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सातवें भाव में शुक्र का फल | स्वास्थ्य, करियर और धन | Venus in Seventh House in Hindi

सातवें भाव में शुक्र होने से जातक अनेक कलाओं में चतुर, कामक्रीड़ा में चतुर, जलक्रीड़ा में चतुर, जलक्रीड़ा करनेवाला होता है। गायन, नाटक आदि लोगों के मनोरन्जन के साधनों से सम्बन्ध रहता है।

सातवें भाव में शुक्र का फल | स्वास्थ्य, करियर और धन
सातवें भाव में शुक्र का फल

शुक्र, जिसे "प्रेम की देवी" के रूप में भी जाना जाता है, सभी रिश्ते, जीवन साथी, भौतिक सुखों और प्रेम के बारे में है। और जब शुक्र सातवें भाव में स्तिथ होने पर यह मूल निवासी के लिए एक अतिरिक्त विशेषाधिकार देता है । यह प्लेसमेंट स्नेह, आकर्षण और अनुग्रह से भरे एक खुशहाल विवाहित जीवन के साथ देशी प्रदान करने के लिए एक आदर्श संयोजन है। ऐसे मूल निवासी एक-दूसरे के लिए कल्याण की भावना को बढ़ावा देते हैं। वे अपने रिश्तों में बड़ी समझदारी और सहानुभूति दिखाते हैं। इसके अलावा, ये मूल निवासी अपने निजी जीवन में प्यार, देखभाल करने वाले, संवेदनशील और सौम्य भी होते हैं।

सातवें भाव में शुक्र का शुभ फल (Positive Results of Shukra in 7th House in Astrology)

  • सातवें स्थान पर बैठा शुक्र व्यक्ति को मिश्रित फल देता है। कई एक ग्रन्थकारों ने शुभफल बतलाये हैं और कई एक ने अशुभ फल कहे हैं।

  • सातवें भाव में होने से उदार, लोकप्रिय, चिन्तित, साधुप्रेमी, चंचल, विलासी, गानप्रिय एवं भाग्यवान् होता है। जातक की बुद्धि

    उदार, शरीर उज्वल, कुल उन्नत तथा प्रताप राजा जैसा होता है।
  • सातवें भाव में शुक्र होने से जातक थोड़ा प्रयास करने वाला अर्थात् आराम तलब होता है। अतीव सुन्दर होता है। सुन्दर स्वरूप होता है। कौन ऐसे हैं जो इसके सुन्दररूप पर मोहित हों-अर्थात् जातक बहुत आकर्षक होता है। अथवा जातक इतना व्यवहारचतुर होता है कि इसके चातुर्य्य से सभी मोहित होते हैं। एक श्रेष्ठ कलाकार होता है, और जातक की कला से सब रसिक श्रेष्ठ लोग मोहित होते हैं।

  • जातक किसी से लड़ाई-झगड़ा नहीं करता है- प्रसन्नमना: तथा सुखी होता है। जातक अनेक कलाओं में चतुर, कामक्रीड़ा में चतुर, जलक्रीड़ा में चतुर, जलक्रीड़ा करनेवाला होता है। गायन, नाटक आदि लोगों के मनोरन्जन के साधनों से सम्बन्ध रहता है। गानविद्या में निपुण होता है। व्यक्ति का विवाह छोटी आयु में ही सुन्दरी और सद्गुण सम्पन्ना युवती से होता है। विवाह के बाद भाग्योदय होता है, विपुल धन लाभ होता है।

  • सप्तम स्थान में स्थित शुक्र के कारण जातक सुन्दर चतुर पत्नी का सुख प्राप्त करता है। स्त्रियों के सुख की कमी नहीं रहती, स्त्री से पूर्णसुख प्राप्त करता है। सुन्दरी स्त्रियों के उपभोग का सुख अधिक से अधिक मिलता है। स्त्रियों के समूह में रहनेवाला होता है।

  • सातवें भाव में होने से जातक की पत्नी कुलीन अर्थात श्रेष्ठ

    कुल में उत्पन्न होती है। जातक की भार्या के गर्भ से रत्नवत् शुद्ध-सच्चरित्र तथा भाग्यवान् पुत्र पैदा होते हैं। सन्तान सुख प्रचुर मात्रा में प्राप्त होता है। पुत्रों पर विशेष प्रेम होता है।
  • सातवें भाव में शुक्र होने से व्यापार से धनलाभ होता है। यह वैभवपूर्ण, भाग्यवान्, धनवान् होता है। सुखसम्पन्न तथा बहुत भाग्यशाली होता है। वाहनों से युक्त, सकल कार्य निपुण होता है। स्त्री के सम्बन्ध से बहुत उन्नति प्राप्त होती है। शुक्र से साझीदारी में तथा कचहरियों के मामले में सफलता मिलती है। सार्वजनिक स्वरूप के व्यवहारों में अच्छी सफलता प्राप्त करता है।

