग द्वारा प्रसारित निर्देश प्रभावी होंगे ।

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