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तुलसी के फायदे (Tulsi Benefits in Hindi)

तुलसी के फायदे - तुलसी का रासायनिक नाम Ocimum Sanctum है, और तुलसी का अंग्रेजी नाम Basil है। तुलसी एक द्विबीजपत्री तथा शाकीय, औषधीय पौधा होता है। तुलसी का पौधा हिन्दू धर्म में बहुत पवित्र माना जाता है। तुलसी को घर और आँगन तथा दरवाजे पर या बाग-बगीचे में लगाते हैं। भारतीय संस्कृति के चिर पुरातन ग्रंथ वेदों में तुलसी के गुणों एवं उपयोगिता का ढ़ेर सारा वर्णन मिलता है। इसके अतिरिक्त तुलसी का उपयोग ऐलोपैथी, होमियोपैथी और यूनानी दवाओं में किसी न किसी रूप में प्रयोग किया जाता रहा है।

भारत में तुलसी के पौधे की पूजा की जाती है। पुराने ऋषियों-मुनियों को लाखों वर्ष पूर्व तुलसी के औषधीय गुणों का ज्ञान हो चूका था, इसलिए तुलसी को दैनिक जीवन में प्रयोग हेतु प्रमुखता से उच्च स्थान दिया गया है। आयुर्वेद में भी तुलसी के फायदों-लाभों का विस्तृत उल्लेख मिलता है। 

तुलसी का पौधा (क्षुप) झाड़ीके रूप में होता है। यह 01 से 03 फुट तक ऊँचा होता है। इसकी पत्तियाँ बैंगनी आभा वाली हल्के रोएँ से ढकी होती हैं। ये पत्तियाँ 01 से 02 इंच तक लम्बी और सुगंधित तथा अंडाकार/आयताकार होती हैं। पुष्प मंजरी कोमल और 08 इंच लम्बी और बहुरंगी छटा वाली होती है। उस पर बैंगनी और गुलाबी आभा वाले छोटे हृदया-कार पुष्प चक्रों के जैसे लगते हैं।

इसके बीज चपटे पीतवर्ण के छोटे काले चिह्नों से युक्त अंडाकार होते हैं। तुलसी के नए पौधे मुख्य रूप से वर्षा ऋतु में उगते हैं, और शीत-काल तक फूलते हैं। इसका पौधा सामान्य रूप से 02-03 वर्षों तक हरा-भरा रहता है। उसके बाद इसके

पौधे की वृद्धावस्था आ जाती है।इसके पत्ते कम और छोटे हो जाते हैं, और शाखाएँ सूख जाती हैं।
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तुलसी क्या है? (What is Tulsi Benefits in Hindi) :

(Tulsi benefits in hindi) तुलसी का पौधा एक औषधीय पौधा होता है। जिसमें Vitamin (विटामिन) और खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसको सभी रोगों को दूर करने तथा शारीरिक शक्ति बढ़ाने वाले गुणों से भर-पूर इसके पौधे को औषधीय पौधे की प्रत्यक्ष देवी कहा गया है, क्योंकि तुलसी के पौधे से ज्यादा उपयोगी औषधि मनुष्य जाति के लिए और कोई दूसरी नहीं है। तुलसी के धार्मिक महत्व के कारण घर-आगंन में इसके पौधे लगाए जाते हैं। तुलसी की कई प्रजातियां होती हैं। जिसमें श्वेत व कृष्ण प्रमुख हैं। जिसे राम तुलसी और कृष्ण तुलसी भी कहा जाता है।

चरक संहिता और सुश्रुत-संहिता में तुलसी के गुणों के बारे में विस्तार से वर्णन मिलता है। तुलसी का पौधा सामान्यतौर पर 30-60 से.मी. तक ऊँचा होता है, तथा इसके फूल छोटे सफेद और बैगनी रंग के होते हैं। इसका पुष्पकाल एवं फलकाल जुलाई-अक्टूबर माह तक होता है।

तुलसी की प्रजातियाँ (Basil Species in Hindi) :

तुलसी की सामान्यतौर पर निम्न प्रजातियाँ पाई जाती हैं-

  • ऑसीमम सैक्टम।
  • ऑसीमम वेसिलिकम (मरुआ तुलसी) मुन्जरिकी/मुरसा।
  • ऑसीमम वेसिलिकम मिनिमम।
  • ऑसीमम ग्रेटिसिकम (राम तुलसी/वन तुलसी/अरण्य तुलसी।
  • ऑसीमम किलिमण्डचेरिकम (कर्पूर तुलसी)।
  • ऑसीमम अमेरिकम (काली तुलसी) गम्भीरा/मामरी।
  • ऑसीमम विरिडी।

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तुलसी में पाए जाने वाले पोषक तत्व (Nutrients Found in Basil in Hindi) :

(Tulsi benefits in hindi ) तुलसी की पत्तियां Vitamin (विटामिन) और खनिज का भंडार होती हैं। इसमें मुख्य रुप से Vitamin C (विटामिन सी), Calcium (कैल्शियम), Zink (जिंक), Iron (आयरन) और Chlorophyll (क्लोरोफिल) पाया जाता है। इसके अलावा तुलसी में Sitrik (सिट्रिक), Tartaric (टारटरिक) एवं Malic Acid (मैलिक एसिड) पाया जाता है।

तुलसी के फायदे एवं उपयोग (Tulsi Benefits and Uses in Hindi) :

