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Social Media : Protect your personal data to avoid misuse.

सोशल मीडिया: क्या आपकों भी महंगे ब्रांड के उत्पाद सस्ते में खरीदने का शौक है? तो हो जाइए सावधान।

"ठग" हर कालखंड में हुए है और उन्होंने हमेशा नए तरीके इज़ाद किये है। वर्तमान इंटरनेट युग मे डाटा एक अत्यंत महत्वपूर्ण सम्पदा है जिसकी व्यापक ख़रीद-फरोख्त की जाती है।

इसका एक ज्वलन्त उदाहरण सोशल मीडिया विशेषकर व्हाट्सएप के विभिन्न ग्रुप्स में प्रसारित " प्रधानमंत्री बेरोजगार भत्ता योजना" के सम्बंध में आवेदन करने के लिए जारी सन्देश है। इस सन्देश में आवेदकों को तुरंत आवेदन हेतु निर्देशित किया जा रहा है।

पड़ताल में जब इस हेतु आवेदन प्रक्रिया को जांचा गया तो इस

लिंक पर दिए विभिन्न ऑनलाइन फॉर्म्स का उद्देश्य मात्र डाटा कलेक्शन है। इस लिंक की वास्तविक योजना से कोई सम्बन्धता नही है।
इस लिंक को क्लिक करने पर यूजर किसी राजकीय पोर्टल पर जाने की अपेक्षा ब्लॉग्स्पॉट पर बने एक ब्लॉग पर पहुंचता है व तत्पश्चात उसी ब्लॉग के नाम से मिलते-जुलते अन्य ब्लॉग्स पर विभिन्न सूचनाएं भरवाई जाती है।

इन सूचनाओं को एकत्र करने के पश्चात उनको वर्गीकरण पश्चात डाटा बैंक के रूप में आगे बेचा जाता है। प्रत्यक्षतः इससे इन ऑनलाइन फॉर्म्स भरने वालों को कोई फायदा या नुकसान बेशक नही हो लेकिन अवांछित रूप से एकत्रित आपके डाटा से अनियमित व्यापार को बढ़ावा मिलता है एवम आपके डाटा के बेजा इस्तेमाल की आशंका बढ़ती है।

अगली बार विभिन्न राजकीय योजनाओं तथा प्रीमियम ब्रांड्स के उत्पाद सस्ते दामों में खरीदने के लोभ में आप इन लिंक्स पर जाकर सीधे अपना व्यक्तिगत डाटा शेयर करने से पूर्व यह जांच ले-
1. राजकीय योजनाओं के लिंक में डोमेन .Gov.in , Nic.in होता है।
2. श्रेष्ठ ब्रांड्स अपनी सेल योजनाओं को अपने स्वयं के डोमेन से बनी वेबसाइट पर ही जारी करते है।
3. राजकीय योजनाओं के जरिए डाटा एकत्र करने हेतु बने ऑनलाइन फॉर्म्स पर अनधिकृत रूप से संवैधानिक पद पर कार्यरत प्रतिनिधियों के चित्रों का दुरुपयोग कानूनी अपराध है।
4. डाटा शेयर के समय अपनी बैंक खाते सम्बंधित जानकारी हरगिज शेयर नही करे, विशेष रूप से बैंक खाता व एटीम नम्बर, आईएफसी कोड, ओटीपी इत्यादि।
5. प्रमुख बैंक्स ने बार बार इस आशय के मैसेज प्रसारित किए है कि उनको ग्राहकों के एटीएम नवीनीकरण हेतु दूरभाष पर किसी सूचना को लेने की आवश्यकता नही है और ना ही ऐसी कोई प्रक्रिया अथवा अधिकृत स्टाफ है।
6. प्रमुख ब्रांड्स अपना माल शोरूम, अधिकृत सेलिंग पॉइंट्स, बड़े ऑनलाइन सेल्स प्लेटफॉर्म, अथवा स्वंय की अधिकृत वेबसाइट पर ही उपलब्ध करवाते है।
7. इन फर्जी लिंक्स के माध्यम से खुलने वाले वेबसाइट की आरम्भिक स्टडी में ही इनकी पोलपट्टी

खुल जाती है। ये आल राइट रिजर्व्ड, कॉपीराइट जैसे शब्दों का प्रयोग तो करते है लेकिन स्वयं के बारे में कोई सूचना शेयर नही करते।
8. इन लिंक्स पर फॉर्म्स को पूरा भरने के बाद आपको इस लिंक को दस ग्रुप्स को भेजने के लिए निर्देशित किया जाएगा। इसी प्रकार डाटा कलेक्शन किया जाता रहेगा।

डाटा चोरी आधुनिक युग का सबसे बड़ा फ्रॉड बन कर उभर रहा है एवम बड़ी-बड़ी कम्पनियों पर भी ऐसे आरोप लग रहे है अतः किसी अनावश्यक परेशानी से बचाव का एकमात्र तरीका है कि आप अपना डाटा अत्यंत सावधानी से ही शेयर करे।