  • सातवें भाव में होने से जातक की स्त्री, पुत्र, साझीदारी आदि से अनुकूल व्यवहार प्राप्त होने से सुखी जीवन व्यतीत होता है। परदेस में निवास करना, परदेश में रहने वाला होता है। राज कुल में सम्मान प्राप्त करता है।      

  • सप्तमभाव में शुक्र बलवान् होने से जातक एक से अधिक स्त्रियों का पति होता है। स्त्री के सप्तमभाव में बलवान् शुक हाने से जातिका भाग्यवती तथा धनवती होती है।      

  • शुक्र शुभराशि में, शुभ ग्रह के साथ या शुभग्रह की दृष्टि में होने से जातक की पत्नी तरुण होती है और बहुत आकर्षक सुन्दर, गोरे वर्ण की तथा प्रफुल्लित कमल जैसी आँखों वाली होती है।  

सातवें भाव में शुक्र का अशुभ फल (Negative Results of Shukra in 7th House in Astrology)

  • जन्मकाल में शुक्र सप्तमभाव में होने से जातक पुरुषार्थहीन होता है और सदा शंकायुक्त रहता है।

  • सातवें भाव में शुक्र कलत्रभाव में होने से जातक अत्यन्त कामुक होता है। विलासिता से प्रेम करना, व्यभिचार करना जातक का स्वभाव होता है। अपनी विवाहिता स्त्री से वैमनस्य रखता है परकीया परनारी में आसक्त होता है।

  • कुचरित्रा, जघनचपला, कुलटास्त्रियों का प्रेमी होता है। किसी एक अभिनेत्री या वेश्याओं से प्रेम करनेवाला होता है। स्त्री के विषय में भारी चिन्ता रहती है। शुक्र दूषित होने से विवाह देर से होकर स्त्रीसुख अच्छा नहीं मिलता। साझीदार तथा मित्रों से हानि होती है।

  • सातवें भाव में शुक्र होने से जातक की कमर में वातजन्य कारण से पीड़ा होती रहती है। इसके शरीर में कुछ व्यंग होता है। जातक को शोकमग्न होने के अवसर बार-बार आते हैं। धन रहने पर भी चिन्तित रहता है। जातक के पुत्र नहीं होते हैं।      

  • शुक्र मंगल के साथ, दृष्टि में, नवांश में या मंगल की राशियों (मेष-वृश्चिक) में होने से परस्त्रीगमन की इच्छा रहती है। शुक्र पापग्रह के साथ, शत्रुग्रह की राशि में या नीच राशि में होने से पहिली पत्नी की मृत्यु होती है और दूसरा विवाह होता है।      

  • कर्क, वृश्चिक या मीन में शुक्र होने से

    स्त्री का शरीर दुबला-पतला, कद ऊँचा, चेहरा लम्बा, चमकीली आँखें, लम्बे और चमकदार केश, त्वचा कोमल और मनोहर होती है। पत्नी स्वार्थी, कलहप्रिय, कुटुम्ब में मिलकर रहनेवाली तथा खर्चीली होती है। अपने हाथ में सत्ता रखने की चेष्टा सदैव रखती है। शुक्र स्त्रीराशि का होने से स्त्री के गुण पूर्णतया विकसित होते हैं।      
  • अविवाहित रहना, पत्नी से विभक्त हो जाना, दो विवाह का होना, सप्तम शुक्र के अशुभफल हैं। इस प्रकार के फलों का अनुभव, वृषभ, कर्क, वृश्चिक, मकर तथा मीन राशियों में विशेषतया होता है। पुरुाराशियों में, मिथुन और धनु में भी यही फल अनुभूत होता है। स्त्रीराशि का शुक्र होने से नौकरी श्रेयस्कर होती है।

  • स्त्रीराशि में व्यवसाय और नौकरी दोनों अच्छे रहते हैं। साझीदारी पसंद नहीं होती।      स्त्रीराशि में शुक्र होने से वृत्ति इसके प्रतिकूल होती है। स्त्री को तुच्छ तथा कामवासनापूर्ति का साधन माना जाता है।