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What is Samas (समास किसे कहते है)

भिन्न अर्थ रखने वाले दो शब्दों या पदों (पूर्वपद तथा उत्तरपद) के मेल से बना तीसरा नया शब्द या पद Samas या समस्त पद कहलाता है तथा वह प्रक्रिया जिसके द्वारा ‘समस्त पद’ बनता है, समास-प्रक्रिया कही जाती है।

  • Samas-प्रक्रिया में जिन दो शब्दों का मेल होता है, उनके अर्थ परस्पर भिन्न होते हैं तथा इन दोनों के योग से जो एक नया शब्द बनाते हैं; उसका अर्थ इन दोनों से भिन्न होता है।
  • जैसा ऊपर बताया गया है, समास-रचना दो शब्दों या दो पदों के बीच होती है तथा इसमें पहला पद ‘पूर्वपद तथा दूसरा पद उत्तर पद कहलाता है। ‘पूर्वपद’ तथा ‘उत्तरपद’ के संयोग से जो नया शब्द बनता है,उसे समस्तपद कहते हैं। Samas in Hindi निम्नलिखित उदाहरण देखिए-
पूर्वपदउत्तरपदसमस्तपद
देशभक्तदेशभक्त
नीलागगननीलगगन
राष्ट्रनायकराष्ट्रनायक
नरनारीनर-नारी
प्रतिअक्षप्रत्यक्ष
पंचआननपंचानन
कालीमिर्चकालीमिर्च
दहीबड़ादहीवड़ा
अष्टअध्यायीअष्टाध्यायी

समास की विशेषताएं

Samas की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं –

1. Samas में दो पदों का योग होता है।
2. दो पद मिलकर एक पद का रूप लेते है
3. दो पदों के बीच की विभक्ति का लोप हो जाता है।
4. दो पदों में जिस प्रकार कभी पहला पद प्रधान और कभी दूसरा पद प्रधान होता है। कभी दोनों पद प्रधान होते हैं।
5. संस्कृत में समास होने पर संधि अवश्य होती है, किंतु हिंदी में ऐसी विधि नहीं है।

Types Of Samas (समास के भेद )

हिंदी में समास के छ: भेद हैं :

(1) अव्ययीभाव समास (Avyayibhav Samas)

(2) तत्पुरुष समास (Tatpurush Samas)

(3) द्विगु समास (Dvigu Samas)

(4) द्वंद्व समास (Dvandva Samas)

(5) कर्मधारय समास (Karmadharaya Samas)

(6) बहुव्रीहि समास (Bahuvrihi Samas)

Avyayibhav Samas -

जिस समास का पहला पद कोई अव्यय (अविकारी शब्द) होता है, उस समास को अव्ययीभाव समास कहते हैं: जैसे- ‘यथासमय’ समस्तपद ‘यथा’ और ‘समय’ के योग से बना है। इसका पूर्वपद ‘यथा’ अव्यय है और इसका विग्रह होगा- ‘समय के अनुसार।

अव्ययीभाव समास के उदाहरण नीचे दिए गए हैं

आजन्म - जन्म पर्यन्त

यथावधि - अवधि के अनुसार

यथाक्रम - क्रम के अनुसार

बेकसूर -

Nidar (निडर) -

भरपेट - इसमें भर उपसर्ग है

यथाशीघ्र - इसमें यथा उपसर्ग है

यथासंभव - यथा

दिनोदिन - दिनों

अनुरूप - अनु

प्रतिदिन

हाथोहाथ

Tatpurush Samas -

इस समास में दूसरा पद (उत्तर पद / अंतिम पद) प्रधान होता है इसमें कर्ता और संबोधन कारक को छोड़कर शेष छ: कारक चिन्हों का प्रयोग होता है

जैसे - कर्म कारक, करण कारक, सम्प्रदान कारक, अपादान कारक, सम्बन्ध कारक, अधिकरण कारक

Vidyalaya (विद्यालय) - विद्या के लिए आलय

राजपुत्र - राजा का पुत्र

मुंहतोड़ - मुंह को तोड़ने वाला

  चिड़ीमार - चिड़िया को मारने वाला

Dvigu Samas (द्विगु समास)


द्विगु समास में पहला पद संख्यावाचक होता है विग्रह करने पर समूह का बोध होता है

Dvigu Samas Examples

यहाँ द्विगु समास के उदाहरण नीचे दिए गए हैं

त्रिलोक - तीनो लोकों का समाहार

नवरात्र - नौ रात्रियों का समूह

अठन्नी - आठ आनो का समूह

दुसूती - दो सुतों का समूह

पंचतत्व - पांच तत्वों का समूह

दोपहर - दूसरा पहर

नवग्रह - नौ ग्रहों का समूह

पंचवटी - पांच वृक्षों का समूह

चौराहा - चार रास्तों का समूह

अष्टाध्यायी - आठ अध्यायों का समूह

नवरत्न - नौ रतन

Dvandva Samas (द्वंद्व समास)

समें दोनों पद प्रधान होते हैं। विग्रह होने पर बीच में 'और' / 'या' का बोध होता है

पाप-पुण्य - पाप और पुण्य

सीता-राम - सीता या राम

ऊँच-नीच - ऊँच या नीच

खरा-खोटा - खरा या खोटा

अन्न-जल - अन्न या जल

Karmadharaya Samas (कर्मधारय समास)


इसमें समस्त पद सामान रूप से प्रधान होता है इसके लिंग, वचन भी सामान होते हैं इस समास में पहला पद विशेषण तथा दूसरा पद विशेष्य होता है विग्रह करने पर कोई नया शब्द नहीं बनता

कर्मधारय समास के उदाहरण नीचे दिए गए हैं

चन्द्रमुख - चन्द्रमा के सामान मुख वाला - विशेषता

दहीवड़ा - दही में डूबा हुआ बड़ा - विशेषता

गुरुदेव - गुरु रूपी देव - विशेषता

चरण कमल - कमल के समान चरण - विशेषता

नील गगन - नीला है जो असमान - विशेषता

Bahuvrihi Samas (बहुव्रीहि समास)


इस समास में कोई भी पद प्रधान न होकर अन्य पद प्रधान होता है विग्रह करने पर नया शब्द निकलता है पहला पद विशेषण नहीं होता है विग्रह करने पर समूह का बोध भी नहीं होता है

Bahuvrihi Samas Examples

बहुव्रीहि समास के उदाहरण नीचे दिए गए हैं

त्रिनेत्र - भगवान शिव

वीणापाणी - सरस्वती

श्वेताम्बर - सरस्वती

गजानन - भगवान गणेश

गिरधर - भगवान श्रीकृष्ण

चक्रपाणी - चक्र को धारण करने वाला (श्रीकृष्ण)

दशानन - दस सर है जिसके (रावण)

लम्बोदर - लम्बा पेट है जिसका (गणेश)

मुरलीधर - मुरली बजाने वाला (श्रीकृष्ण)

गिरिधर - गोवर्धन पर्वत को उठाने वाला (श्रीकृष्ण)