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सुसाइड रोकथाम दिवस (Suicide Prevention Day in Hindi)

सुसाइड रोकथाम दिवस - जिसका अर्थ है स्वयं को मारना या जानबूझ कर अपनी मृत्यु का कारण बनने के लिए कार्य करना है। सुसाइड अक्सर निराशा के चलते की जाती है, सुसाइड के लिए तनाव Depression (अवसाद), द्विध्रुवीय विकार, मादक पदार्थ/शराब की लत या मानसिक विकार को जिम्मेदार ठहराया जाता है तनाव के कारण जैसे वित्तीय कठिनाई और संबंध में परेशानियों की भूमिका होती है। आत्महत्या को रोकने के प्रयासों में आग्नेयास्त्रों तक पहुँच को सीमित करना होता है, मानसिक कारण/बीमारी/विकार का उपचार करना तथा नशीली दवाओं के उपयोग को रोकने तथा आर्थिक विकास को बेहतर करना शामिल होता है।

सुसाइड रोकथाम दिवस (Suicide Prevention Day in Hindi) :

सुसाइड करने के लिए उपयोग की जाने वाली सबसे आम विधि भिन्न-भिन्न होती है और आंशिक रूप से होती है। आम विधियों में शामिल होती हैं  जैसे लटकना, कीटनाशक, ज़हर पीना, बंदूक द्वारा स्वयं को गोली मारना लगभग 8,00,000 से 10,00,000 लोग हर वर्ष आत्महत्या करते हैं, जिसके कारण से ये दुनिया के 10 वें नम्बर का सुसाइड के कारण होते हैं। पुरुषों से महिलाओं में सुसाइड की दर अधिक रहती है, पुरुषों में महिलाओं की तुलना में आत्महत्या के होने का संभावना 3-4 गुना तक अधिक होती है। अनुमानित तौर पर प्रत्येक वर्ष 10-20 मिलियन गैर, घातक सुसाइड

के प्रयास होते हैं युवाओं तथा महिलाओं में आत्महत्या के प्रयास बहुत आम बात हो गयी है।

सुसाइड करना या सुसाइड का प्रयास करना, पहले आपराधिक रूप से दण्डनीय था किन्तु पश्चिमी देशों में ऐसा नहीं है। बहुत से मुस्लिम देशों में सुसाइड आज भी दण्डनीय अपराध है। 20 वीं और 21वीं शताब्दी में आत्मदाह के रूप में सुसाइड विरोध का एक तरीका है

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आत्महत्या क्या है? (What is Suicide in Hindi) :

आत्महत्या या जिसे हम पूर्ण आत्महत्या भी कह सकते हैं यह अपने जीवन को स्वयं समाप्त करने की क्रिया है आत्महत्या का प्रयास या गैर और घातक आत्महत्या व्यवहार स्वयं को घायल करना होता है जिसके साथ अपने जीवन को समाप्त करने की इच्छा शामिल हो जाती है आत्महत्या के प्रयास में मृत्यु नहीं होती सहायीत आत्महत्या वह होती है जब एक व्यक्ति किसी दूसरे को उसकी आत्महत्या के लिए प्रेरित करता है या सहायता करता है। यह इच्छामृत्यु से विपरीत होती है जहां व्यक्ति किसी व्यक्ति की मृत्यु की इच्छा को पूरा करने के लिए अधिक सक्रिय भूमिका निभाता है। आत्महत्या की सोच रखना अपने जीवन को समाप्त करने के बारे में विचार करना है।

International Association for Suicide Prevention (IASP) द्वारा हर वर्ष 10 सितम्बर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया जाता है। इस दिवस

को मनाने का उद्देश्य लोगों को सुसाइड रोकथाम के प्रति जागरूक करना है। यह दिवस आत्महत्या को रोकने के लिए मनाया जाता है।

भारत में आत्महत्या की दर (Suicide Rate in India in Hindi) :

