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तीसरे भाव में सूर्य का फल | स्वास्थ्य, करियर और धन

तीसरे भाव में सूर्य होने से जातक विख्यात, नीरोग, सुशील, बुद्धिमान्, क्रोधहीन, मधुरभाषी, दयालु और धनी होता है। तृतीय भाव में सूर्य होने से जातक स्थिर और निश्चयी, विज्ञान और कला का प्रेमी, निवास स्थान क्वचित् ही बदलने वाला होता है।

तीसरे भाव में सूर्य का फल

तीसरे भाव में सूर्य का शुभ फल (Positive Results of Sun in 3rd House in Hindi)

  • तृतीय भाव में सूर्य (Sun in 3rd House) होने से जातक विख्यात, नीरोग, सुशील, बुद्धिमान्, क्रोधहीन, मधुरभाषी, दयालु और भूपति होता है।
  • स्थिर और निश्चयी, विज्ञान और कला का प्रेमी, निवास स्थान क्वचित् ही बदलने वाला होता है।
  • तीसरे स्थान में स्थित सूर्य के प्रभाव से जातक प्रतापी तथा प्रबल पराक्रमी होता है। प्रताप से शत्रु हतप्रभ बने रहते हैं। विवाद में सदा विजय मिलती है। युद्ध में सर्वदा शत्रुओं का नाश होता है। शरीरिक शक्तिसम्पन्न, बलवान्, शूर और श्रीयुक्त होता है।
  • सूर्य तीसरे भाव में व्यक्ति को मीठा बोलने वाला, सर्वजनप्रिय, आकर्षक और विद्वान बनाता है। राज्यमान्य, राजा से सुख प्राप्त करने वाला कवि, लब्ध प्रतिष्ठ एवं बलवान होता है।
  • तीसरे घर में सूर्य बैठे हो तो व्यक्ति धनवान्, धैर्यवान तथा दूसरों का उत्कर्ष देखकर प्रसन्न होने वाला होता है।
  • परदेश भ्रमण तथा तीर्थयात्रा करता है। चित शुभ कामों की ओर आकृष्ट होता है।
  • अपने प्रिय जनों का हित चाहने वाला होता है। स्त्रीसुख तथा पुत्रसुख मिलता है। सुन्दर स्त्रियों का तथा अपने धन का उपभोग करनेवाला होता है।
  • दुर्जनों से सेवा ग्रहण करनेवाला, धनाढ़य, धनसम्पन्न तथा त्यागी, दानशूर होता है। वाहनसुख प्राप्त होता है तथा नौकरों से युक्त होता है।
  • छोटे-भाई थोड़े होते हैं। दो भाई होते हैं। किसी शुभग्रह की युति हो तो भाइयों की बढ़ोत्री होती है। स्त्रीराशि का रवि हो तो भाई-बहिन होते हैं।
  • संपत्ति की दृष्टि से फल अच्छे मिलते हैं। मनुष्य धन-वाहन सम्पन्न होता है। यह रवि संतति के लिए भी अच्छा है ।

तीसरे भाव में सूर्य का अशुभ फल (Negative Results of Sun in 3rd House in Hindi)

  • तृतीय भाव में सूर्य (Sun in 3rd House) होने से छोटे भाई संख्या में थोड़े होते हैं या बन्धुहीन होता है। बड़े भाई की मृत्यु होती है।
  • तृतीय भाव में स्थित सूर्य भाई-बन्धुओं से हानि कराता है। सगे भाइयों से दु:ख प्राप्त होता है।
  • तृतीय में रवि होने से जातक को भाई के साथ नहीं रहना चाहिए अन्यथा एक दूसरे के भाग्योदय में कई एक विघ्न उपस्थित होंगे।
  • अपने भाई बांधवों का नाश होता है। अपने पक्ष के लोगों का शत्रु होता है अर्थात् अपने भाई-बन्धुओं के साथ इसका बर्ताव शत्रु जैसा होता है।
  • सूर्य के तीसरे भाव में होने से जातक के हाथ में चोट वगैरह लग सकती हैं।
  • चौथे, पंचम में, आठवें वा बारहवें वर्ष कुछ पीड़ा होती है। स्त्रीराशि का रवि होने से विभाजन सम्बन्धी झगड़े कोर्ट में चलते हैं।