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| On 3 years ago

Sholay- Larger than life drama of Bollywood.

"शोले"- भारतीय अवचेतन पर चस्पा फ़िल्म।

कर्नाटक के बेंगलूर और मैसूर के बीच पहाड़ियों से घिरे एक छोटे से गाँव "रामनगरम" में फिल्मांकित 204 मिनट की "शोले" 15 अगस्त 1975 को रिलीज़ हुई थी। निर्माता जीपी सिप्पी की इस फ़िल्म को निर्देशित रमेश सिप्पी ने किया था। इस कालजयी फ़िल्म की निर्माण लागत 3 करोड़ व इसका बॉक्स ऑफिस कलेक्शन प्रथम बार में 15 करोड़ था। इससे बड़ी हिट बॉलीवुड फ़िल्म आज तक कोई नहीं है।
फ़िल्म में सितारों की
भरमार एवम उनके जबरदस्त अभिनय के अलावा सफलता का श्रेय फ़िल्म के लेखक सलीम-जावेद को भी जाता है जिनकी कलम से इतना कसा हुआ ड्रामा नमूदार हुआ। फ़िल्म में संजीव कुमार, अमिताभ बच्चन, धर्मेन्द्र, हेमा मालिनी व जया भादुड़ी जैसे स्थापित कलाकारों के बीच बाज़ी नवोदित अमजद खान ने मारी थी। आज भी "गब्बर सिंह" का टाइटल भारतीय समाज का आम हिस्सा है।
फ़िल्म ने लोगो की बोली बदल डाली थी। लोग दो दोस्तों की जोड़ी को जय-वीरू, तेजतर्रार युवती को बसन्ती, चमचो को सांभा/ कालिया कहने लगे थे। हर घर-गली गब्बर, ठाकुर और जय-वीरू के संवादों से गुंजित थी। इन संवादों के इतर "मौसी" के जय के साथ वार्ता और टँकी पर चढे वीरू का मोनोलॉग लोगो को हूबहू याद था।
फ़िल्म
में हिंसा का आलम यह था कि जब पर्दे पर "गब्बर" अवतरित होता तो बच्चे अपनी माताओ के दामन में दुबक जाते और दुबकते भी क्यों नहीं? गब्बर का दावा था " यहाँ से पचास-पचास कोस तक बच्चा नहीं सोता है तो माँ कहती है - बेटा। सोजा, नहीं तो गब्बर आ जाएगा।"
लोगो ने फ़िल्म कई कई मर्तबा देखी थी उन्हें फ्रेम दर फ्रेम फ़िल्म याद थी लेकिन शोले का रोमांच उन्हें सिनेमाघरों तक ले जाता था। फ़िल्म जहाँ भी लगी उसने 100 दिन पुरे किये और मुम्बई के "मिनर्वा" में तो सालो नहीं उतरी।
फ़िल्म की सफलता का मुख्य कारण इसकी तेज़ रफ़्तार, बेहतरीन म्यूज़िक, समाज से चुने गए किरदार, विदेशी एक्सपर्ट्स की सेवाये, जबरदस्त सम्वाद, प्रोफेशनल मैकिंग और भाग्य था। "भाग्य" इसलिए क्योंकि इन सभी इनपुट्स को शामिल करके बनी "शान" सुपरहिट ना हो सकी।
फ़िल्म "शोले" एक फ़िल्म से कही अधिक है। शेखर कपूर ने कहा था की भारतीय फ़िल्म इतिहास को शोले से पहले व बाद में यानी BS (Before Sholay) व AS (After Sholay) के रूप में देखा जा सकता हैं। यह फ़िल्म आज अनेक इंस्टीट्यूट के पाठ्यक्रम के रूप में शुमार हैं।
सादर।
सुरेन्द्र सिंह चौहान।