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ठंड लगकर बुखार का आना टायफॉइड का संकेत, ऐसे पहचानें लक्षण(Fever with chills is a sign of Typhoid, Recognize such Symptoms)

Typhoid (टाइफाइड) -  आंत्र ज्वर या जिसे हम टाइफाइड के नाम से जानते है। यह एक खतरनाक रोग है। जो कि सलमोनेल्ला टायफी (Salmonella typhi) नामक जीवाणु (बैक्टीरिया) से होता/फैलता है। आंत्र ज्वर (टाइफायड) को सामान्यतः एंटीबायोटिक दवाइयों से रोका व उपचार किया जा सकता है। टाइफाइड को मियादी बुखार भी कहा जाता है। यह रोग विश्व में सभी जगह होता है। यह रोग किसी संक्रमित व्यक्ति के मल से मलिन हुए जल या खाद्य-पदार्थ के खाने/पीने से होता है यह कभी बारिश तो कभी धूप के कारण या लगातार बदलते मौसम की वजह से होता है

टाइफाइड के लक्षण बुखार के जैसे सामान्य है, किन्तु ऐसा तो मलेरिया रोग और डेंगू रोग में भी होता है, क्योंकि इस बुखार में शरीर का तापमान कई बार 104 डिग्री तक पहुंच जाता है, जिससे यह 02-03 दिनों तक बना रहता है।

टाइफाइड (typhoid) साल्मोनेला जीवाणु से फैलने वाली एक खतरनाक बीमारी है। टाइफाइड पाचन-तंत्र और ब्लडस्ट्रीम में जीवाणु के संक्रमण की वजह से होता है। गंदे पानी, संक्रमित रस/जूस या पेय पदार्थों के साथ साल्मोनेला जीवाणु शरीर में प्रवेश कर जाता है। जीवाणु के शरीर में घुसने के बाद टाइफाइड के लक्षण प्रभावी होने लगते हैं। इसमें रोगी को कमजोरी महसूस होने लगती है। टाइफाइड का जीवाणु पानी या सूखे मल में कई हफ्तों तक जिंदा रह सकता है। उस तरह से यह दूषित पानी या खाद्य पदार्थों के कारण शरीर में पहुँचकर संक्रमण का कारण बनता है। जब व्यक्ति किसी संक्रमित व्यक्ति का जूठा खाद्य-पदार्थ खाता या पीता है तो उससे दूसरे व्यक्ति को टाइफाइड रोग होने की संभावना होती है।

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Typhoid (टाइफाइड) क्या है-

सामान्यतौर पर प्रदूषित पानी से व संक्रमित और बासी/पुराने भोजन के उपयोग से टाइफाइड होने की मुख्य वजह होती है। वात, पित्त और कफ तीनों दोषों के प्रकोप से टाइफाइड रोग होता है। यह एक संक्रामक रोग है। इसी कारण से घर में किसी सदस्य को टाइफाइड हो जाने पर घर के अन्य सदस्यों को भी इसके होने का खतरा होता है। मौसम में बदलाव और कुछ गलत आदतों के कारण इस बुखार के संक्रमण परेशान करते हैं। यह तेज बुखार से जुड़ा रोग है जो सेलमोनेला टाइफाई जीवाणु/बैक्टीरिया द्वारा फैलता है। यह जीवाणु/बैक्टीरिया खाने या पानी से मनुष्यों द्वारा एक जगह से दूसरी जगह तक पहुँचाता है। Typhoid में कमजोरी होने पर थकान या आलस्य महसूस हो तो गरम पानी से स्नान करें। जिससे पसीना आने से बुखार कम हो जाता है।

Typhoid (टाइफाइड) रोग के कारण -

यह संक्रमित भोजन या संक्रमित पानी के प्रयोग से होता है, या जीवाणु/बैक्टीरिया से ग्रस्त व्यक्ति के सम्पर्क से इसकी संभावना किसी संक्रमित व्यक्ति के जूठे खाद्य पदार्थ के खाने-पीने से होता है। दूषित खाद्य वस्तुओं से भी यह संक्रमण हो सकता है। पाचन तंत्र में पहुँचकर इन जीवाणुओं की संख्या बढ़ जाती है। शरीर के अन्दर ये जीवाणु/बैक्टीरिया एक अंग से दूसरे अंग तक पहुँचते हैं।

यह सबसे अधिक मुंह के द्वारा खाने-पीने की ऐसी प्रदूषित वस्तुओं से फैलता है, जिनमें साल्मोनेला टाइफी नामक जीवाणु मौजूद होते हैं। यदि रोगी शौचालय का उपयोग करने के बाद अपने हाथों को कीटाणु नाशक साबुन से नहीं धोता या साफ़ करता है, और उन्हीं हाथों

से खाने-पीने की व अन्य वस्तुओं को छूता/स्पर्श करता है, और यदि उसे कोई दूसरा स्वस्थ व्यक्ति उन्हीं वस्तुओं को छूकर साबुन से हाथ धोए बिना कोई खाद्य पदार्थ ग्रहण करता है तो वह इस रोग से संक्रमित हो जाता है।

