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सातवें भाव में सूर्य का फल | स्वास्थ्य, करियर और धन | Sun in Seventh House in Hindi

सातवें भाव में सूर्य के प्रभाव में आए हुए जातक की पत्नी सुन्दर, प्रभावशलिनी, व्यवहार और बर्ताव में अच्छी आपत्ति के समय पति का साथ देने वाली, अतिथि सत्कार करने वाली, दयालु तथा नौकरों से अच्छा काम निकाल लेने वाली होती है।

सातवें भाव में सूर्य का फल

सातवें भाव में सूर्य का शुभ फल (Positive Results of Surya in 7th House in Astrology)

  • सातवें भाव में सूर्य (Surya in 7th House) होने से जातिका तो बहुत लम्बी होती है और ही छोटी होती
    है। उदर और देह एक बराबर होते हैं। इसका रूपरंग और आँखें कपिल होती हैं। इसके केश पीले होते हैं।
  • सातवें भाव में सूर्य होने से जातिका विनोदी अर्थात् मज़ाकिया स्वभाव की होती है। पति सुख का होना सप्तम भावस्थ सूर्य का शुभफल है। सूर्य पतिपत्नी का सौमनस्य कायम रखता है।
  • सप्तम रवि प्रभाव में आए हुए जातिका का पति सुन्दर, प्रभावशलिनी, व्यवहार और बर्ताव में अच्छी आपत्ति के समय पति का साथ देने वाली, अतिथि सत्कार करने वाली, दयालु तथा नौकरों से अच्छा काम निकाल
    लेने वाली होती है। पति धन-प्रिय होता है और रुपए पैसे पर अपना स्वत्व रखने वाली होती है।
  • जातिका के लिए पति ही सर्वस्व होता है वह अपने अस्तित्व को खो बैठती है और पति में अपना विलय कर देती है। जातिका को पुरूष का भोग-उपभोग मिलता है।

सातवें भाव में सूर्य का अशुभ फल (Negative Results of Surya in 7th House in Astrology)

  • सातवें भाव में सूर्य (Surya in 7th House) होने से शरीर से दर्शनीय नहीं होती है। अत्यन्त क्रोधी और खल अर्थात् दुर्जन होती है।

    अस्थिर स्वभाव की होती है। मन में सर्वदा लोगों का डाह रहने से सुख से नीद भी नहीं आती है।
  • सातवें स्थान मे सूर्य होने से जातिका पुरूष राजकुल के व्यक्तियों से पीडि़त रहती है। जातिका के प्रेमपात्र दुष्ट लोग होते हैं। जातिका को पुत्रसुख थोड़ा मिलता है। जातिका शारीरिक और मानसिक व्याधियों से ग्रस्त रहती है। गुप्तरोगों से दु:खी रहती है-अर्थात् इसे उपदेश, प्रमेह आदि रोग होते हैं। जातिका सुखी नहीं होती है।

  • सप्तमभाव में सूर्य होने से जातिका, लक्ष्मी से वंचित रहती है, अर्थात् निर्धन होती है।

    25 वें वर्ष परदेशगमन होता है। व्यापार में हानि होती है। धन कमाने का यत्न करे तो भी प्रचुरमात्रा में धनप्राप्त नहीं होता है। पैदल चलती है क्योंकि इसे सवारी का सुख नहीं होता है।
  • सप्तमभाव में सूर्य दाम्पत्य सुख का बाधक है, पतिपत्नी में अनबन रहती है। परूषों से वैमनस्य रहता है, परूषों से तिरस्कार और अनादर प्राप्त होता है।