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| On 3 years ago

"बालिकाओं पर दरिंदगी के विरुद्ध" एक शिक्षक की कलम ने उगली आग। शिक्षक गोविन्द सिंह राव।

"बालिकाओं पर दरिंदगी के विरुद्ध एक शिक्षक की कलम से काव्यात्मक विरोध"

असुर जाति की औलादें,
इंसान में अब भी जिंदा है।
शैतानो की शैतानी भी ,
इंसानों से शर्मिंदा है ।

असुरो की बेटी अपनों से ,
सम्मान बडा़ ही पाती है
लेकिन इंसानी कुत्तों से।
बेटी ही नोंची जाती है ।

देख दरिंदो की करतूते ,
दुख असुरो को होता होगा।
आँखों मे अश्रु भर-भर कर,
खुद रावण भी रोता होगा ।

वो नादान कली है जिसकी ,
जुबां अभी तुतलाती है ।
पर गिद्धो की टोली उसको,
नोंच-नोंच कर खाती है ।

ऐसी करतूतों से हमको,
शर्म नहीं क्योंकर आती ।
क्यों नहीं भृकुटी तनती है,
फट जाती क्योंकर नहीं छाती ।

नारी की अस्मिता को,
अखण्ड यदि रखना होगा ,
तो इन गिद्धो का सर्वनाश ,
अब हमको करना होगा ।

गोविन्द सिंह राव
धुम्बडिया जिला जालोर
राजस्थान 343030

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  • उक्त काव्य रचना उन दरिंदो के प्रति मेरा आक्रोश है ।तथा समाज के हर वर्ग से मेरा यह आह्वान है कि मानव समाज में छिपे हुए उन भेडियो के विरुद्ध अभियान चलाया जाए जो इंसानियत को शर्मसार करते जा रहे है।
    आप से यह अनुरोध है कि उक्त रचना को ज्यादा से ज्यादा शेयर करे तथा अपने कमेण्ट से मुझे यह बाताने का कष्ट करे कि आपको यह रचना कैसी लगी ।ताकि मुझे आप के सुझावों से प्रेरणा और नई उर्जा मिल सके ।
    आपका साथी
    गोविन्द सिंह राव