2016 से भारत में आत्महत्या करने की संख्या में 230,314 तक की वृद्धि हुई है। आत्महत्या करने वालों में 15 से 19 वर्ष और 19 से 35 वर्ष की उम्र के बीच मृत्यु दर काफी ज्यादा रहती है।

दुनिया भर में हर वर्ष लगभग 8 लाख लोग आत्महत्या करते है। इनमें से 1,35,000 (कुल का 17%) भारत की जनसंख्या आती है। जिसमें सबसे ज्यादा युवा वर्ग के लोग होते है।

2019 में तमिलनाडु (12.5%), महाराष्ट्र (11.9%), और पश्चिम बंगाल (11.0%) में आत्महत्या का उच्चतम अनुपात था। अधिक आबादी वाले राज्यों में तमिलनाडु और केरल में 2012 में प्रति 100,000 लोगों में आत्महत्या की दर सबसे अधिक थी। पुरुष और महिला की आत्महत्या का अनुपात करीब 2:1 रहा है।

भारत में आत्महत्या के कारण (Reasons for Suicide in India in Hindi) :

भारत में आत्महत्या करने के दो कारण है मानसिक विकार और दूसरा किसानों का कर्ज में डूबना होता है। 2019 में आत्महत्या करने की रिपोर्ट जारी की गयी थी जिसमें भारत के किसान की आत्महत्या की दर निरन्तर बढ़ती रही है इसका सबसे

बड़ा कारण किसानों द्वारा बैंकों से लिए गया ऋण/लोन समय पर न चुका पाने के कारण किसान सबसे ज्यादा आत्महत्या कर रहे है।

आत्महत्या करने के लक्षण (Symptoms of Suicide in Hindi) :

  • व्यक्ति का यह सोचना की लोग कैसे आत्महत्या कर लेते है
  • क्या मेरे मर जाने के बाद लोग मुझे याद करेंगे/ कोई याद करेगा
  • मानसिक तनाव के कारण
  • परिवार/घर के लोगों से अलग रहना
  • Mobile (मोबाइल), Social Media (सोशल मीडिया) से दूर रहने पर
  • लोगों के सम्पर्क से दूर रहने के कारण
  • जीने की इच्छा नहीं होना
  • भविष्य/जीवन के आगे के रास्ते नहीं दिख पाने के कारण
  • शराब/मादक पदार्थ के अधिक उपयोग के कारण

आत्महत्या करने के कारण (Reasons for Committing Suicide in Hindi) :

  • आत्महत्या करने के कुछ मुख्य कारण होते हैं -
    • मनोवैज्ञानिक कारण
    • सामाजिक दबाव
    • घरेलू कलह
    • अच्छा वैवाहिक संबंध का न होना
    • गरीबी और मध्यम परिवार का होना

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आत्महत्या की रोकथाम (Suicide Prevention in Hindi) :

  • किसी दोस्त या परिजन से बात करना
  • स्वयं को व्यस्त रखना
  • गलत विचारों को मन में ना लाना
  • अकेले बिल्कुल न रहना
  • Therapy (थेरेपी) और उपचार समय पर लेना
  • खतरे के संकेतों का ध्यान रखना

तनाव, गुस्सा दूर कर मन को शांत कैसे रखें :

  • ध्यान करना – गुस्से पर नियंत्रण के लिए सबसे प्रभावी योग होता है ध्यान करना। उसके लिए आरामदेह आसन पर बैठें आंखें बंद करके गहरी सांस लें।
  • पंचिंग – गुस्से को कम करने के लिए पंचिंग बैग का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • रस्सी कूदना – रस्सी कूदना तनाव दूर करने का अच्छा तरीका होता है। जिससे हृदय स्वस्थ रहता है और रक्त प्रवाह भी बेहतर रहता है।
  • मौन साधना – मौन साधना गुस्से को शांत करने के लिए अच्छा उपाय होता है।
  • सर्वांगासन – सर्वांगासन गुस्से को नियंत्रित करने के लिए एक बेहतर आसन होता है।