तुलसी की पत्तियां औषधीय प्रयोग की दृष्टि से गुणकारी मानी जाती हैं। इनको सीधे पौधे से लेकर भी खा सकते हैं। पत्तों की तरह तुलसी के बीज भी फायदेमंद होते हैं। तुलसी के बीज और पत्तियों का चूर्ण भी प्रयोग किया जाता है, क्योंकि इन पत्तियों में कफ वात दोष को कम करने तथा पाचनशक्ति और भूख बढ़ाने व रक्त को शुद्ध करने वाले जैसे गुण होते हैं। इनके अलावा तुलसी के पत्ते के फायदे बहुत फायदेमंद हैं। तुलसी के औषधीय गुणों में राम तुलसी की अपेक्षा में श्याम तुलसी को प्रमुख माना गया है।

  1. यह दिमाग के लिए फायदेमंद साबित होती है।
  2. सरदर्द में आराम दिलाती है।
  3. भूख कम लगने में।
  4. गैस की समस्या में।
  5. किडनी से जुड़ी परेशानियों में उपयोगी।
  6. सिर के जूँ और लीख से छुटकारा दिलाती है।
  7. रतौंधी में लाभकारी होती है।
  8. साइनसाइटिस/पीनसरोग को रोकने में लाभदायक होती है।
  9. कान के दर्द और कान की सूजन में फायदेमंद होती है।
  10. दाँत के दर्द से आराम दिलाती है।
  11. तनाव दूर करने लिए उपयोगी।
  12. गले से जुड़ी समस्याओं में राहत दिलाती है।
  13. खांसी में आराम दिलाती है।
  14. सूखी खांसी और दमा रोग से छुटकारा दिलाती है।
  15. डायरिया और पेट की मरोड़ में लाभकारी होती है।
  16. अपच से आराम दिलाती है।
  17. मूत्र/पेशाब में जलन से आराम।
  18. पीलिया रोग में लाभदायक होती है।
  19. पथरी दूर करने में फायदेमंद है।
  20. प्रसव के बाद होने वाले दर्द से आराम दिलाती है।
  21. नपुंसकता में लाभकारी होती है।
  22. कुष्ठ रोग में गुणकारी।
  23. त्वचा रोग में फायदेमंद होती है।
  24. सफ़ेद दाग दूर करने में उपयोगी होती है।
  25. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार होती है।
  26. मलेरिया में फायदेमंद होती है।
  27. टाइफाइड में उपयोगी होती है।
  28. बुखार से आराम दिलाती है।
  29. दाद और खाज-खुजली में तुलसी के अर्क से लाभ मिलता है।
  30. मासिक धर्म की अनियमितता में तुलसी के बीज से फायदे मिलते हैं।
  31. साँसों की दुर्गंध दूर करने में उपयोगी।
  32. चोट लगने पर उपयोग में ली जाती है।
  33. चेहरे पर निखार लेन के लिए फायदेमंद होती है।
  34. सांप काटने पर तुलसी का उपयोग किया जाता है।
  35. यादाश्त को बढ़ाती है।
  36. चिंता दूर करने में सहायक होती है।
  37. आँखों के लिए (आँख आना )उपयोगी।
  38. डायबिटीज/मधुमेह पर नियंत्रण रखती है।
  39. ब्लडप्रेशर को कम करने में मददगार होती है।

तुलसी के सेवन का तरीका (How to Take Tulsi in Hindi) :

तुलसी के पौधे का हर भाग गुणकारी होता है। उपयोग के लिहाज से तुलसी की पत्तियों का इस्तेमाल अधिक किया जाता है, किन्तु आयुर्वेद में तुलसी के बीजों और तुलसी के फूलों के फायदे के बारे में भी बताया गया है। तुलसी की पत्तियों को सीधे चबाकर

भी खाया जा सकता है, या इन्हें चाय में डालकर उबालकर इसका सेवन किया जा सकता है। बाजारों में तुलसी स्वरस, तुलसी चूर्ण, तुलसी कैप्सूल और तुलसी क्वाथ और तुलसी अर्क उपलब्ध होते हैं। इन्हें सुविधानुसार उपयोग कर सकते हैं।तुलसी की कुछ पत्तियों का सेवन स्वास्थ्य के लिए गुणकारी होती है, लेकिन इसे औषधि के रुप में इस्तेमाल कर रहे हैं तो इसकी खुराक का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
  • तुलसी की सामान्य खुराक -
    • चूर्ण - 01-03 ग्राम।
    • स्वरस - 05-10 मिली।
    • सान्द्र सत् - 0.5-01 ग्राम।
    • अर्क - 0.5-01 ग्राम।
    • क्वाथ चूर्ण - 02 ग्राम।
  • चिकित्सक के परामर्श अनुसार उपयोग करें।

तुलसी के नुकसान (Tulsi Side Effects in Hindi) :

  • ब्लड शुगर लेवल कम होने का खतरा रहता है।
  • सीमित मात्रा में प्रयोग करनी चाहिए।
  • अधिक मात्रा में सेवन करने से पेट में तीव्र जलन की समस्या हो सकती है।
  • नपुंसकता के इलाज के दौरान परहेज रखना चाहिए।
  • गर्भाशय में सिकुड़न हो सकती है।
  • स्तनपान के दौरान शिकायत हो सकती है।
  • सर्जरी के दौरान सेवन से परहेज करना चाहिए।