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| On 2 months ago

दसवे भाव में शुक्र का फल | स्वास्थ्य, करियर और धन

दसवे भाव में शुक्र होने से जातिका कई यज्ञ करती है। ज्योतिषी, विजयी, गुणवान् एवं दयालु। यज्ञ-दान आदि करने से प्रशंसा की पात्र होती है। सोने-चाँदी के व्यवहार में धन प्राप्त करती है।

दसवे भाव में शुक्र का फल

दसवे भाव में शुक्र का शुभ फल (Positive Results of Shukra in 10th House in Astrology)

  • दसवे भाव में शुक्र (Shukra in 10th House) होने से जातिका शरीर से सुन्दर तथा आकर्षक होती है। स्वभाव शांत और मिलनसार होता है। झगड़े नितांत नापसन्द होते हैं। नैतिक आचरण अच्छा होता है। शुद्ध हृदय तथा सद् विचार रखने वाली होती है। जातिका धर्म में श्रद्धालु होती है। मन स्नान, पूजन तथा ध्यान में मग्न रहती है।

  • दशम भावगत शुक्र होने से जातिका कई यज्ञ करती है। ज्योतिषी, विजयी, गुणवान् एवं दयालु। यज्ञ-दान आदि करने से प्रशंसा की पात्र होती है। अपनी चतुर्मुखी बुद्धि से विख्यात होती है। यश सर्वत्र फैला रहता है। अनेक शास्त्रों की ज्ञाता, विद्वान और विचारशील होती है। लोग जातिका को आदरणीय और माननीय मानते हैं।

  • दशमभाव में शुक्र होता है तो जातिका बहुत प्रतापी होती है। यह बहुत बोलने वाली और अच्छी वक्ता होती है। दशमस्थ शुक्र की जातिका विभु अर्थात् धनाढ़्य होती

    है। जातिका के पास रत्न और चाँदी आदि बहुमूल्य वस्तुएँ रहती हैं। सोने-चाँदी के व्यवहार में धन प्राप्त करती है। जातिका को किसानों से, पुरूषों से, धन प्राप्त होता है। सम्पत्ति का कष्ट सहसा नहीं होता है। जातिका के पास धन संचित रहता है।
  • जातिका के दशमस्थान में शुक्र होने से कर्मण्य होती है, शुभकर्म करने वाली होती है। जातिका को संकल्पसिद्धि प्राप्त होती है अर्थात् जातिका के संकल्प पूर्ण होते हैं। राज्य की नौकरी मिलती है- राजदरबार में अधिकार पद प्राप्त होते हैं।

  • दसवे भाव में शुक्र होने से जातिका व्यवसाय में सफल तथा प्रभावशाली होती है। गायन, वादन, साहित्यरचना, चित्रकारी आदि ललित कलाओं में रुचि होती है। इन कलाओं से सम्बन्ध रखने वाली, व्यवसाय करती है। पुरूष प्रेम दृष्टि से देखती हैं। प्रसिद्ध या श्रीमानकुल के तरुण से विवाह होता है।

  • जातिका का पति धनी तथा सच्चरित्र होता है। पुरूष से अच्छा लाभ और सम्मान प्राप्त होता है। कर्म भावगत शुक्र के होने से जातिका को पुत्र तथा पति का सुख मिलता है। अपने पति तथा पुत्र को बहुत प्रेम करती है। विवाह से भाग्योदय और धनलाभ होता है। स्वभाव से कामी अवश्य होती है पर पुरूषों पर पैसे खर्च नहीं करती

    है।
  • सभी प्रकार के वाहन-घोड़ा-गाड़ी-हाथी-मोटर का सुख सदैव प्राप्त रहता है। यह राजमान्य होती है-राजकुल में पूजित होती। यह सदैव उत्सवों में भाग लेने वाली होती है। कर्मभावगत शुक्र की जातिका सज्जनों से युक्त, मित्रों से युक्त, नीतिमान् और विजयी होती है।

