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| On 3 years ago

The role of teacher in the present society.

वर्तमान समाज मे शिक्षक की भूमिका।

“गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वर, गुरु साक्षात् परमं ब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नम:||”

"ईश्वर सत्य है, सत्य ही शिव है एवम शिव ही सुंदर है"! सत्यम्, शिवम्, सुन्दरम् के तीन स्तम्भ ही इस सम्पूर्ण जगत के आधार है एवम इसे पूर्णता प्रदान करते है "गुरु" चौथे स्तम्भ के रूप में। ज्ञान रूपी प्रकाश ही माया के अँधेरे पथ को रोशन करता है एवम बिन गुरु ज्ञान प्राप्त करना असम्भव हैं।

"गुरु गोविंद दोउ खड़े, काके लागु पाय।

बलिहारी गुरु आपकी, गोविंद दियो बताया।"

गोविन्द स्वयम् पर गुरु को अधिमान प्रदान करते है एवम एक शिष्य की जिज्ञासा का शमन करते हैं। सम्पूर्ण चराचर जगत में ज्ञान व्याप्त है परन्तु ज्ञान प्राप्ति की राह को गुरु अपने अनुभव से आसान कर देते हैं। ज्ञान की प्राप्ति चरणबद्ध योजना से ही सम्भव है एवम इसका प्रारूपकार गुरु से बेहतर कोई नहीं हो सकता।

भारतीय सभ्यता में गुरु को असीम सम्मान हासिल है एवम गुरु-शिष्य प्रेम की अनेकानेक महागाथाएं उपलब्ध है। श्री कृष्ण जगतगुरु के रूप में मान्य है एवम अपने प्रिय शिष्य को राह दिखाने हेतु जब संवाद करते है तो विश्व के सर्वोच्च ज्ञान ग्रन्थ "भगवदगीता" का प्राकट्य सम्भव होता हैं।

आज के इस सुचना विस्फोट के दौर में प्रत्येक जानकारी पलक झपकते ही प्राप्त हो जाती

है, पुस्तको का सार सहज उपलब्ध है परन्तु ज्ञान लुप्त होता जा रहा हैं। जीवन अनेकानेक सुविधाओं के उपरान्त भी असहज, संसाधनो की प्रचुरता के उपरान्त भी रीता व उपलब्धियों के उपरान्त भी व्याकुल परिलक्षित हो रहा हैं।

जीवन आनंद का एक मार्ग है, प्रत्येक अवस्था एक उत्सव है एवम संसार सुखद संवादों का एक मंच है। इसकी प्राप्ति हेतु उचित शिक्षा व मार्ग दिखलाना गुरु का धर्म हैं। आज गुरुपद के महान पद पर शिक्षक आसीन है।

आज सम्पूर्ण विश्व में विद्यार्थियों को अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। दूषित शिक्षा प्रणाली में मात्र मात्र मौद्रिक सफलता ही एकमात्र मानदण्ड बन रहा है। विद्यालय, अभिभावक व समाज मात्र "पैकेज" को ही सफलता का पैमाना मानने लगे है। ऐसे काल मे शिक्षक की भूमिका व दायित्व बहुत बढ़ गया है।

समय आ गया है कि शिक्षक चाणक्य के उस कथन को सार्थक करे जिसमे उन्होंने घोषणा की थी कि " शिक्षक सामान्य नही होता, सृजन व विप्लव उसकी गोद मे पलते है"। आज शिक्षक को अपनी भूमिका को स्वीकार करके स्वस्थ समाज निर्माण हेतु आगे आना ही होगा।

शिक्षक दिवस पर हम सभी गुरुजनो, आचार्यो एवम शिक्षको के समक्ष नतमस्तक होकर उनके द्वारा प्रदत्त स्नेह व ज्ञान हेतु उनका आभार व्यक्त करते है एवम भारतमाता की सेवा का प्रण लेते है।