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Two rules: from which we get protection.

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दो नियम : जिसमें सुरक्षा पक्की होती है।

वर्तमान संकट के मद्देनजर दो नियम बहुत सार्थक है जिनको समझ कर हम घर मे रहने का अच्छा निर्णय आवश्यक रूप से कर लेंगे। ये दोनों बाते हम अच्छे से जानते है फिर भी एक बार पढ़ लेने में कोई दर्जा नही है।

पहली बात-

दावानल में बचने का एक ही उपाय है।

एक वृतांत के अनुसार विदुर ने अवसर देखकर युधिष्ठिर से पूछा, "वत्स, यदि जंगल में भीषण आग लग जाये, तो जंगल के कौन से जानवर सुरक्षित रहेंगे ?"

युधिष्ठिर ने उत्तर दिया, "तात, जंगल में आग लगने पर, स्वछंद और निर्भय घूमने वाले, शेर चीते, हाथी और सबसे तेज भागने वाले हिरण आदि सारे जानवर, जंगल की आग में जलकर राख हो जायेंगे। परन्तु बिलों में रहने वाले चूहे सुरक्षित रहेंगे। दावानल के शांत होने पर वो पुनः बिलों से बाहर निकल कर, शांतिपूर्ण जीवन व्यतीत करेगें.!

"वत्स युधिष्ठिर, तुम्हारे उत्तर से मैं निश्चिंत हुआ। मेरी समस्त चिंतायें दूर हुईं। जाओ, सुरक्षित रहो। यशस्वी भव। " विदुर ने आर्शीवाद दिया।

उपरोक्त कथा के क्रम में निवेदन है कि वर्तमान में जब सारी दुनिया कोरोना वायरस के चपेट में आ चुकी है तथा एक भयंकर अग्नि के समान फेल चुकी है तब जो लोग सरकार द्वारा घोषित लॉकडाउन की पूरी पालना करके आने वाले दिनों में घर मे रुके रहेंगे वो पूर्णतया सुरक्षित रहेंगे।

नियम 2

हम सभी ने बचपन मे लूडो या चौसर का खेल अवश्य खेला है। इस दिलचस्पी से फुल्ली लोडेड गेम में गोटिया चलाई जाती है तथा गोटियों को मारा जाता है लेकिन जो गोटी घर में हो अर्थात जहाँ हो वही रुक जाती है तो उसको मारा नही जा सकता।


अतः आज के हालात में चाल चलन से कही बेहतर है कि हम अपनी गोटियों को घर मे ही रोक लेवे ताकि वे सुरक्षित रह सके।

उपरोक्त हालात में होम क्वारेंटाइन, आइसोलेशन, लॉकडाउन, अनसोशिएल होने व निरन्तर हाथ धोने तथा मास्क को उपयोग में लाने से हमारी सुरक्षा बढ़ती है।

महाभारत की एक कथा।

आज का प्रेरक प्रसंग

कोरोना : घर मे रहे,सुरक्षित रहे

!! कोरोना से बचाव !!

महाभारत युद्ध में अपने पिता द्रोणाचार्य के धोखे से मारे जाने पर अश्वत्थामा बहुत क्रोधित हो गये।। उन्होंने पांडव सेना पर एक बहुत ही भयानक अस्त्र "नारायण अस्त्र" छोड़ दिया। इसका कोई भी प्रतिकार नहीं कर सकता था।यह जिन लोगों के हाथ में हथियार हो और लड़ने के लिए कोशिश करता दिखे उस पर अग्नि बरसाता था और तुरंत नष्ट कर देता था।

भगवान श्रीकृष्ण जी ने सेना को अपने अपने अस्त्र शस्त्र छोड़ कर, चुपचाप हाथ जोड़कर खड़े रहने का आदेश दिया। और कहा मन में युद्ध करने का विचार भी न लाएं, यह उन्हें भी पहचान कर नष्ट कर देता है। नारायण अस्त्र धीरे धीरे अपना समय समाप्त होने पर शांत हो गया। इस तरह पांडव सेना की रक्षा हो गयी।

इस कथा प्रसंग का औचित्य समझें

हर जगह लड़ाई सफल नहीं होती, प्रकृति के प्रकोप से बचने के लिए हमें भी कुछ समय के लिए सारे काम छोड़ कर, चुपचाप हाथ जोड़कर, मन में सुविचार रख कर एक जगह ठहर जाना चाहिए, तभी हम इसके कहर से बच पाएंगे।

कोरोना भी अपनी समयावधि पूरी करके शांत हो जाएगा।

भगवान श्रीकृष्ण जी का बताया हुआ उपाय भी व्यर्थ नहीं जाएगा ।