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आज की आवाज (Today's Voice in Hindi)

आज की आवाज (Today's Voice in Hindi)

जोधपुर 2 अप्रैल। आज का दिन बड़ा शुभ है क्योंकि आज हमेशा ही शुभ है। कल क्योकि बीत गया तथा कल अनिश्चित है। अतः आज सर्वश्रेष्ठ है क्योंकि आपके समक्ष है व निश्चित है। आज तो सोने पर सुहागा है क्योकि आज राम नवमी का दिन है।

आज की आवाज

"आज की आवाज" में आप सभी से एक बात शेयर करनी है। आप से निवेदन है कि आज के इस आलेख को सामान्य दृष्टि लेकर ही पढ़िए। यह लेख बिल्कुल ही सीधा सा है व बस भावनाओं से लबरेज है।

आज से बहुत वर्ष पहले जब शिक्षा जगत में "लोक जुम्बिश" का बड़ा बोलबाला था तब लोक जुम्बिश के

एक प्रशिक्षण में भाग लेने का अवसर मिला। उस प्रशिक्षण में शिक्षकों व अधिकारियों द्वारा शैक्षिक परिचर्चा के बीच कुछ वातावरण निर्माण के लिए सत्र भी होते थे।

एक दिन ऐसी ही किसी सत्र के मध्य एक शिक्षाविद ने प्रश्न खड़ा किया कि आप मे से कितने लोगों को अवसाद, हाइपरटेंशन, अनिद्रा, उदासी, चिड़चिड़ापन, भवरोग, बेचैनी, चिंता, विचलन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है? लोगो ने पहले रुक रुक कर व बाद में समवेत स्वर लगभग सभी ने हाथ खड़े कर दिए।

इस पर उन्होंने मुस्कुरा कर पूछा कि अगर किसी को मेडिकल जगत की जानकारी हो तो वह हाथ खड़ा करके यह बतादे की इन सबका प्राथमिक इलाज क्या है। सिर्फ एक

ही इलाज या एक ही बचाव का तरीका बता देवे। इसके पश्चात एक व्यक्ति ने अधिकार पूर्वक कहा कि " वैसे तो सभी अलग विकार है लेकिन मैं आयुर्वेद का शिक्षार्थी हूँ, एक ही इलाज या बचाव यह है कि ; अगर व्यक्ति सात-आठ घण्टे की गहरी नींद रोजाना ले लेवे, तो इन समस्याओं से काफी हद तक छुटकारा मिल सकेगा"।

अब उन महाशय ने वापस मोर्चा संभाल लिया तथा कहने लगे कि " आप सत्य के काफी निकट हो, मैं रोजाना रात्रि में 9 बजे तक अपने समस्त कार्य पूर्ण करके साढ़े 9 बजे शयनकक्ष में जाकर सो जाता हूँ। एक गहरी नींद के बाद सुबह पांच बजे एकदम तरोताजा जगता हूँ। पहले वर्णित समस्त बीमारियों/समस्याओं से पूर्णतया दूर हुँ।

सभी ने जब उनसे यह पूछा कि वो एक दम समय पर तथा गहरी नींद कैसे प्राप्त करते है? इसका क्या राज है? इसका क्या उपाय है? तब उन्होंने सबको वह राज बताया, जो आज आपके सामने प्रस्तुत है। उन्होंने कहा कि मैं रोजाना रात्रि सोने के वक्त आंख मूंद कर रामायण की इस चौपाई को विश्वास से कुछ बार मन मे दोहरा लेता हूँ। इसको दोहराने से पूर्व श्री राम, श्री राम परिवार, उनके महान भक्तों व रचयिता तुलसीदास जी को भी स्मरण कर लेता हूँ।

"तुलसी भरोसे राम के, निर्भय हो के सोए!
अनहोनी होनी नही, होनी हो सो होए !!"

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आप सभी ऐसा कीजिये व आनंद से जीवन व्यतीत कीजिये। आप सभी ने तो इसको सुना ही होगा। आप मे से अधिकांश ने रामायण का पाठ भी किया होगा। लेकिन यह ज्ञान मुझे बड़ी देर से मिला। क्योकि -----
(क्रमशः)