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| On 3 years ago

"कौन कहता है कि आसमाँ में सुराख हो नही सकता"

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"कौन कहता है कि आसमाँ में सुराख हो नही सकता" एक आदमी ने शुरू किए प्रयास और बदल दी मुक्कमल तस्वीर एक विद्यालय की।

कवि दुष्यंत के शेर को साकार करते हुए विषम परिस्थितियों के बावजूद एक अध्यापक साथी ने प्रयास किये और सबका सहयोग लेकर एक सामान्य से विद्यालय को एक अत्यंत विशिष्ट स्कूल का दर्जा दिलवा दिया।

उनके प्रयासों की कहानी उन्ही की जुबानी आपके सामने प्रस्तुत करते हुए हमें गर्व का अनुभव हो रहा है-

रा.मा.वि.देशवाल
नागौर जिला मुख्यालय से 50 किमी.एवं मेड़ता रोड़ रेल्वे जंक्शन से 15 किमी. दूर रेलमार्ग पर देशवाल हाल्ट स्टेशन के पास ही स्थित यह रामावि देशवाल मेड़ता ब्लॉक के औलादन ग्राम पंचायत का एक छोटा सा गॉव है देशवाल।

विषम भौगौलिक परिस्थितियो मे स्थित इस गॉव मे आवागमन के साधनो का अभाव है। गॉव का प्रमुख व्यवसाय खेती है । सिंचित भूमि कपास व पान मैथी यहॉ की प्रसिद्ध है।

यह 1956 मे प्राथमिक विधालय ,1988 मे उच्च प्राथमिक विधालय और 2013 मे यह विधालय माध्यमिक विधालय मे क्रमोन्नत हुआ।

इस विधालय की दास्तां आप सुनोगे तो हैरान हो जाओगे मै सुरेन्द्र लोमरोड़ इस विधालय मे बतौर पहले वरिष्ठ अध्यापक 30 अक्टूबर 2014 को कार्यग्रहण किया था तब इस विधालय मे नौ का स्टाफ था विधालय की हालत बहुत ही खराब थी ।

नामांकन की बात करू तो नौ अध्यापको के होते हुए भी पूरे विधालय मे 35 विधार्थी थे वो भी दस कक्षाओ मे थे।
विधालय_भवन की बात करू , तो तीन कमरे बिल्कुल जर्जर थे छत की पट्टियॉ टूटी हुई थी, रोशनदान सारे कमरो के टूटे हुए थे तो बाकी के सारे कमरे भी कबूतरखाना, जहॉ जाओ वहॉ बींटो की महक , कैसे होगी पढाई? बात करना भी नामुमकिन ।हैरत तो तब हुई जब देखा कि बरामदे के बीचो बीच एक लकड़ी का खम्भा खड़ा था । टूटी हुई पट्टी को सहारा देने और तो ओर ऑफिस व एक दो कमरो को छोड़कर किसी कमरे के ताले देने की जरूरत नही पडती थी । पूछो क्यूं ? क्योंकि कमरो के दरवाजे टूटे हुए भंडार कक्ष मे थे

विधालय_संसाधन की बात करू तो पूरे विधालय मे तीन टेबले और आठ दस कुर्सियॉ थी प्रधानाध्यापक टेबल के जो पैर रखने वाली डंडी जो टूटी हुई थी तो उसके नीचे ईट का सहारा दे रखा था बाकी दो टेबले अध्यापको के काम के लिये थी और दस बैचें थी, पानी की बात बताऊ तो पैतीस बच्चो के लिये भी विधालय मे कोई व्यवस्था नही थी स्कूल के पास ही स्थित ट्यूबवैल से बच्चे बोतले भरकर लाते थे और मैने आते ही सबसे पहले पानी की व्यवस्था सुचारू की

विधालय_मैदान की बात करू तो मुझे उसे तैयार करवाने मे चालीस घन्टे जेसीबी चलवानी पड़ी अब आप खुद समझ जाओ की कैसा था बच्चे खेलना भी चाहे तो कहॉ खेले फिर मैने दस दिन बाद अध्यापको से एक दिन धीरे से बात चलाई कि स्कूल मे कुछ हम सब मिलकर साझा प्रयास करे तो विधालय की दशा और दिशा दोनो बदल सकते है फिर दिसम्बर महीने मे तीन युवा कर्मठ साथियों ने व. अ. पद पर कार्यग्रहण किया तो मुझे मजबूती मिली हम घर घर गये नामांकन बढाने गॉव वालो के ताने सुनने को मिले हमने विश्वास दिलाया

