Social Virus: Two new social virus in India, Virus ROKA and Virus Ladies Sangeet.

सोशल वायरस: रोका और लेडीज संगीत

अब आ चुके है दो न्यू ब्राड “सामाजिक वायरस”, क्या आप इनको पहचानते है?

कुछ सालों पहले की पाठ्यपुस्तकों को देख लीजिए, दहेज को सबसे बड़ी सामाजिक बुराई के रूप में देखा जाता था। सार्वजनिक स्थलों पर भी दहेज के विरुद्ध औऱ बचत के समर्थन में सूचना पट्ट लगे दिखते थे।

सामान्य जनमानस यह था कि दहेज एक ऐसी सामाजिक बुराई है जो जल्द खत्म होगी। जैसे- जैसे शिक्षा समाज मे आयेगी वैसे-वैसे इसका अंत हो जाएगा। दहेज का दौर अब खत्म होकर रहेगा। लोगो का विश्वास था कि शिक्षा नामक दवाई दहेज नामक बीमारी को मिटा देगी।

आज शिक्षा पर्याप्त है, साक्षरता दर भी बढ़ी है, देश शिक्षा के प्रकाश से आलोकित है। शिक्षा में गुणात्मक विकास जारी है लेकिन प्रश्न यह है कि क्या शिक्षा के बावजूद भी दहेज नामक सामजिक बुराई मिट गई? इसका जबाब है नही। दहेज हत्याओं का सिलसिला जारी है। दहेज के अलावा दो नए सामाजिक वायरस भी आ गए है।

“रोका”

यह ऑटो डवलप वायरस है। कुछ समय पूर्व जब कोई परिवार किसी रिश्ते पर सहमत हो जाता था तो लड़के-लडक़ी के हाथ मे कुछ रुपये रख दिये जाते थे। अब यह रिश्ता तय करने की जगह “रोका” नामक व्यवस्था लागू हुई है। शादी व सगाई से पहले रोका होने लगा है। इस सामाजिक बुराई में भी धनाढ्य वर्ग बड़ा खर्च करने लगे है और अन्य लोग भी देखा-देखी अपनी हैसियत से बढ़ कर खर्च करने लगे है।

“लेडीज संगीत”

पहले शादी-ब्याह में रातिजोगा/रात्रिजोगा होता था। महिलाएं एकत्र होकर भजन/गीत गाती थी व इसके पश्चात कुछ लोकगीत पर नाच-गाना भी हो जाता था। जबसे बॉलीवुड ने कुछ ग्लैमरस शादियों को सिल्वर स्क्रीन पर पेश किया है तबसे एक नया वायरस “लेडीज संगीत” विकसित हुआ है। घर की औरतें-पुरुष डांस सीखते है व शादी से पहले लेडीज संगीत के नाम पर नोटों की बर्बादी कर रहे है।

आखिर किस दिशा में हम आगे बढ़ रहे है? यह तो तय है कि शिक्षा अब सामाजिक सरोकारिता की अपेक्षा बिजनेस सरोकारी होने लगी है। अब समाज मे सादगी व मितव्ययता लाने के लिए हम सभी सामान्य लोगो को ही आगे आना होगा।
शेष सब कुशल है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here