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Will your children get employment in traditional courses?

क्या परम्परागत कोर्स दिलवा पाएंगे आपके बच्चों को रोजगार?

वर्तमान परिदृश्य

भारत एक महान राष्ट्र है एवम पुरातन समय से "विश्व गुरु" के रूप में जाना जाता है। नई शिक्षा नीति के पश्चात स्कूल व कॉलेज शिक्षा में नए परिवर्तन होंगे जो कि आने वाले भविष्य में शिक्षा के स्वरूप व उद्देश्यों के साथ ही रोजगार के अवसरों को भी प्रभावित करेंगे।

वर्तमान स्वरूप में रोजगारपरक शिक्षा के अवसर उपलब्ध है लेकिन उन्हें ओर अधिक बढाना होगा ताकि युवा वर्ग को भविष्य में रोजागर की कमी नही हो। अधिकतर मामलों में सामान्य डिग्री लेकर निकलने वाले युवाओं को रोजगार के कम अवसर मिल रहे है तथा उनको मिलने वाला पारिश्रमिक भी तुलनात्मक रूप से बहुत कम है।

उच्च शिक्षा क्षेत्र में नए विषयों से सम्बंधित कोर्स आरम्भ करने की आवश्यकता।

“If we teach today’s students as we taught yesterday’s, we rob them of tomorrow.” (John Dewey)

प्रथम पसन्द आईआईटी व मेडिकल

आज उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अभिभावकों की प्रथम पसन्द आईआईटी, मेडिकल, आईआईएम, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में अपनों बच्चों को प्रवेश दिलवाना है। इनमे प्रवेश नही मिलने पर सामान्य इंजीनियरिंग में प्रवेश या सामान्य डिग्री कॉलेज में प्रवेश दिलवा दिया जाता है। इन निजी विश्विद्यालय या कॉलेजों में कुछेक को छोड़कर अधिकांश में मात्र शिक्षा की खानापूर्ति ही की जा रही है।

क्या डिग्री देगी रोजगार?

प्रश्न यह है कि क्या सामान्य डिग्री कॉलेज व इंजीनियरिंग कॉलेज विद्यार्थियों के चार वर्षों व अभिभावकों के धन निवेश के बदले में एक निश्चित भविष्य दिलवा पा रहे है? क्या इन विद्यार्थियों को भविष्य में अच्छा रोजगार मिल पायेगा?

शिक्षविदों की राय व स्टडीज़ में सामने आ रहा है कि हमे आने वाले समय के अनुसार शिक्षण विषयों, विधियों व तरीको में निरन्तर प्रगतिशील रहना ही होगा। हम हमारे विद्यार्थियों हेतु भविष्य निर्माण नही कर सकते है लेकिन भविष्य के अनुसार विद्यार्थियों का निर्माण अवश्य कर सकते है।

आज सामान्य इंजीनियरिंग हाशिये पर

जैसा कि विदित है कि 2 दशक पूर्व वाणिज्य विषय की अत्यधिक मांग रही एवम तत्पश्चात इंजीनियरिंग व प्रबंधन के क्षेत्र में अत्याधिक मांग बढ़ी। आज वाणिज्य क्षेत्र में अध्ययन हेतु विद्यार्थियों की वरीयता कला व विज्ञान से बहुत पीछे रह गई है एवम भारत मे 30% सीट ही भरने के कारण अनेक इंजीनियरिंग कॉलेज बन्द होने के कगार पर खड़े है तथा एमबीए का पाठ्यक्रम काफी जगह पहले से ही बन्द हो गया है।

आवश्यकता आधारित हो पढ़ाई

आज उच्च शिक्षा क्षेत्र हेतु उपयोगी मानव संसाधन निर्माण की सामुहिक महती जिम्मेदारी है। ग्रेजुएट लेवल पर यह आवश्यक हो गया है कि हम परम्परागत डिग्री तक ही सीमित नही रहकर व्यापार, उद्योग,व्यवसाय व सेवा क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रमों का विकास कर शिक्षण आरम्भ करे।

विश्व के टॉप संस्थानो में हम नही

आज निश्चित रूप से हमारे देश ने उच्च शिक्षा क्षेत्र में विकास किया है एवम सम्पूर्ण राष्ट्र में शैक्षणिक सुविधाओं का विकास हुआ है लेकिन अभी हमे शिक्षा की गुणवत्तापूर्ण व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित करना है। आज हम वर्तमान शिक्षा ढांचे में रहकर अपने शिक्षण संस्थाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित

भी करना है एवम स्वयम की आवश्यकताओं पर आधारित शिक्षण व्यवस्था को भी स्थापित करना है।

कुछ नए विषय

एक अभिभावक के रूप में आपका भी फर्ज है कि आप नए कोर्स की जानकारी प्राप्त करे व इनमे बच्चों हेतु भविष्य तलाशे। कॉमर्शियल प्रेक्टिस, कम्प्यूटर एप्लीकेशन एन्ड बिजनेस मैनेजमेंट, इंस्ट्रूमेंट टेक्नोलॉजी, एप्लाइड इलेक्ट्रानिक्स, मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी, कम्प्यूटर इंजीनियरिंग टूल एन्ड डाई, फिशरीज टेक्नोलॉजी, प्रोस्थेटिक्स एन्ड ऑर्थेटिक्स, स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग, इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग, कंस्ट्रक्शन टेक्नोलॉजी, मेटेलर्जिकल इंजीनियरिंग, सैंडविच मेकेनिक्स, नेनो टेक्नोलॉजी, पॉलीमर टेक्नोलॉजी, ग्रीन केमिस्ट्री एन्ड इंजीनियरिंग इत्यादि अनेक कोर्स पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

करे डिमांड

जब आप इन विषयों की डिमांड करेंगे तो कॉलेज प्रबंधन भी इन्हें आरम्भ करने की दिशा में कार्य करेगा।

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  • आपकी राय सही है। लेकिन अभिभावकों को इन नए विषयों के बारे में जानकारी नहीं है। हमें उन्हें यह समझाने की जरूरत है कि किस विषय को कम्लिट करने पर क्या रोजगार मिले। इसी कारण उनके बच्चे का सही निर्णय नहीं हो पाता है और भविष्य अन्धकार मय हो जाता है।