मैसुरेन्द्रलोमरोड़_
रामावि_देशवाल
मे अध्यापक पद पर रहते हुए एव, कार्यवाहकप्रधानाध्यापक के तौर पर #पिछलेकार्यकाल एवं कार्यवाहक HM के #दूसरेकार्यकाल मै करवाये गये #विधालयविकासहेतुअहम्_कार्य------

१--विधालय नामांकन 35 से 276 पार पहुँचाना
२---विधालय भवन की रंगाई - पुताई
३---विधालय मैदान की साफ-सफाई
४---विधालय मे शैक्षणिक स्तर सुधारना
५---वृक्षारोपण
६---पान मैथी मैदान नीलामी से विधालय विकास हेतु नीलामी राशि की योजना बनाकर राशि प्राप्त करना
७---मै सुरेन्द्र लोमरोड.,सरपंच साहब ,ओमवीरजी ताडा(RAS) द्वारा किये गये संयुक्त प्रयासो से रमसा अन्तर्गत पॉच कमरो की सेकशन निकलवाना (48लाख)
८---रमसा के पॉच कमरो के लिये पॉच लाख का फर्नीचर
९----बिजली हेतु रमसा से डिमाण्ड राशि व बिजली फिटिग की सेक्शन दिलवाकर व्यवस्था सुचारू करना
१०---लड़कियो के लिये शौचालय का पुनर्निमाण
११--- हौद को ठीक करके पानी की व्यवस्था सुचारू करवाई दो वर्ष पहले
१२---भामाशाहो से गत स्वतंत्रता दिवस पर विधालय विकास हेतु संसाधन व सहयोग राशि एकत्रित की
१३----स्वतंत्रता व गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर शानदार / रंगारंग कार्यक्रम की शुरूआत
१४---इस बार भामाशाहो को प्रशस्ति- पत्र देकर सम्मानित
१४---शत प्रतिशत परीक्षा परिणाम देना
१५---शत प्रतिशत परीक्षा परिणाम देने वाले अध्यापको को अभिनंदन पत्र देकर सम्मानित
१५—- मुख्य द्वार से कार्यालय तक सीसी ब्लॉक रोड़ सात लाख रूपये लागत ग्राम पंचायत
२६—पूर्व प्रधान मेड़ता कैलाशजी मण्डा द्वारा 171 लोहे के टेबल स्टूल लगभग लागत राशि 2 लाख
१६——सरस्वती माता का भव्य मन्दिर निर्माणाधीन
१७—- २५\२५ का स्टेज का निर्माण
१८—— ७ बीघा विधालय मैदान की तारबंदी पट्टियो सहित
१९—- सीढियो की नाल के १०/१० व ६/४ के दो दरवाजे
२०——पचास ट्रोली रेत विधालय मैदान मे
२१—— वॉलीवॉल मैदान
२२—- हर कक्षा कक्ष मे लेक्चर स्टेन्ड
२३—— बगीचे का निर्माण
२४— सारण परिवार द्वारा निर्मित भव्य मुख्य द्वार
२५—भामाशाह प्रेमशिह द्वारा निर्मित प्याऊ
26—सांईस लैब के लिये एक लाख की स्वीकृति

अगला_लक्ष्य
सरकार ग्राम पंचायत मुख्यालय पर ही सीनियर विधालय कर रही है तो हमारा विधालय औलादन पंचायत का एक गॉव है जो पंचायत से चार किमी की दूरी पर है पंचायत मुख्यालय पर विज्ञान संकाय है तो मै यह चाहता हू विधायक व ग्रामवासियो सरपंच से मिलकर हमारे विधालय को सीनियर मे क्रमोन्नत करवाकर कला संकाय खुलवाने का प्रयास करेगे इससे फायदा यह है कि देशवाल का विधार्थी विज्ञान का इच्छुक है तो औलादन स्कूल व अगर औलादन का विधार्थी कला का इच्छुक है तो देशवाल स्कूल दोनो विधालयो की परस्पर दूरी सिर्फ चार किमी है इससे एक पंचायत के दोनो गॉवो के विधार्थी आसानी से उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकेगे
अगर पंचायत के दोनो विधालयो की तुलना करे तो सीनियर औलादन मे दस कमरे और मेरे सैकेन्डरी विधालय देशवाल मे 18 कमरे है पहली से लेकर दसवी तक कक्षा के लिये पर्याप्त फर्नीचर और 25 बड़ी दरिया है वहॉ तो बस नाममात्र का फर्नीचर है।