सलमोनेल्ला टायफी केवल मानव में ही पाया जाता है। आंत्र ज्वर (टाइफायड) से पीड़ित व्यक्ति की रक्त धारा और धमनी मार्ग में जीवाणु प्रवाहित होते हैं। इस प्रकार बीमार और संवाहक दोनों ही व्यक्तियों के मल से सलमोनेल्ला टायफी निकलती है। अतः आंत्र ज्वर (टाइफायड) ऐसे स्थानों में अधिक पाया जाता है जहां हाथ धोने की परम्परा कम होती है तथा जहां पानी, मलवाहक गंदगी से प्रदूषित होता है।

टाइफाइड के लक्षण-

यदि कई दिनों से बुखार आ रहा हो तो ये Typhoid का बुखार हो सकता है। इसके प्रभाव से सिरदर्द की शिकायत होती है, और शरीर में दर्द और भूख न लगने की परेशानी, कफ की समस्या या पेट में दर्द और दस्त तथा कब्ज की शिकायत रहती है।

  • बुखार इसका प्रमुख लक्षण होता है।
  • जैसे-जैसे संक्रमण/वायरस बढ़ता है वैसे ही भूख कम होती रहती है।
  • सिर दर्द होता है।
  • शरीर में दर्द होता है।
  • अधिक ठण्ड लगना ।
  • सुस्ती और आलस्य महसूस होना।
  • कमजोरी का महसूस होना।
  • दस्त की समस्या होने लगती है।
  • 102-104 डिग्री से ऊपर बुखार रहता है।
  • बच्चों में कब्ज तथा दस्त की शिकायत रहती है।

Typhoid (टाइफाइड) से बचाव के उपाय -

  • खाने में इन वस्तुओं का इस्तेमाल करें-
    • पपीते का प्रयोग करें।
    • सेब का उपयोग करें।
    • हरी सब्जियों का सेवन करें।
    • पाचन तंत्र को ठीक रखने के लिए गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर पियें।
    • गर्म/उबला हुआ पानी का इस्तेमाल करें।
  • इन वस्तुओं का उपयोग ना करें -
    • प्याज, लहसुन आदि तीव्र गंधि खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
    • मसालों जैसे- मिर्च, सॉस, सिरका आदि से परहेज करें।
    • गैस बनाने वाले आहार का उपयोग नहीं करें जैसे- अनानास, कटहल आदि।
    • उच्च रेशेदार युक्त आहार, सब्जियाँ जिनमें उच्च मात्रा में रेशे, अघुलनशील रेशे हों जैसे-केला, पपीता, शक्करकन्द, साबुत अनाज से परहेज करें।
    • मक्खन, घी, पेस्ट्री, तले हुए आहार, मिठाईयाँ का उपयोग न करें।
    • बाजार की बनी हुई चीजों से दूर रहें।
    • भारी भोजन करने से बचें।
    • मांसाहारी भोजन न करें।
    • पेट भरकर न खायें।
    • ऐसा खाना न खाये जो देर से पचता हो।
    • चाय, कॉफी, शराब, सिगरेट का उपयोग न करें।
  • दिनचर्या में इन नियमों को अपनाना -
    • स्वच्छता बनाये रखना।
    • हाथों को साबुन से गर्म पानी से धोएं।
    • साफ गर्म/उबला पानी पीएं।
    • कच्चा भोजन न करें।
    • पका भोजन गर्म ही खायें।
    • बाजार के पेय पदार्थ और खाद्य पदार्थ उपयोग में न लें।
    • पानी को स्वच्छ रखना।
    • कूड़े-कचरे का निपटान सही तरीके से करना।
    • कच्चे फल और सब्जियाँ खाने से बचें।
    • गर्म खाद्य-पदार्थों का सेवन करें।
    • संग्रहित खाद्य-पदार्थों से बचें।

Typhoid (टाइफाइड) से बचाव के घरेलू उपाय -

  1. सभी प्रकार के फलों के रस का प्रयोग करना चाहिए।
  2. तुलसी का इस्तेमाल करना चाहिए।
  3. सेब के रस प्रयोग करना चाहिए।
  4. लहसुन का इस्तेमाल करना चाहिए।
  5. लौंग का उपयोग करना चाहिए।
  6. ठंडे पानी की पट्टी का प्रयोग।
  7. शहद का सेवन करना चाहिए।

Typhoid (टाइफाइड) रोकने के उपचार -

Typhoid पैदा करने वाले साल्मोनेला जीवाणु/बैकटीरिया को एंटीबॉयोटिक दवाओं से खत्म किया जा सकता है। कुछ कारणों में लंबे समय तक एंटीबॉयटिक दवाओं के इस्तेमाल से Typhoid के जीवाणु एंटीबॉयोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं। रोगी के शरीर में पानी की कमी न होने पाए,

इसके लिए पीड़ित व्यक्ति को पर्याप्त मात्रा में पानी और पोषक तरल पदार्थ लेना चाहिए। रोगी को हल्का आसानी से पचा जाने वाला भोजन देना चाहिए।

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Typhoid (टाइफाइड) रोग में डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए -

  • Typhoid एक संक्रामक रोग होता है। यदि तेज बुखार, पेट में दर्द, कमजोरी महसूस हो तो जल्द से जल्द डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए।
  • डॉक्टर के पास जाने में देरी न करें वरना यह गम्भीर रोग में परिवर्तित हो सकता है।
  • देरी के कारण आंतों में सूजन की समस्या हो सकती है।
  • समय पर चिकित्सा न करने पर गंभीर नुकसान हो सकता है।
  • डॉक्टर द्वारा जितने समय तक दवा के उपयोग की सलाह दी जाती है। उसकी पलना करें।