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नवे भाव में शनि का फल | स्वास्थ्य, करियर और धन

नवे भाव में शनि का फल

नवे भाव में शनि का फल: नवे भाव में शनि के होने से जातक धार्मिक, धर्मपरायण और आध्यात्मिक रूप से झुकाव बना सकता है। ये व्यक्ति जीवन को एक अति-फैला हुआ यात्रा के रूप में मान सकते हैं जो आत्म-प्राप्ति की ओर ले जाता है। वे जीवन के प्रति एक रूढ़िवादी दृष्टिकोण है और उनके दर्शन काफी पारंपरिक है । वे रूढ़िवादी राय के लिए खड़े होने की संभावना अधिक है । और ऐसा करते समय, वे दूसरों के विचारों और विश्वासों की आलोचना भी कर सकते हैं । इन मूल निवासी जादू-टोने में गहन रुचि ले सकते हैं।

नवे भाव में शनि के शुभ फल (Positive Results of Shani in 9th House in Astrology)

  • नवे भाव में शनि के शुभ फल : प्राचीन लेखकों ने नवम भावस्थ शनि के फल मिश्रित रूप में बतलाए हैं।
  • किसी ने शुभ और किसी ने अशुभ फल बतलाए हैं। नवम भाव में शनि होने से जातक भ्रमणशील, धर्मात्मा, साहसी, स्थिरचित और शुभ कर्मकर्ता होता है।
  • मीठा बोलनेवाला, विचारशील, दानशील और दयालु होता है। रजोगुणप्रधान होता है। जातक का शील-अर्थात् आचरण और दूसरों के प्रति व्यवहार मृदुल तथा सर्वाकर्षक और मनोरम होता है। जातक का स्वभाव निर्मल होता है। अर्थात् जातक कुटिल न होकर निर्मल और सरल चित्त होता है।
  • जातक कोमल स्वभाव का होकर भी निर्णय लेने में कठोर होता है। नवमभाव में शनि स्थित होने से जातक की बुद्धि विषयवासना से विमुख और विरक्त होती है।
  • आध्यात्मिक रुचिवाला होता है। योग प्रतिपादक ग्रंथों में रुचि रखता है, अर्थात् योगशास्त्र का अभ्यास करता है। तीर्थयात्रा करने के लिए उद्यत और यत्नशील होता है।
  • ज्योतिष, तन्त्र आदि गूढ़ शास्त्रों से रुचि रहती
    है। नवम भाव में शनि हो तो व्यक्ति प्रसिद्ध होता है। जातक के द्वारा इस प्रकार के कार्य होते हैं, जो मृत्यु के बाद भी याद रखे जाते हैं। नवम भाव में शनि होने से जातक भाग्यवान् होता है। म्लेच्छ जाति के लोगों का सहयोग भाग्योदय में हो सकता है। शनि के नवमभाव में होने से जातक अधिकार पाता है।
  • 39वें वर्ष में तालाब-मन्दिर आदि साधारण जनता के हित के लिए बनवाता है। जातक का स्वभाव अभ्यासप्रिय, गम्भीर, दूसरों का तिरस्कार करने वाला होता है। जातक पुत्रवान्, धनवान् तथा सुखी होता है। जातक पुत्र, धन तथा सुख से युक्त होता है। शिक्षा पूरी होती है-बी0एस-सी, एम0एम-सी, आदि उपाधियाँ प्राप्त होती हैं। शिक्षक, वकील आदि के रूप में सफलता मिलती है।
  • नवम स्थान के शनि से साधारण लोग 20 वें वर्ष से आजीविका का प्रारम्भ करते हैं। उच्चवर्ग के लोगों में
    आजीविका का प्रारम्भ 27 वें वर्ष से होता है। नवम शनि होने से बुजुर्गों की संपत्ति उत्तराधिकार से प्राप्त करता है और इसमें कुछ बढ़ोत्री भी होती है।
  • शनि स्वतंत्र व्यवसाय या व्यापार के लिए भी कहीं पर अनुकूल होता है। अन्य राशियों में शनि हाने से छोटे भाई नहीं रहते। नवमभाव का शनि यदि मेष, सिंह, धनु, मिथुन, कर्क, वृश्चिक तथा मीन राशियों का हो तो भाग्योदय 36 वें वर्ष में सम्भावित होता है। मेष, मिथुन, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु तथा मीन में शुभ फल अनुभव गोचर होते हैं ।
  • नवम स्थान में शुभ शनि होने से विदेश भ्रमण के लिए अच्छा है।

नवे भाव में शनि के अशुभ फल (Negative Results of Shani in 9th House in Astrology)

  • नवे भाव में शनि के अशुभ फल : नवम स्थान में पीडि़त शनि होने से जातक द्वेषी, मदांध, दांभिक, कंजूस, स्वार्थी, क्षुद्रबुद्धि, वाचाल, छद्मी, तथा मर्मघातक बोलने वाला होता है।
  • जातक धर्म के विषय में दुराग्रही, पिता तथा देवता पर आस्था न रखनेवाला, तीर्थों में श्रद्धा न रखने वाला, तथा भाग्यहीन होता है।
  • नवम शनि सुहृद्वर्ग से सुखप्राप्ति में बाधक होता है। जातक दुष्ट बुद्धि वाला तथा सौजन्यरहित होता है। जातक मन्दबुद्धि अर्थात् मूर्ख होता है। दूसरों को संताप देनेवाला होता है।
  • विवाह से सम्बन्धित रिश्तेदारों से हानि होती है। विदेश में घूमने से, कानूनी व्यवहारों में, लम्बे प्रवास से नुकसान होता है। ग्रन्थ प्रकाशन में असफलता मिलती है। शनि सौतेली माँ होने का योग करता है। शनि नवम होने से जातक भाग्यहीन, धनहीन, धर्महीन, पुत्रहीन भ्रातृहीन तथा पितृहीन होता है।
  • शनि नवमभाव में होने से जातक शत्रुवशवर्ती, क्रूर और सदैव परस्त्रीगामी होता है।