  • जातिका अपने विवाद से नौकरी-व्यवसाय, सुख, रति, मान, धन और कीर्ति को प्राप्त करती है। भाइयों से युक्त होती है। जातिका मनुष्यों में श्रेष्ठ, प्रभावशाली, बहुत भाग्यशाली होती है। जातिका भोगी होती है। जंगल में भी राजा जैसे भोगविलास प्राप्त होते है। काव्यरचना में कुशल होती है। जीवन सुखी होता है। दूर-दूर के देशों में प्रवास करती है।

  • जातिका किसी की शरण में जाना स्वीकार नहीं करती है। अभिजित नक्षत्र जिस प्रकार सर्वविजय बतलाता है वैसे ही दशमस्थ शुक्र सर्वोन्नति कराता है।      

  • शुक्र शुभ सम्बन्ध में होने से सब तरह से ऐश्वर्य देता है।       जन्मस्थ चन्द्र से शुभयोग होने से आर्थिक और कौटुम्बिक सुख अच्छा मिलता है।   

दसवे भाव में शुक्र का अशुभ फल (Negative Results of Shukra in 10th House in Astrology)

  • दसवें स्थान पर विद्यमान शुक्र (Shukra in 10th House) के प्रभाव से जातिका कृपण स्वभाव, लोभी, अविश्वासी होती है। जातिका अपने बारे में बहुत आडम्बर बतलाती

    है। जातिका लोगों से हमेशा विवाद करती है। भ्रमवश धन नष्ट होता रहता है। अपने दरवाजे पर से बा्रह्मणों को अपमानित कर लौटाने से तथा शत्रुओं के साथ विवाद करने से अत्याधिक धन नष्ट होता है।
  • शुक्र दशमभाव में होने से कुल का नाश होता है। शुक्र पुत्र सन्तति के होने में विघ्न उत्पनन्न करता है। सन्तान-सुख किंचित रूप में ही मिल पाता है। दशमभाव में शुक्र होने से जातिका बधिर होती है अथवा जातिका का भाई बधिर होता है।

  • दशमस्थ शुक्र का नारायणभट्ट ने पुत्र संतति का प्रतिबन्धक होना रूपी अशुभफल बतलाया है। इसका अनुभव पुरुष राशियों में, कभी-कभी मीन में अनुभव में आता है। शुभफल अन्य राशियों में अनुभव गोचर होते हैं       दशमस्थ शुक्र पीडि़त या अशुभ सम्बन्ध में होने से व्यभिचारी वृत्ति से अपमान होता है।      

  • दशम शुक्र के साथ पापग्रह होने से कामों में विघ्न आते हैं। दशमस्थशुक्र पुरुष राशि में होने से अविवाहित रहने की ओर प्रवृत्ति होती है। पुरूष से सम्बन्ध पसन्द नहीं होता है। विवाह का विचार तभी होता है जब धनार्जन होने लगता है। पति से वैमनस्य रहता है। संतति के लिए चिन्ता बनी रहती है। पति-पुत्र सुख यदि मिलता है तो व्यवसाय

    सुखपूर्वक नहीं चलता है। कहीं-कहीं द्विभार्यायोग भी हो सकता है।
  • मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु तथा कुम्भ में दशमस्थ शुक्र होने से वैज्ञानिक उपधियाँ प्राप्त होती हैं। वनस्पतिशास्त्र, चिकित्सा आदि कार्यो में नैपुण्य प्राप्त होता है। गणित और ज्योतिष में भी जातिका निपुण और प्रवीण दृष्टिगोचर हुए हैं। गायन, वादन, सिनेमा फोटोग्राफी, ड्राइविंग आदि में व्यवसाय के तौर पर रुचि होती है। 

  • दशमस्थ शुक्र दूषित होने से पुरूषों के साथ अवैध सम्बन्ध से अपयश और अपमान होता है। परपुरूषलोलुपता से धन व्यय भारी मात्रा में करती है। मंगल से शुभ सम्बन्ध होने से जातिका सच्चरित्र होती है।      

  • दशमस्थ शुक्र पुरुष राशि का होने से पितृसुख नहीं होता है शुक्र के कारकत्व के व्यवसायों में यश और कीर्ति प्राप्त नहीं होती। जातिका सभी प्रकार से व्यवसाय करना चाहती है और करती भी है परन्तु सफलता किसी एक में भी नहीं मिलती है।