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| On 2 years ago

Social Media: Please follow basic rules to enrich identity of society.

सोशल मीडिया : भाईसाहब व बहिनजी थोड़ा सम्भल जाओ ।

आज कल आप किसी भी धार्मिक स्थल, मॉल, ऊँची बिल्डिंग, बड़े शोरूम, सामाजिक अवसर, सांस्कृतिक कार्यक्रम पर चले जाओ तो 16 साल से ऊपर के लोग "सेल्फी" लेते नजर आएंगे। ये तथाकथित "सेल्फी किंग" या " सेल्फी क्वीन" या "सेल्फी किड्स" बहुत बिगाड़ कर रहे है।

अव्वल तो ये सेल्फियों के चक्कर में लोगों की राह में बाधा खड़ी करते है व उस स्थान विशेष के गाम्भीर्य भाव को भी चोट पहुँचाते है। फोटो लेना व उस स्थान की याद संजो के

रखना बहुत अच्छा है लेकिन उसका भी एक कायदा है। जिन स्थानों पर फ़ोटो खींचना मना है वहाँ भी ये "सेल्फी सितारे" सेल्फी लेने के चक्कर मे व्यवस्था खराब करते है।

एक बड़ा अजीब मनोवैज्ञानिक प्रभाव विकसित हो रहा है कि पहले लोग फ़ोटो में शालीन नजर आने के लिए करीने से कपड़े ठीक-ठाक करके सीधे खड़े होकर फोटों खिंचवाते थे लेकिन अब "सेल्फी स्टिक" के दम पर जितना हो सके उतना खुद का मुहँ अजीबोगरीब कोण से खिंचते है।

यहाँ तक तो फिर भी ठीक है लेकिन हमारी बारह तब बजती है जबकि

वे इन नामुराद फोटो सेशन को मुफ्त के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भर-भर के अपलोड करके सारी दुनिया से बदला लेते है। सुबह जब सोशल मीडिया चेक करो तो ऐसे फिजूल फोटो सेशन को भुगतना ही पड़ता है।

एक बार गाँधीजी ने कहा था कि आपके कार्यो से अगर सीमांत आदमी (Marginal Person) को फायदा नही हो रहा है तो उस काम को करना व्यर्थ है। यह यहाँ भी लागु होता है कि अगर आपके द्वारा खुद की "दे दनादन" स्टाइल में रोजाना के फोटो अपलोड किसका भला कर रहे है?

अगर आपके कमरे में

हजारों वस्तुएं होगी तो मान कर चलिए कि सुबह स्कूल/ऑफिस/काम पर जाते समय आपको आवश्यक वस्तुओं को ढूंढना पड़ेगा। इसी प्रकार जब सोशल मीडिया पर हम कोई काम की वस्तु ढूंढते है तो असँख्य "अनवांटेड ऑब्जेक्ट" सामने आते है।

जनाब। अभी तो सोशल मीडिया मुफ्त है एवं "माले-मुफ्त दिले-बेरहम" अंदाज में यूज़ कर रहे है लेकिन मान कर चलिए कि यह हमेशा नही रहेगा, आप तब भी इसको सीमित करेंगे ही, तो आज से ही ऐसा क्यों नही? अनाप-शनाप फोटो अपलोड से लोग आपसे कमसेकम खुश तो नही होते अपितु चिढ़ने लगते है।

आपकी भावी नस्ले भी

इसे डिसलाइक ही करती है व ज्यादा अपलोड के चक्कर मे हम मर्यादा की बारीक सीमा को भी लांघ जाते है। निश्चय ही आपकी "ओवर स्पीकिंग सेल्फीज़" आपको "अंडर एवरेज पर्सनलिटी" की भीड़ में ही डालती है।

भारत एक महान राष्ट्र है जिसकी पहचान उसकी संस्कृति, शुचिता, संस्कार, सरोकारिता व समर्पित सहभागिता से है अतः इनसे ओतप्रोत फोटोज, सन्देश व सेल्फीज़ से इसे अधिक पुष्टि प्रदान करे एवं इस सन्देश को उचित माने तो आगे बढ़ाकर राष्ट्रीय पहचान व अस्मिता के ध्वजवाहक बने।

(चौपाल पर हुई बातचीत)