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दसवें भाव में सूर्य का फल | स्वास्थ्य, करियर और धन

दशम भाव में सूर्य के जातक को पुत्रों का सुख प्राप्त होता है। और वह जिस काम को हाथ में लेता है उसमें सफलता मिलती है एव दसवें भाव में सूर्य के जातक परिश्रम से सहसा कार्यसिद्धि, राजा की कृपा तथा अतुलकीर्ति का लाभ होता है और जातक पूर्ण विद्वान् होने के कारण प्रसिद्धि पाता है।

दसवें भाव में सूर्य का फल

दसवें भाव में सूर्य का शुभ फल (Positive Results of Sun in 10th House in Hindi)

  • दसवें भाव में सूर्य (Sun in 10th House) होने से जातक प्रतापी, व्यवसाय कुशल, राजमान्य, लब्ध-प्रतिष्ठ, राजमन्त्री, उदार, ऐश्वर्यसम्पन्न, लोकमान्य एवं सुखी होता है।
  • दशम भाव में सूर्य के जातक का आचरण शुद्ध, दृढ़चित्त, विद्वान्, यशस्वी, तथा बहुगुणी होता है। जातक भाग्यवान् होता है। व्यापार व्यवसाय से अथवा स्वतंत्र रूप से अपनी जीविका का अर्जन करता है।
  • जातक सर्वथा श्रेष्ठ मणियों तथा आभूषणों, वाहनादि से सम्पन्न होता है। जातक को पिता का पूरा सुख मिलता है।
  • जातक राज्य सेवा में है तो अपने विभाग का या कार्यालय का प्रमुख हुआ करता है। जातक राज्य संपर्क से लाभ प्राप्त करता है।
  • दसवें भाव में सूर्य के जातक परिश्रम से सहसा कार्यसिद्धि, राजा की कृपा तथा अतुलकीर्ति का लाभ होता है।
  • जातक शुभकर्मों की ओर प्रेरित
    करनेवाली बुद्धि से युक्त होता है। पुत्रों का सुख प्राप्त होता है। जिस काम को हाथ में लेता है उसमें सफलता मिलती है।
  • दशम भाव में सूर्य के जातक साधुस्वभाव सज्जनों पर उपकार करता है। पूर्ण विद्वान् होने के कारण प्रसिद्धि पाता है। वृष, कन्या, मकर, मीन या मिथुन में होने से जातक उच्चाधिकारी होता है।
  • जातक संसद या विधानसभा में स्थान प्राप्ति होती है। राज्यपाल, या राष्ट्रपति का सलाहकार होता है। 

दसवें भाव में सूर्य का अशुभ फल (Negative Results of Sun in 10th House in Hindi)

  • दसवें भाव में सूर्य (Sun in 10th House) के जातक तेजस्वी नहीं होता है। जातक के
    केश अच्छे नहीं होते हैं। जातक का आचरण अच्छा नहीं होता है। स्त्री चंचल स्वभाव की होती है।
  • दशम भाव का सूर्य व्यक्ति को भाई-बांधवों से वियुक्त करता है। मां को पीड़ा पहुंचाता है। माता को कई प्रकार के रोग होते हैं इससे इसे कष्ट होता है।
  • दसवें भाव में सूर्य के जातक मित्र-स्त्री-आदि प्रियजनों से वियोग होता है। इसलिए चित में ग्लानि रहती है। जैसे सूर्य शनै:-शनै: तीक्ष्ण किरण तथा अत्यन्त तेजस्वी होकर मध्यादृन के अनन्तर पतनोन्मुख होता हुआ सन्ध्या समय तेजोहीन होकर अस्त हो जाता है।
  • दसवें भाव में सूर्य के प्रभाव में उत्पन्न जातक भी शनै:-शनै: वृद्धिक्रम से उन्नति पाते हुए शिखर
    चुम्बी उन्नति करते हैं परनतु अन्तिम वय अच्छा नहीं रहता, अन्त में रोगग्रस्त होते हैं-धनाल्पता से कष्ट पाते हैं। बान्धवों से कलह स्त्री-पुत्रादि से वैमनस्य आदि दु:ख अनुभव में आते हैं।
  • दशम भाव का सूर्य पापीग्रह की राशि में अथवा पापग्रह के साथ युति में अथवा किसी पापग्रह की दृष्टि होने से जातक के कामों में अड़चनें आती हैं।
  • जातक का आचार-विचार शुद्ध तथा पवित्र नहीं होता है। पापी तथा दुष्टकर्म कर्ता होता है।

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